जिला प्रशासन के फरमान 'हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं 'पर बोले शहर के पंप संचालक
.भोपाल । राजधानी के पेट्रोल पंपों पर बिना हेटमेट पेट्रोल नहीं देने संबंधी कलेक्टर द्वारा जारी किए गए आदेश के प्रति शहर के पंप संचालकों के संगठन ने नाराजगी जताई है। मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन और भोपाल पेट्रोल पंप डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहाकि कलेक्टर के फरमान को न्याय संगत नहीं बताया। पंप संचालकों ने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की नाकामी पेट्रोल पंप संचालकों पर थोप रहा है।
- कलेक्टर के फरमान पर पंप संचालकों ने उठाए सवाल
- पंप संचालकों ने जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश पेट्रोल के लिए हेलमेट अनिवार्यता पर सवाल उठाए हैं। पंप मालिकों ने कहाकि क्या प्रशासन वाहन चालकों में हेलमेट की अनिवार्यता सुनिश्चित करने में अक्षम है जो हेलमेट अनिवार्यता का आदेश हम लागू कर रहा है। प्रशासन यदि वाहन चालकों पर हेलमेट अनिवार्यता वाकई में लागू करना चाहता है तो प्रशासन बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले पर जुर्माने के साथ उनके वाहनों की जब्ती करें, जैसा कि राजधानी दिल्ली में व्यवस्था है।
- पेट्रोल पंप पर महिलाएं भी, विवाद की जिम्मेदारी कौन लेगा
पेट्रोल पंप संचालक समीर भार्गव ने सवाल उठाया कि प्रशासन ने पंप संचालकों पर तो जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान कर दिया पर जो लोग बिना हेलमेट जबरदस्ती पेट्रोल लेंगे उन पर क्या कार्रवाई होगी। कई पेट्रोल पंप पर महिलाएं भी काम करती हैं, इनसे यदि किसी तरह का विवाद होता है तो कौन जिम्मेदारी लेगा।
- पंप संचालकों ने जताई ट्रैफिक पुलिस पर नाराजगी
पंप संचालकों ने ट्रैफिक पुलिस को लेकर जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि रात को तो पुलिस ड्रिंक एंड ड्राइव की जांच करती है। जब कोई मुहिम चलती है ,तो सख्ती करती है, लेकिन बात हेलमेट की आई तो यह जिम्मेदारी पंप संचालकों पर डाल दी। सड़क पर इन चालकों को पकड़ा जाए। पंप संचालकों ने कहाकि पंप पर विवाद बढ़ेंगे, इन्हें कौन सुलझाएगा। क्या पुलिस और प्रशासन हमें सुरक्षा देंगे और क्या विवाद करने वाले चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी। सारी कार्रवाई तो पंप संचालकों के खिलाफ होगी। बिना किसी सपोर्ट सिस्टम के पेट्रोल पंप संचालकों को शहर के 25 लाख से अधिक लोगों का सामना करने के लिए छोड़ दिया है। एक आदमी को गाड़ी में दोबारा पेट्रोल डलाने के लिए तीन से चार दिन लगते हैं। वो दस मिनट के लिए हेलमेट लगाएगा और खोल देगा।
- बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं के विरोध में जनहित याचिका
हेलमेट न पहनने वालों को 1 अगस्त से पेट्रोल न देने के कलेक्टर के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में गुरुवार को जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन इंदौर के अध्यक्ष एडवोकेट रितेश ईनानी के माध्यम से लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि हेलमेट की अनिवार्यता का नियम शहर के बाहरी क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है लेकिन शहर के मध्य क्षेत्र में दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण यहां ट्रैफिक लगभग रेंगते हुए चलता है। याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।

- आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम 2005 के अंतर्गत उत्पाद उपलब्ध नहीं कराना दंडनीय अपराध
आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम 2005 के अंतर्गत विक्रेता अगर सामग्री की उपलब्धता होने पर ग्राहकों को उत्पाद उपलब्ध नहीं कराता है तो इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यह विक्रेता का दंडनीय अपराध है। अब अगर जिला प्रशासन के आदेश के परिपालन में पंप संचालक अगर वाहन चालक को ईंधन उपलब्ध कराने से इंकार करता है वह पंप संचालक पर मुकदमा कायम कर सकता हैं। जिसके दुष्यपरिणाम पंप संचालक को भुगतना पड़ेगा। मौजूदा हालात में पंप संचालक पर दोहरी मार पड़ रही हैं। इधर जिला प्रशासन के फरमान का चाबुक है तो उधर आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम के प्रावधान और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का चाबुक है। पंप संचालक के लिए हालात इधर खाई और उधर कुंआ की है। अत: कलेक्टर के आदेश और आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधान दोनों ही परस्पर विरोधी है।
अजय सिंह
अध्यक्ष, मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स ऐसोसिएशन

