ऑल इंडिया मोटर एसो. ने दी मध्यप्रदेश के लिए सभी बुकिंग बंद की चेतावनी
ट्रांसपोर्ट व्यवसायी मध्यप्रदेश जीएसटी विभाग के बढ़ते अत्याचार से नाराज
भोपाल।मध्यप्रदेश जीएसटी विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और ट्रक ऑपरेटरों के साथ अत्यधिक उत्पीडऩ किया जा रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि ऐसे वाहन भी परेशान किए जा रहे हैं जिनका माल मध्यप्रदेश का नहीं होता और जो केवल मार्ग से गुजर रहे होते हैं। देश के विभिन्न राज्यों से प्राप्त शिकायतों के चलते मध्यप्रदेश सहित देशभर के ट्रांसपोर्टरों ने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने बताया कि मध्यप्रदेश जीएसटी विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा विशेष रूप से परचून की गाडि़यों को निशाना बनाया जाता है। न तो कागजों की सही तरह से जांच होती है, न ही किसी वास्तविक गड़बड़ी का आधार होता है, फिर भी गाडि़यों को जब्त कर लिया जाता है। बाद में सारे दस्तावेज सही पाए जाने के बावजूद टार्गेट पूरा करने के नाम पर रसीद कटवाने को मजबूर किया जाता है और ऊपर से रिश्वत की मांग की जाती है।
- जीएसटी कमिश्नर के आदेश की कर रहे विभाग के अधीनस्थ अधिकारी अवहेलना
अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहाकि जो लोग भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं, उनके ट्रक और माल को अधिकारी अनदेखा कर देते हैं। यानी ईमानदार ट्रांसपोर्टरों पर कार्रवाई और बेईमानों से समझौता, यह स्थिति पूरे विभाग की छवि को धूमिल कर रही है। उन्होंने कहाकि हालांकि मध्यप्रदेश जीएसटी कमिश्नर स्वयं एक अत्यंत ईमानदार और संवेदनशील अधिकारी हैं, लेकिन भ्रष्टाचार का जाल इतना गहराई से फैला हुआ है कि कई अधीनस्थ अधिकारी उनके आदेशों की भी अवहेलना कर रहे हैं।
- वित्त मंत्रालय और जीएसटी काउंसिल से की हस्तक्षेप की मांग
कपूर ने कहाकि इंदौर में पहले से ही हड़ताल की स्थिति बनी हुई है और पूरे प्रदेश में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। हम स्पष्ट कर देना चाहते है कि यदि यह अन्याय और अत्याचार नहीं रुका, तो वे पूरे मध्यप्रदेश में ट्रांसपोर्ट सेवाएं बंद करने पर विचार करेंगे। ट्रांसपोर्टर इस अन्यायपूर्ण रवैये की कड़ी निंदा करती है और यह स्पष्ट करती है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता, तो दिल्ली से मध्यप्रदेश के लिए सभी बुकिंग अस्थायी रूप से बंद करने पर भी विचार किया जाएगा। संगठन के पदाधिकारियों ने आग्रह किया कि वित्त मंत्रालय और जीएसटी काउंसिल तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करें, ताकि ईमानदार ट्रांसपोर्ट व्यवसायी और ट्रक चालक आगे उत्पीडऩ का शिकार न बनें।

