आत्माराम सोनी.भोपाल
केनरा बैंक अधिकारी संगठन (सीबीओए) महासचिव के.रवि कुमार ने ट्रंप के डेड इकोनॉमी रिमार्क को लेकर कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहाकि ट्रंप का वक्तव्य एकदम, मूर्खतापूर्ण और हास्यास्पद है। जबकि भारत की अर्थव्यवस्था एक जीवंत अर्थव्यवस्था है, ट्रंप इसको मृत बता रहे है। राष्ट्रीयकृत बैंक का हर कर्मचारी अधिकारी जब कोई हस्ताक्षर देखता है तो वह उसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की आत्मा  की जीवंतता, दृढ़निश्चित्ता और उभार देखता है।


जीडीपी के साथ विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था 
महासचिव के.रवि कुमार ने कहाकि भारत की अर्थव्यवस्था आज विश्व की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। विश्व की विभिन्न संस्थाओं से अगले दो वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की वृध्दि दर 6.2 फीसदी से 6.7 फीसदी तक प्रोजेक्ट कर रही है। अर्थव्यवस्था की वृध्दि दर में हम तमाम ग्लोबल और क्षेत्रीय देशों को पीछे छोड़ते है। आज हम सबसे मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम है और 4.19 ट्रिलियन डॉलर के जीडीपी के साथ विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारी फिनटेक, फार्मा और आईटी की  एक मजबूत वैश्विक पहचान है। हम 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न के घर है जिन्होंने हाल ही में 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा का बिजिनेस पार किया है।


नित्य नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा भारत 
 उन्होंने कहाकि भारत की क्षमता को केवल जीडीपी से नहीं नापा जा सकता है। भारत के किसान वैश्विक पर्यावरणीय प्रभाव से लड़ते हुए कृषि क्षेत्र में नित्य नए कीर्तिमान स्थापित करते है। हमारे वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में झंडे गाड़े हुए है। चाहे वह मंगल मिशन हो, एआई के क्षेत्र में हो। हमारे डिजिटल पेनिट्रेशन हो, चाहे बढ़ती हुई पर कैपिटा आय हो। पिछले एक दशक में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए है। हमारा मध्यम वर्ग का बढ़ता कंजंप्शन हो। हर क्षेत्र में निरंतर वृद्धि है। ना जाने ट्रंप के अर्थव्यवस्था को देखने के कौन से पैमाने है।


- पीएसबी की शाखा किसी बड़े हेज फंड से ज्यादा मूल्यवान 
ट्रंप किसी अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन स्टॉक मार्केट हाई या अरबपतियों की संख्या से करते होंगे, लेकिन भारत मे यह पैमाने अलग है। हमारे यहां दूर ग्रामीण क्षेत्र स्थित पीएसबी की शाखा किसी बड़े हेज फंड से ज्यादा मूल्यवान है। भारत अपनी अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन इस बात से लगाता है कि हमने कितनी हाशिए पर स्थित लोगों को उपर उठाया है ना कि कितने अरबपतियों को बनाया है। यूएसए और भारत एक दूसरे से बहुत कुछ सिख सकते है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उपहास को सम्मान से बदला जाए। भारत का उपहास उड़ाकर भारत से सम्मान और प्रगतिशील संबंधों की उम्मीद और कैसे करते है। भारत बदले की लड़ाई में विश्वास नहीं करता है। हम शांति, स्थायित्व और वैश्विक विकास में विश्वास करते है। ट्रंप को जो डेड अर्थव्यवस्था दिखाई देती है वह दुनिया को उभरती हुई अर्थव्यवस्था दिखती है।