भोपाल उत्सव मेला में बढ़ी भीड़: सर्दियों में गर्म कपड़ों की बढ़ रही खरीददारी, झूलों का आनंद उठा रहे बच्चे
एवीएस न्यूज .भोपाल
भोपाल उत्सव मेला में टीटी नगर दशहरा मैदान न्यू मार्केट में उमड़ी भीड़ एक छोर से दूसरे छोर तक लोग मेले का आनंद लेने के बाद चाट-पकौड़ी, आलू की टिकिया, गोलगप्पे, सॉफ्टी, गरमा गरम इमरती, गुलाब जामुन और अन्य व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं। फलों के रस का भी भरपूर आनंद लिया जा रहा है। बच्चों और महिलाओं ने झूला, चकरी, नाव और ब्रेक डांस जैसे झूलों का लुत्फ उठाया। झूला, मौत का कुआं के पास सबसे अधिक भीड़ देखी गई। बच्चों ने छोटे झूले तो बड़ों ने खतरनाक झूले पर आनंद लिया। सुनामी झूला देखने के लिए भीड़ लगी रही लेकिन चढऩे की हिम्मत हर कोई नहीं दिखा पा रहा था। इधर, महिलाएं शृंगार व घरेलू सामान की खरीदारी में जुटी रही।
गर्म कपड़ों की दुकानों पर लोगों ने शॉल, कंबल, चादर आदि खरीदे। बच्चों की संख्या मेले में अधिक दिखी। झूला, चर्खी, मौत का कुआं, ड्रैगन ट्रेन का लुत्फ लेने के लिए लोगों को कतार में खड़े होकर टिकट लेना पड़ा। युवा गुब्बारे पर निशाना लगाते रहे। परिवार संग लोगों ने मेले में पहुंच कर आनंद उठाया। सामान की खरीदारी की। इससे मेले में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही। मेले में उमड़ी भीड़ को देखते हुए व्यापारी भी खुश दिखे। अधिकांश लोग 500 रुपए की खरीददारी कर दुकानदास से साप्ताहिक इनामी ड्रॉ के कूपन लेना नहीं भूल रहे थे।

-सर्दियों में गर्म कपड़ों की बढ़ रही खरीददारी
मेला समिति के महामंत्री सुनील जैनाविन ने बताया कि मौसम में ठंडक बढऩे के साथ ही मेले के बाजारों में भिड़ उमड़ रही है। खासकर गर्म कपड़ों के बाजारों में इन दिनों जबरदस्त बिक्री हो रही है।मेले में आए लोग ऊनी कपड़ा बाजार में कोट, जर्सी, स्वेटर, जैकेट, जरकीन, मफलर, रजाइयां और कंबल खरीद रहे हैं।इसके साथ ही,रोजमर्रा पहनने वाले पैंट, शर्ट और जींस जैसे अन्य कपड़े भी सस्ती दरों पर उपलब्ध हैं। गर्म कपड़ों के अलावा, मेले में मनिहारी,लोहा,चूड़ी, हैंडलूम,बर्तन,खिलौने, जूता-चप्पल,क्रॉकरी और सजावट के सामान की भी खूब खरीदारी हो रही है। महिलाएं अपनी जरूरत का सामान खरीद रही हैं।
अशोक गुप्ता ने बताया कि सर्दी की शुरुआत होने के साथ ही ऊनी कपड़ा बाजार में अच्छी ग्राहकी शुरू हो गई है। लोग सर्दी से बचाव के लिए ऊनी वस्त्र खरीद रहे हैं। मेले के ऊनी कपड़ा बाजार में सिले-सिलाए वस्त्र सिलाई से भी कम दर पर उपलब्ध हैं, जिससे इन दुकानों पर ग्राहकों की खासी भीड़ उमड़ रही है। मेले के बाजार में कई दुकानों पर सस्ती दरों पर पैंट-शर्ट उपलब्ध हैं। दुकानदार हर माल एक दाम की आवाज लगाकर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। यहां कई प्रकार के कपड़े भी उपलब्ध हैं, जो गुणवत्ता में काफी मजबूत हैं। लोग इन्हें खरीदकर अपनी फिटिंग के अनुसार पहन लेते हैं, जिनकी लागत नए वस्त्र की सिलाई से भी कम आती है। इससे यह मेला कई गरीबों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जहां लोग साल भर की जरूरत के अनुसार कपड़े खरीद रहे हैं।

‘रील बनाओं..सोना पाओं’ कॉन्टेस्ट शुरू
भोपाल उत्सव मेले ने 33साल पूरा होने के मौके पर प्रदेशवासियों के लिए एक खास कॉन्टेस्ट शुरू किया है। इस कॉन्टेस्ट का नाम ‘रील बनाओं..सोना पाओं ’ है। इस प्रतियोगिता की शुरुआत 10 दिसम्बर को हुई है और ये 25 दिसम्बर तक चलेगा। इस प्रतियोगिता के तहत नागरिकों को हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। मेला समिति के महामंत्री सुनील जैनाविन और अशोक गुप्ता ने बताया कि इस प्रतियोगिता के तहत आपको भोपाल उत्सव मेला की एक रील बनाकर सोशल मिडिया इंस्टाग्राम, ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब पर वायरल करनी है। आपको ऐसी रील बनानी है, जिसमें ये दिखाना होगा कि भोपाल उत्सव मेला आपके जीवन पर कैसे सकारात्मक प्रभाव डाला है। हर रील इस बात पर प्रकाश डालना है मेला राजधानी के नागरिकों को व्यापार-उत्सव-मनोरंजन-खान-पान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करता है..साथ ही मेला समिति सेवा भक्ति और समाज सेवा का अनोखा संगम प्रस्तुत करती है।
मेले का उदेश्य मानव कल्याण सेवा के संकल्प को पूरा करते है। अभी मेले में किस प्रकार का गतिविधियां लोगों को अपनी और आक र्षित कर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध क रा रहा है,इसके अलावा रील बनाने वाले को मेला स्थल भोपाल उत्सव मेला टीटी नगर दशहरा मैदान को मेंसन करना है। जिस किसी की रील बनाने वाले के जीतने अधिक फॅालोवर होगे उसे इनाम से सम्मानित किया जायेगा। मेले के प्रति आप जितने ज्यादा आप क्रिएटिव होंगे, उतना ही आपके जीतने के चांस बढ़ जाएंगे। इस प्रतियोगिता के तहत अन्य ईनाम भी देगी। इस प्रतियोगिता हिस्सा लेने के लिए आपको कुछ शर्तों का पालन करना होगा। आपकी रील कम से कम 1 मिनट की होनी चाहिए। आपकी रील बिल्कुल ऑरिजिनल होनी चाहिए और पहले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं होनी चाहिए। आप अपनी रील को हिंदी, अंग्रेजी के अलावा किसी भी लोकल भाषा में बना सकते हैं। इसके टॉप विजेता को सोने का सिक्का और चांदी का सिक्का व अन्य ईनाम मिलेगें। ऐसे में अगर आपको भी रील्स बनाने का शौक है, तो इस मौके को हाथ से जाने न दें और अपनी क्रिएटिविटी से लोगों के साथ-साथ मेला समिति का भी दिल जीत लें।

