राज्य शासन ने किया “एकीकृत टाउनशिप नियम–2026” का प्रकाशन - पॉलिसी के बाद अब जमीन पर लागू होने वाले नियम तैयार
एवीएस न्यूज. भोपाल
मध्यप्रदेश में एकीकृत टाउनशिप नीति–2025 का दस्तावेज ड्राफ्ट रूप में सामने आया था, पर अब सरकार ने एकीकृत टाउनशिप नियम–2026 जारी करके टाउनशिप विकास को स्पष्ट, चरणबद्ध और जवाबदेह प्रक्रिया में बदल दिया है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब टाउनशिप “कॉलोनी” जैसी छोटी योजनाओं की तरह नहीं, बल्कि शहर–क्षेत्र, मेट्रो, राजधानी के विस्तार की एक सुनियोजित इकाई के रूप में स्वीकृति, निगरानी और क्रियान्वयन के मानकों के साथ आगे बढ़ेगी।
न्यूनतम क्षेत्रफल और पहुंच मार्ग: विकास का स्केल तय
नियमों में टाउनशिप के लिए न्यूनतम भूमि और पहुंच मार्ग के मानक स्पष्ट हैं। शहरी स्थानीय निकाय/योजना क्षेत्र में छोटे शहरों के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर और बड़े शहरों (जनसंख्या 5 लाख से अधिक) के लिए न्यूनतम 20 हेक्टेयर का आधार सामने आता है। साथ ही, परियोजना स्थल तक पहुंच के लिए 24.0 मीटर चौड़ी प्रमुख सड़क तथा बड़े प्रोजेक्ट आकार पर 30.0 मीटर सड़क की शर्तें टाउनशिप को वास्तविक “शहरी इकाई” के पैमाने पर ले जाती हैं। नियम–2026 का सबसे निर्णायक पक्ष यह है कि विकासकर्ता का पंजीयन, उसकी वैधता अवधि और नवीनीकरण जैसी व्यवस्थाएं स्पष्ट की गई हैं। पंजीयन शुल्क 50 हजार रुपए , नवीनीकरण शुल्क 25000 रुपए और प्रमाणपत्र की वैधता 5 वर्ष जैसी व्यवस्थाएं लागू होने से बाजार में अनुशासन बढ़ेगा और अव्यवस्थित/अनुभवहीन इकाइयों की एंट्री स्वतः सीमित होगी। टाउनशिप के क्षेत्रफल के अनुसार नेटवर्थ और टर्नओवर आधारित पात्रता-मानक भी नियमों में रखे गए हैं। इसका संदेश साफ है टाउनशिप अब केवल भूमि-विक्रय का मॉडल नहीं, बल्कि वित्तीय और तकनीकी क्षमता के साथ “पूरा करके देने” वाली योजना होनी चाहिए।
समिति-तंत्र और सिंगल विंडो: प्रक्रिया तेज, पर तकनीकी जवाबदेही जरूरी
नियमों में स्वीकृति के लिए समिति/प्राधिकरण आधारित ढांचा आता है, जिससे विभिन्न विभागों की भूमिकाएं स्पष्ट होती हैं और “सिंगल विंडो” जैसी सुविधा व्यवहार में उतरती है। हालांकि मेट्रो/राजधानी जैसे क्षेत्रों में यह आवश्यक होगा कि समिति की समीक्षा केवल फाइल-आधारित न होकर यातायात, जल, सीवरेज, वर्षा-जल निकास, ऊर्जा, सामाजिक अवसंरचना जैसे तकनीकी मानकों पर भी समान रूप से कठोर रहे क्योंकि टाउनशिप का प्रभाव सीधे शहर की क्षमता और नागरिक सेवाओं पर पड़ता है।
मेट्रो और राजधानी के लिए अवसर पर निगरानी अनिवार्य
एकीकृत टाउनशिप नियम–2026 राज्य के शहरीकरण को “छोटे-छोटे बिखरे विकास” से निकालकर एकीकृत, रोजगार-संगत, अवसंरचना-आधारित विकास की दिशा देता है। अब सफलता की कसौटी स्पष्ट है स्वीकृति के बाद समय पर क्रियान्वयन, चरणबद्ध डिलिवरी, और नागरिक सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता। नियमों ने ढांचा दे दिया है, अब शासन, निकाय, विकासकर्ता और नागरिक चारों की साझा निगरानी से ही इसका लाभ राजधानी और मेट्रो क्षेत्र को दीर्घकाल में मिलेगा।

क्रेडाई ने किया एकीकृत टाउनशिप नियम–2026 के प्रकाशन का स्वागत
क्रेडाई भोपाल के प्रेसीडेंट मनोज मीक ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा “एकीकृत टाउनशिप नियम–2026” का प्रकाशन राज्य के शहरी विकास के लिए एक निर्णायक और स्वागत योग्य कदम है। ये नियम टाउनशिप विकास को मेट्रो तथा राजधानी स्तर की सुनियोजित, इंफ्रास्ट्रक्चर-सक्षम और रोजगार युक्त शहरी इकाई के रूप में स्थापित करते हैं।
क्रेडाई के अध्यक्ष मीक ने आग्रह
इन नियमों के सफल क्रियान्वयन के लिए तीन बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। पहला- ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर मुख्य सड़कें, बल्क वॉटर, पावर, सीवरेज कनेक्टिविटी के लिए स्पष्ट समय-सीमा और एजेंसी-वार उत्तरदायित्व तय हों, ताकि परियोजनाएa अनावश्यक देरी से न जूझें। दूसरा- स्वीकृति प्रणाली को वास्तविक अर्थों में सिंगल-विंडो और डिजिटल-टाइमलाइन के अनुरूप संचालित किया जाए, जिससे उद्योग और शासन दोनों की दक्षता बढ़े और तीसरा 9प्रत्येक टाउनशिप के लिए पब्लिक-डोमेन में पारदर्शी प्रोजेक्ट डैशबोर्ड बनाया जाए जिसमें चरणवार प्रगति, बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता और अनुपालन स्थिति स्पष्ट रहे।
मीक ने कहाकि क्रेडाई, एक जिम्मेदार उद्योग-साझेदार के रूप में, सरकार के साथ “प्लान्ड अर्बन ग्रोथ” की इस दिशा में पूर्ण सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा स्पष्ट मत है कि अच्छे नियम तभी सार्थक हैं जब वे तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष क्रियान्वयन के साथ नागरिकों तक परिणाम पहुंचाएँ। एकीकृत टाउनशिप नियम–2026 इसी दिशा में एक मजबूत शुरुआत है।

