कथा वाचक श्यामसुंदर महाराज ने विभिन्न प्रसंगों के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की सुनाई कथा
- जैतवारा के बालाजी पैलेश में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का चौथ दिन
- नंदगांव में मना नंदउत्सव, गोप-गोपियों ने बधाई गीत गाकर दी बधाई
- भगवान श्रीकृष्ण की सजीव झांकी भी सजाई

शिवनारायण सोनी, भोपाल।
सतना जिले के जैतवारा के कोठी रोड स्थित बालाजी पैलेश में चल रही भव्य श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को मथुरा से पधारे कथा वाचक डॉ. श्यामसुंदर पाराशर जी महाराज ने संगीतमय भजनों के साथ कथा का शुभारंभ किया। इस दौरान पूरा पंडाल बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं से खचा-खच भरा हुआ था। महाराज जी ने गज और ग्राह, हीरणाकश्यप और प्रहलाद के साथ राजा बली और भगवान विष्णु के वामन अवतार की रोचक कथा सुनाई।

कथा के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी अपनी टीम के साथ पंडाल में पहुंचकर भागवान और महाराज जी का आशीर्वाद लिया। महाराज डॉ. श्यामसुंदर पाराशर जी ने उनका सम्मान भी किया।

कथा के चौथे दिन बुधवार को कथा वाचक डॉ. श्यामसुंदर पाराशर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बहुत की सुंदर कथा सुनाई। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रसंगों से श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया। महाराज जी ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया भगवान श्रीकृष्ण की माता देवकी और वासुदेव ने अपने पूर्व जन्म में भगवान विष्ण की तपस्या कर पुत्र रूप में पाने की इच्छा व्यक्त की। तब भगवान ने उन्हें पुत्र स्वरूप में मिलने का वरदान दिया था। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कंश के कारागार में हुआ। भगवान ने वासुदेव को दर्शन देकर कहा कि इस बालक को नंदगांव अपने मित्र नंदबाबा के यहां छोड़ कर आओ और वहां उनके घर जन्मी कन्या को लेकर यहां आना। वासुदेव ने भगवान की बात मानकर नन्हे बालक को सूप में लेकर नंदगांव जाने के लिए निकले तो उनकी बेडि़यां खुल गईं, द्वारपाल सब गहरी नींद में सो गए और कारागार के दरवाले अपने आप ही खुल गए।

वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को लेकर रात में ही नंदगांव पहुंचे और वहां से कन्या को लेकर वापस कारागार आ गए। कारागार में पहुंचते ही नन्ही कन्या जोर-जोर से रोने लगी। कन्या के रोने की आवाज सुन कर पहरेदार उठ गए और तुरंत ही महाराज कंस को इसकी सूचना दी। कंस कारागार में पहुंचा और कहने लगा यह तो कन्या है। शायद मैरे भय के कारण बालक नहीं हुआ। उसने उस कन्या को उठाया और दीवार में पटकने का प्रयास जैसे ही किया वह कन्या कंस के हाथ से उछलकर विराट स्वरूप में मां दुर्गा का रूप धर लिया और बोलीं, दुष्ट कंस तू मुझे क्या मारेगा, तुझे मारने वाला तो पैदा हो चुका है। शीघ्र ही वह तेरा वध करेगा। इतना कहकर विंध्याचल पर्वत पर जकर माता विराजमान हो गईं। वही माता आज विंध्यवासिनी के नाम से जानी जाती हैं।
नंदबाबा के यहां मनाया नंदमहोत्सव

इधर, नंदगांव में जैसे ही खबर मिली की यशोदा को बालक हुआ है, तो पूरे गांव के ग्वाल और गोपियों ने उत्सव मनाते हुए यशोदा को बधाई देने उनके घर पहुंची। ग्वालों और गोपियों ने खूब नाच गा कर उत्साह से नंदमहोत्सव मनाया और माता यशोदा को बधाइयां दी। इस दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु सुंदर भजन के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की सजीव झांकी भी सजाई गई। पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण पर पुष्पवर्षा कर बधाई गीत गाकर जमकर झूमे। वहीं कई श्रद्धालुओं ने बाल स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण को खेल-खिलौने और उपहार भेंट किए। अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद का वितरण किया।

