कलर्स प्रस्तुत करता है ‘जूही मुई’: ऑटिज़्म और स्वीकार्यता की प्रेरणादायक कहानी
29 जून से प्रीमियर, और उसके बाद हर सोमवार से शुक्रवार रात 9:30 बजे सिर्फ कलर्स और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होगा।
एवीएस न्यूज. मुंबई
कहते हैं, “हर दिमाग़ अपनी तरह से चमकता है।” ऐसे समय में जब समाज व्यक्तिगतता का जश्न मनाता है लेकिन उसे समझने में अक्सर संघर्ष करता है, कलर्स लेकर आ रहा है ‘जूही मुई’ एक दिल छू लेने वाली कहानी एक युवा ऑटिस्टिक लड़की की, जो ऐसे संसार में जी रही है जो उसे लगातार कम आंकता है।
कहानी के केंद्र में है जूही सूरी एक तेज़ और उज्ज्वल युवती, जिसकी दुनिया को देखने का अनोखा तरीका उसकी सबसे बड़ी ताक़त भी है और सबसे बड़ी चुनौती भी। असाधारण याददाश्त और पैनी सोच से लैस जूही के पास ऐसी क्षमताएँ हैं जो उसे दूसरों से अलग बनाती हैं। लेकिन अपनी प्रतिभा के बावजूद, जूही अक्सर इस वजह से आंकी जाती है कि वह अलग है और समाज की संकीर्ण परिभाषा के हिसाब से ‘नॉर्मल’ नहीं मानी जाती।
कानून के चेंबर के अनुशासन में अपने भाई करण के साथ पली बढ़ी जुही ने बचपन से ही अपने स्नेही पिता राजेंद्र सूरी को देखा, जो एक सम्मानित वकील हैं और अपनी खुद की प्रैक्टिस चलाते हैं। वह रोज़ाना जिस दुनिया से लड़ते हैं, उससे जुही को बचाकर रखते हैं। जुही का दिमाग़ कानून के लिए ही बना है उसे धाराएँ शब्दशः याद रहती हैं, वह मिसालों को तुरंत जोड़ लेती है और वे बारीकियाँ देख लेती है जो दूसरों की नज़र से छूट जाती हैं।
पिता का ओवरप्रोटेक्टिव स्वभाव और भाई की नज़र में ‘जीनियस’ कहलाने वाली जुही को सामान्य तरीके से देखने वाला एकमात्र इंसान है इंस्पेक्टर सन्यम सिंह एक ज़मीन से जुड़ा, सहज प्रवृत्ति वाला पुलिस अफ़सर, जो उसका सबसे अप्रत्याशित साथी बनता है। इस सफ़र में कहानी यह सवाल उठाती है कि क्या हमें लोगों से यह उम्मीद करनी चाहिए कि वे सिस्टम में फिट होने के लिए बदलें, या फिर अब समय आ गया है कि सिस्टम को बदला जाए ताकि वह उन्हें अपने भीतर शामिल कर सके?
ईशा सिंह के मुख्य किरदार वाली ‘जुही मुई’ में संजय सूरी पिता राजेंद्र सूरी के रूप में, सई देवधर सुचित्रा सूरी के रूप में, अयूब ख़ान उत्तम सूरी के रूप में, क्रुशाग घुगे करण सूरी के रूप में और विजयेंद्र कुमेरिया इंस्पेक्टर सन्यम सिंह के रूप में नज़र आएंगे। ‘जुही मुई’ का प्रीमियर 29 जून को होगा और इसके बाद यह शो हर सोमवार से शुक्रवार रात 9:30 बजे सिर्फ़ कलर्स और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होगा।
जूही की दुनिया में कदम रखने के अनुभव पर ईशा सिंह कहती हैं, “जूही का किरदार निभाना मेरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और गहराई से संतोषजनक अनुभव रहा है। यह भूमिका हमेशा मेरे दिल में एक खास जगह बनाए रखेगी। एक ऐसी लड़की को पर्दे पर उतारना जो अलग तरह से संवाद करती है, मेरे लिए अभिनय का बिल्कुल नया तरीका था।
मुझे चेहरे के सूक्ष्म भावों, शारीरिक बारीकियों और खामोशी के ज़रिए उसकी गहरी दुनिया दिखानी पड़ी। इस असाधारण ऑटिस्टिक लड़की को ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ जीवंत करना मेरे लिए एक बड़ी ज़िम्मेदारी थी। सबसे ज़्यादा मैं चाहती हूँ कि दर्शक लेबल्स से परे जाकर देखें कि यह बेहद बुद्धिमान युवती भी प्यार, खुशी और दुख उसी तरह महसूस करती है जैसे हम सब करते हैं। यह कहानी असल में समावेशन, गरिमा और इस बात को पहचानने की है कि ऑटिस्टिक लोग समाज को कितना समृद्ध और बेहतर बना सकते हैं।”
इंस्पेक्टर संयम सिंह का किरदार निभाने के अनुभव पर विजयेंद्र कुमेरिया कहते हैं, “जूही मुई’ में पहली बार मैंने स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी पहनी है और चमकदार सूट्स व पारंपरिक हीरोइज़्म से हटकर एक बिल्कुल अलग किरदार निभाया है। इंस्पेक्टर संयम सिंह पूरी तरह देसी है, भावनाओं में पारदर्शी है और अपने आस-पास की दिखावे वाली दुनिया में बिल्कुल अलग-थलग पड़ जाता है।
मुझे इस किरदार की सबसे बड़ी खूबी यही लगी कि वह मानता है कि सिस्टम अपने आप संवेदनशील नहीं बनते, इंसानों को उन्हें संवेदनशील बनाना पड़ता है। संयम के ज़रिए शो हमें याद दिलाता है कि सहानुभूति का मतलब बड़े-बड़े शब्द या प्रगतिशील जार्गन नहीं है, बल्कि यह है कि आप मौजूद रहें, लोगों के साथ खड़े हों और अन्याय से नज़रें न चुराएँ। मेरी उम्मीद है कि दर्शक ‘जूही मुई’ को सिर्फ एक लीगल थ्रिलर के रूप में न देखें, बल्कि इसे ऐसी कहानी मानें जो हमारी ताक़त, न्याय और समावेशन की सोच को चुनौती देती है और हमें एक और दयालु, संवेदनशील दुनिया बनाने के लिए प्रेरित करती है।






