मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने कहा कि मंडी बोर्ड भविष्य में भी प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों के जीआई पंजीयन और वैश्विक ब्रांडिंग के लिए सक्रिय सहयोग देता रहेगा। 

एवीएस न्यूज .भोपाल 
 मध्यप्रदेश की चार पारंपरिक कृषि उपजों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने से प्रदेश के किसानों, विशेषकर महाकौशल और आदिवासी क्षेत्रों के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर और छत्रिय धान को जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। इसी संकल्प के तहत किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन के मार्गदर्शन, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के सहयोग तथा जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के तकनीकी प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है।


किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और निर्यात को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि चार कृषि उपजों को जीआई टैग मिलना प्रदेश के किसानों के लिए गर्व का विषय है और इससे उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।


 अधिकारियों ने जताई प्रतिबद्धता
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने कहा कि जीआई टैग स्थानीय कृषि विरासत के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।

वहीं, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने कहा कि मंडी बोर्ड भविष्य में भी प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों के जीआई पंजीयन और वैश्विक ब्रांडिंग के लिए सक्रिय सहयोग देता रहेगा।


  किसानों को मिलेगा बेहतर दाम, बढ़ेगी वैश्विक पहचान
जीआई टैग मिलने से इन कृषि उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलेगा, उनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता मजबूत होगी। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ कृषि निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से महाकौशल के आदिवासी क्षेत्रों में उत्पादित इन फसलों की मांग बढऩे से किसानों की आय में वृद्धि होगी।

साथ ही पारंपरिक कृषि पद्धतियों, जैव विविधता और स्थानीय कृषि विरासत के संरक्षण को भी बल मिलेगा। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात के नए अवसर विकसित होंगे, जिससे कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
 

पहले भी मिल चुके हैं दो जीआई टैग
उल्लखनीय है कि इससे पहले सीहोर शरबती गेहूं और रीवा सुंदरजा आम को भी जीआई टैग दिलाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग तथा मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य सरकार अब प्रदेश की अन्य विशिष्ट कृषि उपजों को भी जीआई टैग दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।