19 साल पुराने 2005  प्लान के आधार पर ही शहर का किया जा रहा विस्तार  


 एवीएस न्यूज.भोपाल


भोपाल में मास्टर प्लान  के लंबे समय से लंबित होने के कारण शहर का विकास बेतरतीब और अनियंत्रित तरीके से हो रहा है। 1995 के बाद से कोई नया मास्टर प्लान अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है, जिससे 19 साल पुराने (2005) प्लान के आधार पर ही शहर का विस्तार किया जा रहा है। भोपाल वासियों और विशेषज्ञों का कहना है कि मास्टर प्लान की देरी के कारण शहर का "तैरता हुआ अनप्लांड विकास" हो रहा है, जहां अवैध कॉलोनियों को नोटिस देकर बात खत्म कर दी जाती है, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकलता।

 


  शहर में बढ़ गया ट्रैफिक जाम, पानी की कमी, जल निकासी  की समस्या और अवैध निर्माणों का दबाव  : विकास 
 आराध्य भूमिका कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर विकास शर्मा  के अनुसार मास्टर प्लान की कमी के चलते भोपाल में अवैध कॉलोनियों का निर्माण तेजी से हुआ है। 2025 तक की स्थिति में, नियोजन सीमा के भीतर लगभग 1.2 लाख से अधिक अनधिकृत निर्माण की पहचान की गई है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा नीलबाड़-रातीबड़ क्षेत्र (बड़ा तालाब का कैचमेंट एरिया) में है।

उन्होंने कहाकि मास्टर प्लान न होने से शहर में ट्रैफिक जाम, पानी की कमी, जल निकासी  की समस्या और अवैध निर्माणों के चलते सुविधाओं पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है।  मास्टर प्लान के अभाव में निवेशक भी स्पष्ट नीति के अभाव में निवेश करने से हिचकते हैं, जिससे शहर का व्यवस्थित विकास रुक गया है। 2023 में आया मास्टर प्लान का ड्राफ्ट भी रद्द कर दिया गया। अब सरकार 'मेट्रोपॉलिटन विजन' के तहत 2047 तक की जरूरतों के अनुसार नया मास्टर प्लान बनाने का दावा कर रही है।
 

लोगों के हित की पूर्ति के लिए आम जनता को परेशानी हो रही 
अधिवक्ता मृदुल आर्य ने कहाकि  भोपाल का मास्टर प्लान अधिकारियों एवं नेताओं के हितों की पूर्ति के लिए पिछले कई वर्षों से अटका हुआ है। इन लोगों के हित की पूर्ति के लिए आम जनता को परेशानी हो रही है, जिन गरीब किसानों की जमीन शहर के आसपास है । वह उसे बेचना चाहते हैं लेकिन प्लान नहीं होने के कारण उन्हें सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। भोपाल एक बढ़ता हुआ महानगर है जिसे प्लांड डेवलपमेंट की बहुत आवश्यकता है ताकि इस शहर का हरा भरा मूल स्वरूप बरकरार रखा जा सके। 


 मास्टर प्लान को जारी करना किसी बरैया के छत्ते में हाथ डालना जैसा 
मध्यप्रदेश पीएचडी चेंबर कॉमर्स के को-चेयरमैन, मनोज मोदी ने कहाकि मास्टर प्लान को जारी करना किसी बरैया के छत्ते में हाथ डालना जैसा है। अब समस्या यह है कि जब तक इसे टाला जाए तो टाला जा रहा है। क्योंकि पूरे स्टेक होल्डर्स को एक प्लेटफार्म पर लाना बहुत ही बड़ी बात होगी। सब स्टेक होल्डर्स से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना टेडी खीर है। क्योंकि नेचुरल रिसोर्सेज को प्रोटेक्ट करते हुए उनके सभी सब्जेक्ट को ध्यान में रखते हुए नया प्लान जारी करना, जिससे भोपाल की ग्रोथ हो, ऐसा प्लान बहुत कठिन हैं इसीलिए इतने सालों में भी मास्टर प्लान नहीं आ सका है। कोई सरकार सबका साथ सबका प्रयास, सबका विश्वास और फिर विकास का नारा तो दे सकती है पर अमल करना एक तरह से मुश्किल है और कोई सरकार बेफजूल में हाईकोर्ट के चक्कर लगाना नहीं चाहती।