कृत्रिम सार्टेज, पुराने सौदे कैंसिल कर नए सौदे पर ही माल दे रहे मिलवाले 


 एवीएस न्यूज.. भोपाल


वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध की आड़ में खाद्य तेलों में फुल मुनाफाखोरी चल रही है। स्थानीय तेल जिंस बाजार में खाद्य तेलों के भाव में 30 से 40 रुपए किलो की तेजी है, जब इन बीज(सीड्स) के भाव अभी भी सामान्य या स्थिर है।

बाजार जानकारों के अनुसार सटोरियों और प्लांटवालों ने मिली भगत कर खाद्य तेलों कृत्रित तेजी निर्मित कर रखी है। बताया जा रहा है कि यूद्ध के बहाने प्लांट वालों ने सॉर्टेज उत्पन्न कर तेल कारोबारियों के पुराने सौदे कैंसिल कर रहे हैं और नए सौदे पर ही माल की सप्लाई दे रहे हैं। नए सौदे ऊंचे दाम पर किया जा रहा है।

 
 तेल कारोबारियों का कहना है कि वर्ष 2026 की शुरूआत में जो भाव सोयाबीन के थे वही कीमत आज भी 4500 से 5000 रुपए क्विंटल के बीच में ही उतार-चढ़ाव कर रही हैं। तो वहीं सरसों का भाव 5500 से 6000 रुपए क्विंटल के बीच है। लेकिन सोयातेल और सरसो तेल सहित अन्य खाद्य तेलों के भाव में तेजी का उबाल है, जो कि फुल मुनाफाखोरी का नतीजा है।

 
स्थानीय तेल ब्रोकर रमाकांत तिवारी ने बताया कि स्थानीय थोक तेज बाजार हनुमानगंज-जुमेराती और आजाद मार्केट में 15 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच सोयाबीन तेल 135 से 138 रुपए किलो था, लेकिन प्लांटवालों की मुनाफावसूली के चलते मौजूदा समय में सोयाबीन तेल 170 से 172 रुपए किलो के भाव बिक रहा है। इसी प्रकार 130 से 132 रुपए किलो वाला पाम तेल अभी 150 से 160 रुपए किलो के भाव है। 160 रुपए किलो का सनफ्लावर तेल 200 रुपए में, 155 से 160 रुपए का मूंगफली तेल 220 से 230 रुपए में, 150 से 155 रुपए किलो सरसो का तेल 180 से 190 रुपए में और 125 से 130 रुपए का राईस तेल 160 से 165 रुपए किलो के भाव पर बेचा जा रहा है।  


उल्लेखनीय है कि सोयाबीन के किसान अभी भी अच्छी कीमतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन तेल मिलों ने सोयाबीन से बनने वाले तेल की कीमतें बढ़ा दी हैं।   यह तेजी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद देखी जा रही है, जो संभावित मुनाफाखोरी की ओर इशारा करती है। जानकारों का मानना है कि स्टॉक मौजूद होने के बावजूद युद्ध का डर दिखाकर पुराने स्टॉक को भी ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।

 
 
खाद्य तेलों की कृत्रिम तेजी पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग
 खाद्य का उपयोग करने वाले होटल-रेस्टोरेंट, नमकीन निर्माता सहित कारोबारी और उपभोक्ताओं ने खाद्य तेलों की कीमतों में कृत्रिम तेजी को लेकर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जानकारों का मानना है कि इस तेजी में जमाखोरी और अंतरराष्ट्रीय कारणों का मिश्रण है। सरकार से मांग की जा रही है कि वह स्टॉक सीमा तय करे और जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। वहीं उद्योग जगत के जानकारों ने सरकार से पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क को और कम करने की मांग की है ताकि सस्ती आपूर्ति बनी रहे। 

न्यूज़ सोर्स : सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग