आयकर की धारा 148ए - स्टांप ड्यूटी के अंतर से उपजे पुनर्निर्धारण नोटिस क्रेता और विक्रेता पर पड़ सकते हैं भारी
स्टांप ड्यूटी मूल्यांकन की बारीकियों को समझाने टैक्स लॉ बार एसो.ने आयोजित किया सेमीनार
एवीएस न्यूज. भोपाल
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन द्वारा शुक्रवार को अचल संपत्ति के लेन-देन में स्टांप ड्यूटी मूल्यांकन के अंतर के कारण प्रारंभ होने वाली पुनर्निर्धारण कार्यवाहियों की बारीकियों से अवगत कराने सेमीनार का आयोजन किया गया है। इस दरमियान आयोजित तकनीकी सत्र का आयोजन हुआ।
सत्र में यह रेखांकित किया गया कि एक ही संपत्ति के लेन-देन पर विक्रेता (आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 50सी / 43सीए जो आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 78 / 53 के समकक्ष है) तथा क्रेता (नवीन अधिनियम की धारा 56(2)(एक्स) / 92(2)(एक्स) दोनों पर एक साथ कर वृद्धि लागू की जा सकती है, जहाँ स्टांप ड्यूटी मूल्य, विक्रय पत्र में दर्शाए गए प्रतिफल से अधिक हो।
वक्ता ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 26क्यूबी के आंकड़े, एसएफटी -12 रिपोर्टिंग तथा पंजीयन विभाग से प्राप्त सूचनाएँ अब आयकर विभाग के समक्ष सम्पूर्ण लेन-देन का स्वरूप प्रस्तुत कर देती हैं, जिसके आधार पर विभाग एक ही लेन-देन पर दोनों पक्षकारों के विरुद्ध समानांतर पुनर्निर्धारण कार्यवाही प्रारम्भ कर सकता है।
इस मौके पर वक्ता ने एडीवी आधारित नोटिसों के सामना करने वाले व्यवसायियों के लिए छह व्यावहारिक बचाव रणनीतियां प्रस्तुत कीं। सांविधिक 110 फीसदी सुरक्षा-कवच नियम का आश्रय लेना, धारा 55ए / 91 तथा 142ए / 269 के अंतर्गत विभागीय मूल्यांकन अधिकारी को संदर्भण, करार की तिथि के नियम का प्रयोग, जहां पंजीयन से पूर्व बैंकिंग माध्यम से भुगतान किया गया हो, राय-परिवर्तन का बचाव, जहां स्टांप ड्यूटी मूल्य मूल निर्धारण के समय ही अभिलेख पर हो, अनुमोदन एवं समय-सीमा संबंधी प्रक्रियागत आपत्तियां तथा नवीन अधिनियम की धारा 267 के अंतर्गत अद्यतन विवरणी का रणनीतिक उपयोग।
व्याख्यान का समापन एक संक्रमण तालिका के साथ हुआ। जिसमें स्पष्ट किया गया कि आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(सी) के अंतर्गत 01 अप्रैल 2026 को लंबित समस्त कार्यवाहियां पुराने अधिनियम (1961) के अंतर्गत ही चलती रहेंगी, जबकि कर-वर्ष 2026-27 एवं उसके पश्चात् के लिए नवीन पुनर्निर्धारण विशेषतः नवीन अधिनियम के अंतर्गत शासित होगा।
व्याख्यान का समापन एक संक्रमण तालिका (Transition Matrix) के साथ हुआ, जिसमें स्पष्ट किया गया कि आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(c) के अंतर्गत 01 अप्रैल 2026 को लंबित समस्त कार्यवाहियाँ पुराने अधिनियम (1961) के अंतर्गत ही चलती रहेंगी, जबकि कर-वर्ष 2026-27 एवं उसके पश्चात् के लिए नवीन पुनर्निर्धारण विशेषतः नवीन अधिनियम के अंतर्गत शासित होगा।
इस स्टडी सर्किल के दौरान संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख, उपाध्यक्ष मयंक अग्रवाल एवं अंकुर अग्रवाल, सचिव धीरज अग्रवाल, सह सचिव संदीप चौहान एवं वरिष्ठ सदस्य राजेंद्र मनवानी,मृदुल आर्या, गोविंद वसंता, सीए राजेश जैन, सीए जितेंद्र जैन आदि इस मीटिंग में शामिल हुए।

