सीआईआई हॉस्पिटल टेक समिट 2026 में हेल्थकेयर के डिजिटल भविष्य पर मंथन
एनएबीएच जल्द जारी करेगा नए डिजिटल हेल्थ मानक, अस्पतालों के डिजिटलीकरण को मिलेगी गति
एआई, डेटा गवर्नेंस और मेडिकल टेक्नोलॉजी को बताया भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का आधार
एवीएस न्यूज. .मुंबई
भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में तेजी से हो रहे डिजिटल बदलाव के बीच सीआईआई हॉस्पिटल टेक समिट 2026 के 9वें संस्करण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल हेल्थ, मेडिकल टेक्नोलॉजी, डेटा गवर्नेंस, साइबर सिक्योरिटी और हेल्थकेयर इनोवेशन पर व्यापक मंथन हुआ।
समिट के दौरान सीआईआई-डेलॉइट की नॉलेज रिपोर्ट “डीपीडीपी एक्ट और नियमों के अनुरूप डेटा गवर्नेंस को अनलॉक करना” तथा सीआईआई-पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट “एआई शेपिंग द फ्यूचर ऑफ हेल्थकेयर” जारी की गईं। सीआईआई-डेलॉइट की रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत डेटा गवर्नेंस की जरूरत पर जोर देते हुए डेटा डिस्कवरी, प्राइवेसी एवं कंसेंट मैनेजमेंट, सुरक्षित डेटा शेयरिंग, साइबर सिक्योरिटी और एआई के जिम्मेदार उपयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।

रिपोर्ट में अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद डिजिटल सिस्टम तैयार करने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया। वहीं, सीआईआई-पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में कहा गया कि एआई डायग्नोस्टिक्स, मरीजों की देखभाल, अस्पताल संचालन और क्लिनिकल निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेजी से बदल रहा है। बेहतर मरीज परिणाम और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा तथा मजबूत गवर्नेंस को जरूरी बताया गया।
महाराष्ट्र को ग्लोबल हेल्थकेयर इनोवेशन हब बनाने पर जोर
महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल, एफडीआई, डायस्पोरा अफेयर्स एवं एग्रो-मार्केटिंग मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि महाराष्ट्र हेल्थकेयर इनोवेशन, मेडिकल टेक्नोलॉजी, डिजिटल हेल्थ, बायोटेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
रावल ने कहा कि महाराष्ट्र अपने मजबूत स्वास्थ्य ढांचे, फार्मास्युटिकल एवं बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर, मेडिकल संस्थानों, कुशल मानव संसाधन और वैश्विक साझेदारियों के जरिए विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार करना चाहता है।
उन्होंने महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण इलाज और वित्तीय सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, रिसर्च संस्थानों और निवेशकों को महाराष्ट्र में निवेश, सहयोग और नवाचार के लिए आमंत्रित किया।
एनएबीएच जल्द लाएगा नए डिजिटल हेल्थ मानक
नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) के मरीज़ और कोइता फाउंडेशन के को-फाउंडर एवं डायरेक्टर रिजवान कोइटा ने कहा कि एनएबीएच देशभर में डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि मेडिकल इमेजिंग सिस्टम और क्वालिटी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के लिए नए मानक जल्द जारी किए जाएंगे। इनके जरिए अलग-अलग आकार के अस्पतालों के लिए व्यापक डिजिटल फ्रेमवर्क विकसित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, इलेक्ट्रॉनिक क्लेम प्रोसेसिंग तथा मरीजों की सुरक्षा और देखभाल के उच्च मानकों को प्रभावी बनाने के लिए अस्पतालों का व्यापक डिजिटल रूपांतरण आवश्यक है।

इलाज के साथ रोकथाम पर भी ध्यान जरूरी
सीआईआई वेस्टर्न रीजन हेल्थकेयर एंड लाइफ साइंसेज सब-कमेटी 2026-27 के चेयरमैन और एशियन कैंसर इंस्टीट्यूट (एसीआई)-कंबाला हिल हॉस्पिटल के चेयरमैन पद्मश्री डॉ. रमाकांत देशपांडे ने उपचार के साथ प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। उन्होंने मोटापा और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती चुनौती के मद्देनजर जन-जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में तेजी से उभर रहा है, लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सामर्थ्य और कुशल स्वास्थ्यकर्मियों पर भी ध्यान देना होगा।
एआई और डिजिटल तकनीक बदल रही स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
सीआईआई हॉस्पिटल टेक समिट 2026 के चेयरमैन और पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के डिप्टी सीईओ जॉय चक्रवर्ती ने कहा कि हेल्थकेयर ट्रांसफॉर्मेशन के लिए सरकार, उद्योग और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
उन्होंने आयुष्मान भारत, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि एआई, डायग्नोस्टिक्स, थेरेप्यूटिक्स और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी स्वास्थ्य सेवाओं का स्वरूप बदल रही हैं और मरीजों के उपचार परिणाम बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने छोटे और मध्यम आकार के अस्पतालों के लिए तकनीक तक बेहतर पहुंच, स्किल डेवलपमेंट और क्षमता निर्माण पर जोर दिया।
स्मार्ट अस्पताल और प्रेडिक्टिव हेल्थकेयर भविष्य की दिशा
हेल्थकेयर एवं लाइफसाइंसेज पर सीआईआई डब्ल्यूआर उप-समिति 2026-27 के अध्यक्ष एवं ल्यूपिन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सौरभ अग्रवाल ने एआई-सक्षम अस्पताल संचालन, प्रेडिक्टिव एवं प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, सस्टेनेबिलिटी, स्मार्ट हॉस्पिटल और हेल्थकेयर वर्कफोर्स की अपस्किलिंग को भविष्य के प्रमुख क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा कि केवल तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक से मरीजों के उपचार परिणाम, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और पर्यावरणीय स्थिरता में वास्तविक सुधार हो।
वैश्विक सहयोग से बढ़ेगा हेल्थकेयर इनोवेशन
मुंबई स्थित नीदरलैंड्स के कॉन्सुलेट जनरल के कॉन्सुल जनरल टेरी वैन हेडेन ने भारत-नीदरलैंड्स के बीच मेडटेक, डिजिटल हेल्थ, डायग्नोस्टिक्स, एआई और हेल्थकेयर इनोवेशन में सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
वहीं, दक्षिण एशिया के लिए महामहिम के व्यापार आयुक्त और पश्चिमी भारत के उप उच्चायुक्त हरजिंदर कांग ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) से उत्पन्न अवसरों का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच हेल्थकेयर सहयोग बढ़ने की संभावनाएं बताईं। समिट में हुई चर्चाओं से स्पष्ट हुआ कि भारतीय हेल्थकेयर का अगला चरण एआई, डिजिटल हेल्थ, डेटा सिक्योरिटी, मेडिकल टेक्नोलॉजी, नवाचार और वैश्विक साझेदारियों पर केंद्रित होगा।
विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी प्रगति का अंतिम उद्देश्य मरीजों को अधिक सुलभ, सुरक्षित, किफायती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए।


