एवीएस  न्यूज.भोपाल 


 भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित 19वां कॉर्पोरेट गवर्नेंस शिखर सम्मेलन  मुंबई में आयोजित किया गया। यह शिखर सम्मेलन प्रमुख व्यावसायिक नेताओं, नीति निर्माताओं और शासन विशेषज्ञों के लिए कॉर्पोरेट प्रशासन के भविष्य पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण मंच रहा। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में सेबी के अध्यक्ष  तुहिन कांता पांडे, सीआईआई कॉर्पोरेट गवर्नेंस परिषद के अध्यक्ष संजीव बजाज, सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी, उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिष्ठित उद्योगपति उपस्थित रहे।


सम्मेलने में सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनियों और नियामकों की परिचालन सीमाओं का परीक्षण कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव से तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा का हवाला देते हुए उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया। उन्होंने कॉर्पोरेट गवर्नेंस को किसी संगठन का "तंत्रिका तंत्र" करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि कमजोर शासन वाली कंपनियां बाहरी रूप से मजबूत दिख सकती हैं, लेकिन आंतरिक और बाहरी दबावों के प्रति धीमी प्रतिक्रिया देती हैं।


कॉर्पोरेट गवर्नेंस का अगला चरण केवल नियमों या खुलासे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह बोर्डरूम के भीतर निर्णय लेने की गुणवत्ता और भागीदारी को बेहतर बनाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि बोर्ड का सही गठन ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी प्रभावशीलता भी उतनी ही जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बोर्डरूम में पूछे जाने वाले प्रश्नों की गुणवत्ता और उन पर कार्रवाई करने का आत्मविश्वास ही गवर्नेंस के परिणामों को आकार देगा। सेबी प्रमुख ने स्वतंत्र निदेशकों के कौशल और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए उद्योगों और अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की योजना का संकेत दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिस्क्लोजर और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों को बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्वतंत्र निदेशकों और कंपनी प्रबंधन की है, न कि केवल नियामक की।
 

शासन की चुनौतियों को लगातार समझना और उनसे निपटना होगा
 पांडे ने एआई और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती चुनौतियों के बीच गवर्नेंस को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने पश्चिमी एशिया में भू-राजनीतिक तनावों का भी जिक्र किया जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। सीआईआई एक ऐसी संस्था है जिसने उद्योग की सोच को आकार देने और हितधारकों के बीच संवाद को मजबूत करने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हम एक ऐसे उथल-पुथल भरे समय में मिल रहे हैं, जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण तेल और गैस कीआपूर्ति बाधित है, वैश्विक कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है, जिसका विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।  
 

शासन अब केवल अनुपालन का स्तर नहीं रह गया : संजीव 
सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष, सीआईआई कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियामक मामलों की परिषद के अध्यक्ष और बजाज फिनसर्व लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक संजीव बजाज ने इस बात पर प्रकाश डाला कि शासन अब केवल अनुपालन का स्तर नहीं रह गया है। यह एक रणनीतिक कार्य है। यह निर्धारित करता है कि संस्थान जोखिम का अनुमान कैसे लगाते हैं, पूंजी का आवंटन कैसे करते हैं और तनाव का सामना कैसे करते हैं। उन्होंने शासन के सात प्रमुख स्तंभों का उल्लेख किया, जिनमें पहला है विश्वास का निर्माण। विश्वास एक व्यावसायिक कारक है यह पूंजी तक पहुंच, नियामकीय सहभागिता, कर्मचारी प्रतिधारण और ग्राहक निष्ठा को प्रभावित करता है।  

 
सीआईआई का हमेशा से यह मानना​रहा है कि सुशासन ही अच्छा कारोबार है :  बनर्जी 
 सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत के कारोबारी माहौल के लिए एक बेहद प्रासंगिक समय पर आयोजित हो रहा है, जिसमें उद्योग और हितधारकों की मजबूत भागीदारी और गहन सहभागिता देखने को मिल रही है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैश्विक कारोबारी माहौल भू-राजनीतिक तनावों, बदलते व्यापारिक समीकरणों, तकनीकी व्यवधानों, जलवायु संबंधी चिंताओं, निवेशकों की बदलती अपेक्षाओं और कंपनियों के आचरण की कड़ी निगरानी से प्रभावित हो रहा है।

सीआईआई का हमेशा से यह मानना​रहा है कि सुशासन ही अच्छा कारोबार है। वास्तव में, एक कदम आगे बढ़कर यह भी कहा जा सकता है कि सुशासन ही अच्छे कारोबार को टिकाऊ बनाता है। सीआईआई की यह प्रतिबद्धता दशकों पुरानी है, जिसकी शुरुआत 1998 में सीआईआई के वांछनीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस कोड से हुई थी, उस समय जब भारतीय व्यापार और नियामक चर्चाओं में शासन को एक व्यवस्थित स्थान मिलना शुरू ही हुआ था। सीआईआई ने इसके बाद 2009 में और 2020 में सत्यनिष्ठा, शासन में पारदर्शिता और जिम्मेदार आचरण पर अपने दिशानिर्देश जारी किए।  
 

न्यूज़ सोर्स : भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित 19वां कॉर्पोरेट गवर्नेंस शिखर सम्मेलन