एवीएस न्यूज..भोपाल
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) का चुनाव खूब खींचातानी मची हुई है। जिससे पूरे व्यापारी वर्ग को चिंता में डाल दिया है।  चुनाव में व्यापार, उद्योग, निवेश और उद्यमिता को दिशा को दरकिनार कर सामाजिक समीकरणों की गिनती में बांटा जा रहा है तो इन्ही समीकरणों में सिमटता भी दिखाई दे रहा है। चेंबर के इस चुनाव में ज्यादा बात इस पर हो रही है कि कौन उम्मीदवार किस समाज से है।
गौरतलब है कि व्यापारी महकमें यह बात खूब जोरों से चल रही है कि चुनाव सिंधी, पंजाबी जैन, बनिया–अग्रवाल के बीच है। व्यापारियों की शीर्ष संस्था भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव को सामाजिक समीकरणों के साथ राजनीतिक समीकरण में भी बांटा जा रहा है जिससे ने केवल चुनाव का स्तर गिर रहा है बल्कि चेंबर जैसी प्रतिष्ठित संस्था की मूल भावना पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।


चुनाव सामाजिक पहचान का अखाड़ा बना, खो जाएंगी छोटे और मध्यम व्यापारियों की आवाज:  श्यामबाबू
 वरिष्ठ व्यापारियों का कहना है कि चेंबर का उद्देश्य हमेशा व्यापारियों की साझा आवाज बनना रहा है, न कि समाजों की ताकत मापने का मंच।  चेंबर के मेंबर और वरिष्ठ व्यापारी श्यामबाबू अग्रवाल ने कहा कि व्यापार में व्यापारी समाज नहीं देखता, अगर ऐसा किया गया तो व्यापार दम तोड़ देता है। ठीक इसी प्रकार चुनाव में भी सामाजिक परिदृश्य को तूल देने के बजाय व्यापार हित और संस्था के हित और व्यापारियों के हितों की तवज्जों देना चाहिए। उन्होंने कहाकि व्यापारियों की संस्था भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स अगर सामाजिक पहचान का अखाड़ा बना तो छोटे और मध्यम व्यापारियों की आवाज ही खो जाएगी।


चुनाव सामाजिक रंग में रंगने से सभी समस्याएं चले जाएंगे हाशिए पर :  हरीश 
10 नंबर व्यापारी संघ के महासचिव हरीश चोइथानी ने कि चुनाव को सामाजिक रंग देना व्यापार और व्यापारी दोनों के अनुकूल नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो व्यापारी जो टैक्स की जटिलताएं, जीएसटी से जुड़ी समस्याएंओं से दो -चार हो रहे हैं सब हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने कहाकि यदि चेंबर का नेतृत्व समाजों के गणित से तय होगा, तो फैसले भी उसी नजरिए से लिए जाएंगे। चेंबर से मार्गदर्शन और समर्थन की सबसे ज्यादा जरूरत है।  


चुनाव सिर्फ पदों का नहीं, बल्कि व्यापारिक भविष्य की दिशा तय करने वाला : रामबाबू 
चेंबर के कई मेंबरों से हुई चर्चा में उन्होंने अपना मत साझा करते हुए कहाकि अगर चेंबर में चुनाव में जो सामाजिक रंग दिया जा रहा है उससे आने वाले परिणाम से संस्था व्यापारिक संस्था कम और समाजों की पंचायत बनकर रह जाएगी।  चेंबर के वरिष्ठ सदस्य रामबाबू शर्मा ने कहा कि अब निर्णायक जिम्मेदारी व्यापारी मतदाताओं पर है। उन्हें तय करना होगा कि वे भावनाओं और सामाजिक दबाव में बहकर वोट देंगे या फिर व्यापार के भविष्य को ध्यान में रखकर नेतृत्व चुनेंगे। क्योंकि यह चुनाव सिर्फ पदों का नहीं, बल्कि भोपाल के व्यापारिक भविष्य की दिशा तय करने वाला  है।  

 

 पर्वेक्षक दें ध्यान, 31 मार्च तक के ही मेंबरों को ही वोटिंग का अधिकार, इसके बाद बने सदस्यों को नहीं  : गोधा 
   
 भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) के चुनाव को लेकर बाजार में शहर के दो पैनल त्रैवार्षिक (2026-2029) चुनाव में अपने-अपने समर्थकों के साथ चुनावी रण में है, लेकिन  चेंबर के इस चुनाव चेंबर के मेंबरों ने चुनाव अधिकारी सहित चुनाव पर्वेक्षकों से अपील की है कि चुनाव पारदर्शिता पूर्ण हो, इसके लिए चेंबर के विधान की नियमावली का पालन सुनिश्चित ढंग से किया जाए।  मेंबर, उम्मीदवार और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने चेंबर के विधान का हवाला देते हुए एक स्वर में कहा कि विधान की नियमावली कंडिका में 5 में स्पष्ट उल्लेख है कि जिस वर्ष चुनाव होना सुनिश्चित होता है उसी वर्ष 31 मार्च तक के मेंबरशिप ही अपने मताधिकार का उपयोग कर सकते हैं। चुनावी वर्ष के 31 मार्च के बाद बने चेंबर के सदस्यों को  मताधिकार प्राप्त नहीं होगा।  

 चेंबर के संविधान की नियमावली की हर कंडिका से चिर-परचित संदीप गोधा ने चुनाव अधिकारी, पर्यवेक्षकों सहित समस्त सहयोगी टीम का ध्यान आकृष्ट करते हुए चेंबर के विधान में उल्लेख नियमावली में टीप नियमों के बारे में कहाकि विधान की कंडिका 5 में  स्पष्ट उल्लेख है कि प्रबंध समिति के द्वारा चुनाव कार्यक्रम स्वीकार करने के उपरांत सचिव के द्वारा 31 मार्च को कंपनी के जो सदस्यों होंगे अर्थात जिनकी सदस्यता शुल्क 31 मार्च तक जमा हो चुकी होगी। वहीं चुनाव में मताधिकार के अधिकारी है।