प्रगतिशील पैनल के तेजकुलपाल सिंह  पाली बोले- व्यापारियों को मुख्यधार से जोड़ने वन टाइम सेटलमेंट के गतिविधि शुल्क कम करने है वचनबद्धता 


एवीएस न्यूज. भोपाल
व्यापारिक संगठनों की शीर्ष संस्था भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री  के त्रैवार्षिक चुनाव में व्यापारी संगठन में लागू गतिविधि शुल्क जमा नहीं कर पाने की बदौलत आजीवन सदस्य होने के बाद भी मुख्यधारा से दूर मेंबरों के हित में वन टाइम सेटलमेंट की मांग उठी है। ताकि आने वाले सालों में संस्था के त्रैवार्षिक चुनाव में मताधिकार से वंचित सदस्य मुख्यधार से जुड़ सकें।  

इस पर प्रगतिशील पैनल की अध्यक्षता करने के साथ अध्यक्ष पद के प्रत्याशी तेजकुलपाल सिंह पाली ने समस्य प्रगतिशील पैनल की ओर से वचनबद्धता प्रदर्शित की है कि चेंबर के करीब 6 हजार सदस्य में से 2200 से अधिक मेंबरों को मताधिकार प्राप्त है शेष मताधिकार से वंचित है अत: ऐसे वंचित मेंबरों को मुख्यधारा में लाने के लिए अगर हमारी पैनल जीत कर आई तो वन टाइम सेटलमेंट के साथ -साथ गतिविधि शुल्क को भी कम करेंगी। 


 व्यापार और व्यापारियों के हित में नवनीत अग्रवाल ने उठाई यह मांग  
सेवाभारती से जुड़े होने के साथ विभिन्न समाजसेवी संस्थानों बढ़ चढ़कर भागीदारी दर्ज कराने वाले स्थानीय सराफा चौक बाजार के सराफा व्यापारी नवनीत अग्रवाल ने व्यापार और व्यापारियों के हित में गतिविधि शुल्क की बाध्यता से दूर व्यापारियों को मुख्यधारा में वन टाइम सेटलमेंट की मांग उठाई है। नवनीत अग्रवाल ने कहा कि व्यापारी हित की गतिविधियां इस प्रकार होना चाहिए कि सदस्य स्वतः शुल्क जमा करें। गतिविधियों शुल्क न जमा कर पाने से कई व्यापारी न केवल संगठनात्मक गतिविधियों से कट गए, बल्कि उनकी वर्षों पुरानी सहभागिता भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहाकि वर्तमान चुनावी वातावरण में यह विषय व्यापारियों के बीच चर्चा का प्रमुख केंद्र बन गया है। व्यापारियों का कहना है कि जो भी पैनल के द्वारा सभी पुराने एवं निष्क्रिय आजीवन सदस्यों को पुनः मुख्यधारा में लाने के लिए वन टाइम सेटलमेंट  योजना की घोषणा करेगा, उसे व्यापक समर्थन मिलेगा।  उन्होंने व्यापारियों की ओर से शुल्क प्रणाली को सरल, पारदर्शी एवं व्यापारिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि व्यापारी वर्ग का मानना है कि संगठन की मजबूती तभी संभव है जब प्रत्येक व्यापारी को साथ लेकर चला जाए, न कि आर्थिक बाधाओं के कारण उन्हें बाहर किया जाए।

 
  जातिगत सियासत में उलझता व्यापारिक चुनाव
राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित व्यापारिक संगठन भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के त्रैवार्षिक चुनाव इस बार व्यापारिक मुद्दों से भटककर जातिगत समीकरणों की गिरफ्त में आते दिखाई दे रहे हैं।

दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कुछ कमजोर प्रत्याशी संगठन की नीतियों, उपलब्धियों या भविष्य की योजनाओं पर बात करने के बजाय जातिगत पहचान का चोला ओढ़कर चुनावी वैतरणी पार करने में जुटे हैं। प्रबुद्ध व्यापारी वर्ग इसे संगठन की गरिमा और परंपरा के विपरीत मान रहा है।

व्यापारिक संगठन किसी जाति, समाज या वर्ग विशेष का मंच नहीं, बल्कि समूचे व्यापारी समुदाय के हितों का प्रतिनिधि होता है। ऐसे में चुनाव को जात-पात की संकीर्ण राजनीति में झोंकना संगठन को कमजोर करने जैसा है। 


व्यापारियों के बीच यह सवाल अब खुलकर उठने लगा है कि जब उद्योग, व्यापार, टैक्स, लाइसेंस, सुविधाएं और नीतियां जाति नहीं देखतीं, तो फिर नेतृत्व चयन में जाति क्यों देखी जाए?


“जात-पात की करो विदाई, व्यापारी हम सब भाई-भाई”
 केवल नारा नहीं, बल्कि इस चुनाव का मूल मंत्र होना चाहिए।

 

समझदार व्यापारियों का मानना है कि जातिगत भावनाओं की आड़ में चुनाव जीतने की कोशिश करने वाले प्रत्याशी न तो संगठन को दिशा दे सकते हैं और न ही व्यापारिक हितों की प्रभावी पैरवी कर सकते हैं। अब यह मतदाताओं पर निर्भर है कि वे संगठन को एकजुट रखने वाला नेतृत्व चुनते हैं या उसे जातिगत खांचों में बांटने वालों को बढ़ावा देते हैं।
प्रबुद्ध व्यापारियों का एकमत से कहना है कि यह चुनाव किसी समाज विशेष या सामाजिक संगठन का नहीं, बल्कि एक व्यापारिक संगठन का चुनाव है। 

 

व्यापारी वर्ग यह सवाल भी खुलकर उठा रहा है कि जब व्यापार करते समय किसी से भेदभाव नहीं किया जाता, तो फिर वोट देते समय भेद क्यों?

 चुनाव का उद्देश्य जातिगत गणित नहीं, बल्कि ऐसे योग्य व्यापारी प्रतिनिधियों का चयन होना चाहिए जो व्यापारियों के हितों की प्रभावी रक्षा कर सकें और सरकार से सशक्त संवाद स्थापित करने की क्षमता रखते हों।


 सेवा के संकल्प के साथ स्वयं को प्रस्तुत करने वाले चुनें 
नवनीत अग्रवाल ने कहा कि इस चुनाव में प्रतिष्ठित व्यापारियों की सेवा के संकल्प के साथ स्वयं को प्रस्तुत कर रहे प्रत्याशियों को संस्था की कमान सौंपने का व्यापारियों के लिए एक उत्तम अवसर है कि वे जातिगत सोच से ऊपर उठकर एकजुट हों और संगठन को मजबूत, सक्षम व प्रभावशाली नेतृत्व प्रदान करें।