व्यापारिक प्रतिनिधियों ने कहा- संपूर्ण कार्यकाल संस्था के प्रति समर्पित और राजनीति से परे हो होने के साथ दे संस्था में समय, वहीं है योग्य
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव : बढ़ी चुनावी सरगर्मी -
एवीएस न्यूज .भोपाल
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के व्यापारिक संगठनों की शीर्ष व्यापारिक संस्था भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनावी समर का आगाज हो चुका है। चुनाव अधिकारी प्रदीप कुमार तिवारी और पर्यवेक्षक डॉ. पीसी कोठारी द्वारा अधिसूचना (चुनाव कार्यक्रम) जारी किए जाने के बाद शहर व्यापार जगत में चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है।
इतना ही नहीं जैसे-जैसे नामांकन भरने की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे ही बैठकों का दौर भी बढ़ गया है। चेंबर के इस चुनाव में बतौर प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩे की मंशा रखने वाले लोग अपने-अपने समर्थकों के साथ बैठक कर सदस्यों की नब्ज पकडऩे का प्रयास कर रहे है।
चेंबर के चुनाव को लेकर भोपाल के प्रमुख व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं व्यापारियों से हुई चर्चा में यृं तो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए, लेकिन एक बात लोगों ने स्पष्ट कहाकि चेंबर की कमान वहीं संभालने के योग्य है जो संस्था में समय दें, इसके अलावा आर्थिक पारदर्शिता प्रदर्शित करें। व्यापारियों के समस्या के समाधान के लिए सैदव तत्पर हो और संपूर्ण कार्यकाल संस्था के प्रति समर्पित हो और राजनीति से परे हो।
शासन -प्रशासन से बात करने का अवसर आता है तो छिपाते हैं व्यापारी से मुंह
व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहाकि भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के कुछ पदाधिकारी वर्षों से इस संगठन के चुनाव लडक़र विभिन्न पदों पर आसीन तो हो जाते हैं परंतु ऐसे सदस्यों की बैठकों में उपस्थित 10 से 20 फीसदी ही रहती है और व्यापारिक विषयों में शासन -प्रशासन से बात करने का अवसर आता हो तो फिर ऐसे व्यापारी मुंह छुपाते दिखते हैं।
अवसरवादी लोग सिर्फ दिखते राजनीतिक बैठकों और मंच माला के समय
प्रबुद्ध व्यापारियों ने कहाकि भोपाल चेंबर के बैनर तले जब कोई कार्यक्रम या फिर कोई महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होती है तो सिर्फ पद पर आसीन होने के वाली लालची प्रदाधिकारी राजनीतिक बैठकों और मंच माला के समय सबसे आगे दिखते हैं।
व्यापारियों ने कहाकि इस बार ऐसे पदासीन व्यापारियों का समूचा व्यापारिक जगत भर्त्सना कर दरकिनार करेगा जो सिर्फ अवसरवादी प्रवृत्ति के लोग है। ऐसा करने से संगठन के कार्यों में नई ऊर्जा का संचार होगा। संस्था के व्यापारिक सदस्यां ने कहाकि व्यापारिक संगठन में गतिविधि शुल्क सदस्यों की सहभागिता बढ़ाने में एक बड़े रोड़े की तरह काम कर रहा है ।
अब तो संगठन के पास बड़ा भारी रिजर्व फंड भी है और अन्य माध्यम से भी संगठन के लिए फंड की व्यवस्था की जा सकती है तो ऐसे में क्यों ना गतिविधि शुल्क को शून्य किया जाए या न्यूनतम किया जाए और सभी आजीवन सदस्यों को जो गतिविधि शुल्क के कारण मताधिकार से वंचित हो गए उनको पुन: मुख्य धारा में लाने का चुनावी एजेंडा बनाया जाए।
एक अन्य व्यापारिक प्रतिनिधि का कहना है कि इस बार चुनावी घमासान काफी ज्यादा बढ़ जाएगा, क्योंकि अब कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या और पदाधिकारी की संख्या में बढ़ोतरी होने से इस प्रतिष्ठित व्यापारिक संगठन में चुनावी प्रतिस्पर्धा अंतिम दौर में व्यक्तिगत होगा।
वजन तोलते दिख रहे लोग कि इधर जाऊं या उधर जाऊ
उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में वर्तमान परिदृश्य में दो पैनल आमने-सामने अपनी टीम बनाती हुई दिख रही है परंतु अभी दोनों ही ओर से नाम सामने नहीं आए हैं ऐसे में चुनाव लडऩे के इच्छुक व्यापारी दोनों पैनलों का वजन तोलते दिख रहे है कि इधर जाऊं या उधर जाऊ।

