भोपाल सराफा में सोना 185500 रु. दस ग्राम, चांदी   390000 रु. किलो
शुरू माह से अब तक चांदी 112500 रुपए और सोना 48200 रुपए हुआ महंगा

 

एवीएस न्यूज..भोपाल
 वायदा कारोबार में सोने-चांदी के भाव बेकाबू है। बृहस्पतिवार को चांदी की कीमत 4 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई, जबकि सोने का भाव 1.85 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।  

स्थानीय सराफा कारोबारियों के अनुसार स्थानीय सराफा चौक बाजार मे शुरू जनवरी माह से अब तक चांदी  112500 रुपए किलो महंगी हुई तो सोना 48200 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा होकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।  सराफा कारोबारी नवनीत अग्रवाल ने बताया कि 1 जनवरी 2026 को सोना 24 कैरेट 137300 रुपए प्रति दस ग्राम और चांदी 277500 रुपए किलो थी जो उछलकर गुरूवार को स्थानीय सराफा बाजार में सोना 185500 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 390000 रुपए किलो बोली गई। 
जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी के मार्च में आपूर्ति वाले अनुबंधों का वायदा भाव 4,07,456 रुपए प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। तो  सोने के वायदा भाव 1,80,501 रुपए प्रति 10 ग्राम के पार नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। 


 ज्वेलर्स ने ऊंचे दाम होने से सोने-चांदी की खरीदी बंद की  
श्रीभोपाल सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल के अनुसार सोने-चांदी की कीमत थमने का नाम ही नहीं ले रही है।  सोने-चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण ज्वेलर्स ने  दोनों बहुमूल्य धातुओं की खरीदी बंद कर दी है। कीमत में बढ़ोतरी की वजह से ग्राहकों ने सोने की खरीदारी रोक दी है। पुराने गहनों को ही बदल कर नई जरूरतें पूरी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी महीने सोने की कीमत 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है, जिससे बिक्री 70 फीसदी तक गिर गई है।  
 

सोना-चांदी की कीमतों से महिलाएं परेशान, कैसे होंगी शादियां
देश में सोना और चांदी की कीमतें असाधारण रूप से बढ़ गई हैं, जिससे ग्रामीण भारत खासकर महिलाओं और विवाह योग्य परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है। पिछले 13 महीनों में चांदी की कीमतों में 306 फीसदी और सोने की कीमतों में 111फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस तेजी ने आम परिवारों की बचत और सामाजिक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। ग्रामीण भारत में सोना और चांदी सिर्फ आभूषण नहीं हैं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़े अहम प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन इनकी बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों की कमर तोड़ दी है। छोटे किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के परिवार अब अपनी बेटियों के लिए न्यूनतम आभूषण भी नहीं खरीद पा रहे हैं। इस वजह से विवाह योग्य लड़कियों वाले परिवार आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।


  छोटे कारोबारी और सुनार भी परेशान
सराफा व्यापारी नवनीत अग्रवाल ने कहाकि बढ़ती कीमतों से केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि छोटे सुनार और आभूषण व्यवसायी भी प्रभावित हो रहे हैं। उनकी बिक्री घट रही है, जिससे रोजगार पर संकट गहरा रहा है। छोटे व्यवसायियों का कहना है कि अगर सरकार समय पर हस्तक्षेप नहीं करती है, तो इससे पूरे आभूषण उद्योग और उससे जुड़े कई रोजगारों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।


 हस्तक्षेप करे सरकार
बाजार जानकारों की मांग है कि सरकार सोने और चांदी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाए। इसके लिए जीएसटी में कटौती, आयात शुल्क में संशोधन और जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। उनका कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक कदम नहीं, बल्कि महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मामला भी है। सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें केवल आभूषणों की नहीं, बल्कि आम लोगों की जीवनशैली और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित कर रही हैं। यदि सरकार तुरंत कदम नहीं उठाती है, तो ग्रामीण परिवारों की परेशानियां बढ़ती रहेंगी और छोटे कारोबारी उद्योग से बाहर होने पर मजबूर होंगे। इस समय नीति निर्माता यदि सही हस्तक्षेप करते हैं, तो महिलाओं और परिवारों की बचत और सम्मान को बचाया जा सकता है।