बजट में ऐसे ठोस एवं दूरदर्शी कदम उठाए जाएं, जो आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत @2047 और रोजगार-आधारित विकास के लक्ष्यों को मजबूती प्रदान : गौतम कोठारी
एवीएस न्यूज. भोपाल
वर्तमान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, घरेलू महंगाई, पूंजी की उपलब्धता, बढ़ते अनुपालन बोझ तथा प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि बजट में ऐसे ठोस एवं दूरदर्शी कदम उठाए जाएं, जो आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत @2047 तथा रोजगार-आधारित विकास के लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करें। यह बात पीथमपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए (डॉ.)गौतम कोठारी डी. लिट.ने कही।
गौतम कोठारी ने आगामी केंद्रीय बजट को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि एमएसएमई एवं छोटे व्यापारियों के लिए वित्तीय सशक्तिकरण कम है। इस के लिए क्रेडिट गारंटी योजना की सीमा बढ़ाकर 10 से 20 करोड़ रुपए की जाए। साथ ही कोलेटरल-फ्री लोन की सीमा बढ़ाई जाए तथा ब्याज सब्सिडी आधारित विशेष ऋण योजनाएं लागू हों। निर्यात उन्मुख एमएसएमई एवं छोटे व्यापारियों के लिए डेडिकेटेड एक्सपोर्ट क्रेडिट विंडो स्थापित की जाए ।NBFCs एवं सहकारी बैंकों को एमएसएमईफाइनेंसिंग में अधिक सक्रिय भूमिका दी जाए। कर प्रणाली में सरलीकरण एवं विश्वास आधारित अनुपालन जरूरी है । टीडीएस/ टीसीएस की दरों एवं प्रक्रियाओं को सरल किया जाए, अनावश्यक कटौतियों को समाप्त किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने कहाकि जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध हो। जीएसटी रिफंड अधिकतम 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से प्रदान किया जाए। प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम की टर्नओवर सीमा बढ़ाकर अधिक व्यापारियों को राहत दी जाए। टैक्स विवादों के शीघ्र निपटारे हेतु फास्ट-ट्रैक डिस्प्यूट रेजोल्यूशन मैकेनिज़्म लागू किया जाए। निर्यात प्रोत्साहन एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए विशेष उपाय अपेक्षित हैं ।
कस्टम्स प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण एवं फेसलेस क्लीयरेंस को किया जाए तेज
कोठारी ने कहा कि वैश्विक व्यापार चुनौतियों एवं टैरिफ दबावों को देखते हुए निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को और मजबूत किया जाए। कस्टम्स प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण एवं फेसलेस क्लीयरेंस को तेज किया जाए। एडवांस रूलिंग अथॉरिटी के कार्यालयों की संख्या बढ़ाई जाए।मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित की जाए। घरेलू मांग एवं उपभोग को बढ़ावा देने के लिए ,मध्यम वर्ग एवं छोटे व्यापारियों की क्रय शक्ति बढ़ाने हेतु स्टैंडर्ड डिडक्शन में वृद्धि,आयकर स्लैब में युक्तिसंगत राहत, आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती कर महंगाई नियंत्रण किया जाए।
छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान, यूपीआई , ई-कॉमर्स एवं ओएनडीसी से जुड़ने विशेष प्रोत्साहन पैकेज मिलें
इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स एवं डिजिटल सपोर्ट के लिये व्यापारिक क्षेत्रों में सड़क, वेयरहाउस,लॉजिस्टिक्स पार्क एवं कोल्ड-चेन पर निवेश बढ़ाया जाए । छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान, यूपीआई , ई-कॉमर्स एवं ओएनडीसी से जुड़ने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज दिया जाए। साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल फ्रॉड से सुरक्षा हेतु जागरूकता एवं सहायता तंत्र विकसित किया जाए।
मार्केट, हाट-बाजार एवं पारंपरिक उद्योगों के पुनरुत्थान के लिए विशेष पैकेज की घोषणा हो
रोजगार सृजन एवं कौशल विकास की दिशा में नए कर्मचारियों की भर्ती पर ईपीएफ/ईएसआई योगदान में सरकारी सब्सिडी दी जाए। व्यापार एवं उद्योग से जुड़े युवाओं के लिए स्किल-अपग्रेडेशन एवं अप्रेंटिसशिप योजनाएँ लागू हों।महिला उद्यमियों एवं स्टार्ट-अप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन अपेक्षित है । पारंपरिक व्यापार एवं रिटेल सेक्टर का संरक्षण आज की दौर का एक मुख्य मुद्दा है पारंपरिक व्यापार एवं छोटे रिटेलर्स को ई-कॉमर्स की असमान प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए संतुलित नीति, लोकल मार्केट, हाट-बाजार एवं पारंपरिक उद्योगों के पुनरुत्थान के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए।
लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन एवं निरीक्षण प्रक्रियाओं में न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप हो
व्यापार सुगमता एवं प्रशासनिक सुधार की दृष्टि से लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन एवं निरीक्षण प्रक्रियाओं में न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप तथा एक देश-एक व्यापार पहचान जैसी व्यवस्था पर विचार किया जाए । इससे व्यापारिक समुदाय को राहत, अर्थव्यवस्था को गति, रोजगार को प्रोत्साहन तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य को सशक्त आधार मिलेगा।

