200 साल पुराना गांव पिपलिया पेदें खां, अंतिम यात्रा का रास्ता भी दुश्वार, शमशानघाट में सीवेज का पानी, आज भी सुविधाओं से महरूम
भोपाल। राजधानी के साकेत नगर स्थित और नगर निगम के वार्ड 57 में आने वाले पिपलिया पेदें खां गांव एक इलाका ऐसा है, जहां शमशानघाट बना है, लेकिन मृतक के अंतिम संस्कार करने के लिए यहां के बाशिंदो को सीवेज के गंदे पानी से निकलना पड़ रहा है। क्योंकि यहां पक्का रास्ता नही है। मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए स्थानीय लोगों यहां सबसे पहले एकजुट होकर छोटे-छोटे पत्थर एकत्रित कर रास्ता बनाते है फिर अंतिम संस्कार लिए अर्थी को शमशानघाट शेड पर पहुंचाते हैं। ऐसा नहीं कि पिपलिया पेदें खां गांव से राजनेता, जनप्रतिनिधि रुबरू नहीं है। लेकिन गांव की विडंबना महापौर, विधायक और क्षेत्रीय पार्षद यहां के बाशिंदों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने में गुरेज कर रहे हैं। रहवासियों की माने तो पिपलिया पेंदे खां की याद और यहां व्याप्त सस्याओं की याद जनप्रतिनिधियों ने चुनाव के दरमियान आती है। इस दौरान तो बड़े बड़े वादे करते हैं और बाद में भूल जाते हैं। पिपलिया पेदें खां नगर निगम के वार्ड 57 के अंतर्गत आने के साथ यह गांव 200 साल ज्यादा पुराना है। मगर आज भी यहां के रहवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। रहवासियों का कहना कि सड़क बनने से पहले इसकी बुनियाद नाली से होती है लेकिन पिपलियां के गली, कूंचों में तो दूर मेन रोड़ के किनारे पक्की नाली आज तक नहीं बनी है जिससे सीवेज का गंदा पानी सड़क बहता है।
-कई साल पहले एक लोहे का शेड बना, अब पूरी तरह से है जर्जर
बताया जा रहा है कि तत्कालीन मंत्री बाबूलाल गौर के कार्यकाल में इस गांव में शमशानघाट में एक लोहे का शेड बनाया गया था, कई वर्ष बीतने के बाद अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। गोविंदपुरा विधानसभा में आने वाले वार्ड 57 के श्मशानघाट की स्थिति को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है, विकास की झलक राजधानी में कैसी है। पिपलिया पेंदे खां के एक रहवासी का निधन होने के बाद जब उनका अंतिम संस्कार करने गांव के लोग पहुंचे तो पहले उनको अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचने के लिए यहां पर पत्थर डालकर रास्ता बनना पड़ा। शमशानघाट में सीवेज का गंदा पानी बह रहा है, जिससे चारों और गंदगी देखी जा सकती है।
- भाजपा नेता भी होते है एकजुट अंतिम संस्कार में
बीते दिनों गांव में यहां निवासरत एक भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता के पिता का स्वर्गवास हुआ, जिनका अंतिम संस्कार गांव के ही शमशानघाट में हुआ। इस दौरान अंतिम संस्कार में अनेक भाजपा नेता भी एकजुट हुए। यह बात चर्चा का विषय रही है इस स्थान पर तो काम जरूर होना चाहिए। एक भाजपा नेता ने रहवासियों को सुझाव दिया है कि वे इस समस्या को लिखकर दे, जिससे वह इस बात को क्षेत्रीय विधायक तक पहुंचा सके। उन्होंने रहवासियों को इस बात का भी विश्वास दिलाया कि वे इस क्षेत्र में दौरे के दौरान क्षेत्रीय विधायक और राज्यमंत्री कृष्णा गौर को इस समस्या से अवगत कराएंगे।
- आठ माह पहले बनी 65 लाख रुपए की फाइल का
जानकारी के अनुसार पिपलिया पेंदे खां गांव के शमशानघाट में शेड निर्माण, सीमेंट कांक्रीट निर्माण, लकड़ी रखने के लिए कमरें का निर्माण, प्लेटफार्म, नाली निर्माण के साथ ही बाउंड्रीवाल का निर्माण कराने के लिए क्षेत्रीय पार्षद के माध्यम से 8 माह महापौर को एक पत्र देकर लगभग 65 लाख रूपए की फाइल तैयार कर नगर निगम आयुक्त को भेजी गई थी। इस कार्य पर कोई निर्णय नहीं होने से जनता को सुविधाएं अब तक नहीं मिल सकी।
- नए बजट से राशि देने के लिए महापौर को अवगत कराया
पिपलिया पेंदे खां गांव के शमशानघाट में शेड निर्माण, सीमेंट कांक्रीट निर्माण, लकड़ी रखने के लिए कमरें का निर्माण, प्लेटफार्म, नाली निर्माण के साथ ही बाउंड्रीवाल का निर्माण कराने के लिए पूर्व में एक फाइल बनाई गई थी, जिस पर काम नहीं हो सका है। दो सप्ताह पूर्व 70 लाख रूपए से निर्माण कराने के लिए नए बजट से राशि देने के लिए महापौर को अवगत कराया गया है। जनता की समस्याओं को देखते हुए यहां जल्द ही निर्माण कराने के पुन: प्रस्ताव बनाकर काम की पहल की जाएगी।
सुरेन्द्र बाड़ीका, पार्षद वार्ड 57

