खाद्य विश्लेषकों पर कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी के आरोप: जांच रिपोर्ट में देरी से मिलावट के मामलों में कार्रवाई हो रही प्रभावित
एवीएस न्यूज.भोपाल
मध्यप्रदेश के खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। खाद्य विश्लेषकों पर आरोप है कि वे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा के भीतर जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को नहीं भेज रहे हैं और अगर रिपोर्ट भेज दी भी जाती है संबंधित अधिकारी रिपोर्ट को अमल लाते हुए कार्रवाई सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं जिससे मिलावट के मामलों में कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिनियम के तहत खाद्य विश्लेषक को सामान्यतः 14 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट भेजनी होती है। यदि किसी कारणवश यह संभव नहीं हो, तो उसे देरी का कारण बताते हुए संबंधित डेजिनेटेड अधिकारी को लिखित सूचना देनी होती है। लेकिन कई मामलों में न तो समय पर रिपोर्ट भेजी जा रही है और न ही देरी का कारण बताया जा रहा है।
हाल ही में एक मामले की न्यायालय में सुनवाई के दौरान भी जांच रिपोर्ट में हुई देरी का मुद्दा उठा। इस मामले के बाद खाद्य विश्लेषकों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं।
मैदानी अमले की कार्रवाई पड़ती है कमजोर और न्यायिक प्रक्रिया होती है प्रभावित
विभागीय सूत्रों का दावा है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी समय पर नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशाला तक पहुंचा देते हैं। प्रयोगशाला में प्रारंभिक जांच भी समय पर पूरी हो जाती है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट संबंधित जिलों को भेजने में कई बार सप्ताहों या महीनों की देरी हो जाती है। इससे मैदानी अमले की कार्रवाई कमजोर पड़ने और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।
रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए
खाद्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि यदि रिपोर्ट में अनावश्यक देरी होती है, तो इसका लाभ आरोपित व्यापारियों को मिलता है और मिलावट के मामलों में अभियोजन कमजोर पड़ सकता है।
विभागीय सूत्रों ने कहाकि रिपोर्ट भेजने में देरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, अत: इसकी उच्चस्तरीय जांच कर यह तय किया जाना चाहिए कि देरी के लिए कौन जिम्मेदार है और क्या नियमों का पालन किया जा रहा है।
इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया है कि खाद्य प्रयोगशालाओं में रिपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।






