जालसाज पूर्व आबकारी उपायुक्त विनोद रघुवंशी को 4 वर्ष का कठोर कारावास
भोपाल।। आबकारी विभाग के पूर्व उपायुक्त विनोद रघुवंशी अब तीन साल के बजाए चार साल जेल में रहकर कठोर कारावास काटेगा। पूर्व में उसे तीन साल की सजा सुनाई गई थी, जिस पर उसने माफी की अपील करते अपर सत्र न्यायधीश से आवेदन किया था। यहां से उसे राहत नहीं मिली बल्कि कोर्ट ने सजा का एक साल और बढ़ा दी। यह मध्य प्रदेश के इतिहास में सम्भवत: पहली बार हुआ की किसी आबकारी विभाग के उच्च अधिकारी को न्यायालय द्वारा इतनी कड़ी सजा आपराधिक कृत्य के लिए दी गयी है।
मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को सक्षम अपर सत्र न्यायधीश की अदालत में धोखाधड़ी व धांधली के आरोपी पूर्व आबकारी उपायुक्त विनोद रघुवंशी की अपील पर सुनवाई की गई। कोर्ट ने आपराधिक अपील क्रमां 489/2023 में विनोद रघुवंशी ,पूर्व उपायुक्त आबकारी की सजा को 4 साल बढ़ाते हुए उनकी अपील खारिज कर दी। बता दें की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अमर सिंह सिसोदिया के द्वारा अपने निर्णय 29 अगस्त 2023 से आपराधिक प्रकरण क्रमांक 5442/2008 में विनोद रघुवंशी को धारा 420 एवं 1208 के अपराध में दोषी पाया एवं 3 वर्ष की कठोर सजा दी। जिसके विरुद्ध विनोद रघुवंशी व अन्य ने अपील सत्र न्यायालय, भोपाल के समक्ष प्रस्तुत की जिसमें न्यायालय द्वारा सजा को बड़ा कर 3 वर्ष में 4 वर्ष कर दी एवं अपील खारिज कर दी। चूंकि अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सजा 3 वर्ष की दी गई थी इसलिए विनोद रघुवंशी को तुरंत जमानत मिल गयी। परन्तु अब सजा बढ़ जाने व अपीलीय न्यायालय द्वारा अपील खारिज होने के उपरांत विनोद रघुवंशी का जेल जाना निश्चित हो गया है वह अब जेल जाने से नहीं बच पाएगा।
किसी भी समय होगी गिरफ्तारी
जानकारी के अनुसार विनोद रघुवंशी द्वारा फिर से न्यायालय को चकमा देने के लिए एवं न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने के उद्देश्य से निर्णय के दिन भी झूठा हाजरी माफी का आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसे खारिज करते हुए उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किये गये है और उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार कर जेल भेजा जायेगा।
यह है मामला
यह प्रकरण 2003-04 के भोपाल के आबकारी ठेकों में हुई धोखाधड़ी एवं धांधली से संबंधित है जिसमें पीडि़त अजय अरोरा को उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के कई बार चक्कर काटने पड़े एवं 22 साल लंबी लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला। 2003-04 भोपाल के आबकारी ठेकों में हुई धोखाधड़ी व धांधली में अनुचित लाभ प्राप्त करने वाले व्यक्तियों भगवती प्रसाद कुल्हरा; बद्रीप्रसाद जायसवाल, हरप्रसाद जायसवाल, राजेश जायसवाल , रामसेवक शर्मा बलजीत सिंह भाटिया, राजेंद्र प्रसाद जयसवाल, अनिल कुमार श्रीवास्तव एवं सुनील कुमार श्रीवास्तव को 29 अप्रैल 2019 के से न्यायालय द्वारा पहले ही सजा दी जा चुकी है एवं विनोद रघुवंशी को उक्त आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए दोषी पाया। शासकीय सेवा में रहते हुए विनोद रघुवंशी अपने पद व अनुचित धन के प्रभाव से उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में बड़े-बड़े वकील, जो कि एक-एक पेशी का लाखों रुपए लेते हैं बड़े करके प्रकरण का निराकरण रोकते रहे। अंतत: 22 साल लंबी लड़ाई के बाद पीडि़त अजय अरोरा को न्याय मिला तथा अपराधी विनोद रघुवंशी का जेल जाना सुनिश्चित हुआ

