जीएसटी काउंसिल बैठक से पहले दरों में कटौती और अनुपालन सरल बनाने की माँग!
भोपाल। आगामी जीएसटी काउंसिल बैठक से पहले कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) मध्यप्रदेश ने सरकार से व्यापार जगत की समस्याओं को दूर करने और कर ढांचे को सरल बनाने की मांग की है। कैट की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष सुनील अग्रवाल जी, पूर्व प्रिन्सिपल चीफ कमिशनर सी जी एस टी नवनीत गोयल जी, सुनील जैन 501 जी, जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा इस अवसर पर उपस्थित रहे!
संगठन ने कहा कि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था में छोटे व्यापारी, एमएसएमई और निर्यातक वर्ग लगातार अनुपालन और उच्च दरों से परेशान हैं। यदि सुधार नहीं किए गए तो व्यापार प्रभावित होगा और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा।
कैट ने अपने ज्ञापन में कहा कि दर कटौती से न केवल व्यापार लागत घटेगी, बल्कि भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और उपभोक्ता को भी सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी और मुकदमेबाजी कम होगी।

यह है प्रमुख मांगे
वस्तुओं पर राहत: स्टेशनरी, तैयार खाद्य पदार्थ (नमकीन, बिस्किट, आइसक्रीम आदि), सौंदर्य प्रसाधन, ड्राईफ्रूट्स, वस्त्र, मोबाइल (30,000 रुपए तक), ईवी पार्ट्स, कृषि उपकरण, साइकिल, खिलौने, टीवी (32 इंच तक) और रसोई बर्तन जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं पर जीएसटी को 12 और 18 प्रतिशत से घटाकर 5प्रतिशत किया जाए। वहीं सीमेंट, टायर, वाहन, बैटरी, एयर कंडीशनर और कार्बोनेटेड पेय जैसी वस्तुओं पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाए। आइसक्रीम जैसे आम उपभोग की वस्तु पर कॉम्पोज़िशन स्कीम का लाभ दिया जाए।
सेवाओं पर राहत: कोल्ड स्टोरेज, सैलून, शादी समारोह सेवाएँ, खनन पट्टे और कमर्शियल किराये पर जीएसटी को 5 प्रतिशत तक सीमित किया जाए।
अनुपालन में सरलता: एमएसएमईएस और छोटे व्यापारियों के लिए सरल एक पेज वार्षिक रिटर्न लागू हो। पंजीकरण सीमा और कॉम्पोज़िशन स्कीम की सीमा को 5 से 10 करोड़ तक बढ़ाया जाए, ताकि बी2सी ट्रेडर्स भी सरल जीएसटी व्यवस्था का लाभ ले सकें। जीएसटी पोर्टल को तकनीकी रूप से बेहतर बनाया जाए और ईमानदार व्यापारियों को अनावश्यक छापों से छूट दी जाए।
आईटीसी सुधार: आपूर्तिकर्ता की गलती का बोझ खरीदार पर न डाला जाए। इंफ्रास्ट्रक्चर व परिवहन क्षेत्र में ईंधन (डीज़ल, गैस,एटीएफ) पर आईटीसी का लाभ दिया जाए। साथ ही ब्याज दर को 18% से घटाकर 12% करने की माँग की गई है।
कैट की अपील -
कैट मध्यप्रदेश ने उम्मीद जताई है कि सरकार व्यापारियों की इन व्यावहारिक मांगों को गंभीरता से सुनेगी और आगामी जीएसटी काउंसिल बैठक में निर्णय लेगी। संगठन का कहना है कि यदि यह सुधार लागू होते हैं तो व्यापार जगत को राहत, उपभोक्ताओं को सस्ता सामान और सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा।

