विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में उठा ‘विकसित भोपाल’ का मुद्दा, केंद्रीय मंत्री को सौंपा गया विजन दस्तावेज

एवीएस न्यूज ..भोपाल 
विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के बीच राजधानी भोपाल के दीर्घकालिक विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन 2026’ के दौरान क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष एवं ‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान के संस्थापक मनोज मीक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक विस्तृत दृष्टि पत्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सौंपा। यह प्रतिनिधित्व भोपाल सांसद आलोक शर्मा तथा भाजपा जिला अध्यक्ष रवींद्र यति की उपस्थिति में सौंपा गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि इस पत्र को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया जाएगा।

 

भोपाल के लिए पांच बड़े विकास प्रस्ताव
‘कमाल का भोपाल’ अभियान की ओर से प्रस्तुत दृष्टि पत्र में राजधानी को केवल प्रशासनिक केंद्र या ‘सुकून के शहर’ की पहचान तक सीमित न रखते हुए उसे ज्ञान, तकनीक, उद्योग और आधुनिक शहरी विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने का सुझाव दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा लगभग 3700 एकड़ क्षेत्र में नॉलेज एंड एआई सिटी विकसित करने की पहल दूरदर्शी निर्णय है। इस परियोजना को केवल भूमि विकास तक सीमित न रखते हुए इसे शिक्षा, अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, स्टार्टअप, स्किलिंग, गवर्नेंस टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, वैश्विक साझेदारों और उद्योग जगत की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है।
 

भेल की भूमि पर नई अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाने का प्रस्ताव
दृष्टि पत्र में भोपाल स्थित भेल की लगभग 2200 एकड़ अप्रयुक्त भूमि के उपयोग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। इसमें इस क्षेत्र को एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा सहायक उद्योगों, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च कौशल रोजगार के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। पत्र में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित कर इस भूमि के उपयोग पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।


 भोपाल-इंदौर को बनाया जाए ट्विन मेट्रोपॉलिटन रीजन
दृष्टि पत्र में कहा गया है कि भोपाल और इंदौर को मिलाकर भारत के मध्य में एक विशाल ट्विन मेट्रोपॉलिटन आर्क विकसित किया जा सकता है। इसके लिए विश्वस्तरीय नगर नियोजन, जल सुरक्षा, हरित परिवहन, डिजिटल शासन, किफायती आवास और पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
 

भोपाल के लिए विशेष पुनर्विकास पैकेज की मांग
पत्र में भोपाल गैस त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि शहर ने असाधारण जीवटता दिखाई है, लेकिन दीर्घकालिक पुनर्विकास और आर्थिक पुनर्जीवन के लिए विशेष सहयोग की आवश्यकता अब भी बनी हुई है। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड से राजधानी के लिए विशेष पैकेज देने का अनुरोध किया गया है। इस पैकेज का उपयोग झील संरक्षण, यातायात सुधार, सार्वजनिक परिवहन, नागरिक सुविधाओं और शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है।
- 21 साल से लंबित मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की मांग
प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि राजधानी भोपाल का नया मास्टर प्लान पिछले 21 वर्षों से लंबित है। इसे नॉलेज एंड एआई सिटी, मेट्रोपॉलिटन रीजन, भेल भूमि, झीलों, विरासत स्थलों और हरित क्षेत्रों को समाहित करते हुए एकीकृत विकास दस्तावेज के रूप में तैयार किया जाना चाहिए।

 

विरासत और भविष्य का संगम बन सकता है भोपाल
पत्र में भोपाल की ऐतिहासिक और भौगोलिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पाषाणकालीन विरासत, राजा भोज की जल प्रबंधन परंपरा, भोजताल, वन विहार, रातापानी टाइगर रिजर्व और देश के मध्य स्थित राजधानी होने के कारण भोपाल के पास अद्वितीय संभावनाएं हैं। प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि भोपाल अब केवल ‘सुकून का शहर’ नहीं, बल्कि ‘समृद्धि से परिपूर्ण सुकून’ का शहर बनना चाहता है। सही नीति, निवेश और नियोजन के साथ यह शहर विरासत, प्रकृति, तकनीक और ज्ञान आधारित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है। इस दृष्टि पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद आलोक शर्मा और भाजपा जिला अध्यक्ष रवींद्र यति को भी आगामी समन्वय और कार्रवाई के लिए सौंपी गई हैं।
 

नॉलेज एंड एआई सिटी को राष्ट्रीय पहचान देने पांच प्रमुख मांगें रखी  
3700 एकड़ में विकसित की जा रही नॉलेज एंड एआई सिटी को राष्ट्रीय स्तर की एंकर परियोजना घोषित किया जाए।
भेल की 2200 एकड़ अप्रयुक्त भूमि पर स्मार्ट इंडस्ट्री, क्लीन टेक्नोलॉजी और उच्च रोजगार आधारित औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएं।
भोपाल और इंदौर को जोड़ते हुए ‘ट्विन मेट्रोपॉलिटन आर्क’ के लिए विश्वस्तरीय ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए।
केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड से भोपाल के लिए विशेष पुनर्विकास पैकेज स्वीकृत किया जाए।
21 वर्षों से लंबित भोपाल मास्टर प्लान को ‘भोपाल विकास योजना 2047’ के रूप में शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए।