व्यापारी-किसान संगठनों का ऐलान: मंडी टैक्स बढ़ोतरी के विरोध में 23 जून को भोपाल सहित प्रदेश की मंडियां बंद
एवीएस न्यूज.भोपाल
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क (मंडी टैक्स) को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के विरोध में राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर के व्यापारियों ने 23 जून को मंडियां बंद रखने का निर्णय लिया है। जिसके चलते भोपाल मंडी सहित प्रदेशभर प्रमुख मंडियों में अनाज नीलामी सहित समस्त व्यापार ठप्प रहेगा।
भोपाल ग्रेन मर्चेंट एंड ऑयल सीड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ज्ञानचंदानी , प्रवक्ता संजीव जैन ने बताया कि प्रदेश स्तरीय व्यापारिक संगठन सकल अनाज, दलहन एवं तिलहन व्यापारी महासंघ के आह्वान पर व्यापारिक संगठनों और किसान प्रतिनिधियों ने इस फैसले का समर्थन किया है।
उन्होंने कहाकि मंडी शुल्क में बढ़ोतरी से कृषि व्यापार की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर किसानों और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा। ज्ञात हो कि सरकार ने अक्टूबर 2023 में मंडी शुल्क को 1.5 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। यह नई दर 15 जून 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो चुकी है।
अनाज कारोबारी समीर भार्गव ने कहा कि भले ही कागजों में यह शुल्क व्यापारियों और खरीदारों से वसूला जाएगा, लेकिन बढ़ी हुई लागत का बोझ अंततः किसानों पर पड़ेगा।
उनका आरोप है कि व्यापारी बढ़े हुए खर्च की भरपाई उपज के खरीद मूल्य में कटौती करके करेंगे, जिससे किसानों को कम कीमत मिलेगी। सकल अनाज, दलहन एवं तिलहन व्यापारी महासंघ का कहना है कि देश के कई राज्यों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत या उससे कम है।
ऐसे में मध्य प्रदेश में अधिक शुल्क लागू होने से यहां के व्यापारी अन्य राज्यों के कारोबारियों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ सकते हैं।
महासंघ के अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने कहा कि इस विषय पर मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा चल रही थी, लेकिन अचानक शुल्क बढ़ाने का निर्णय लेकर उसे लागू कर दिया गया। वहीं, ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने व्यापारियों से एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की है।
बैठक में अधिकारियों पर लगाए आरोप
व्यापारियों की हुई बैठक में व्यापारियों ने मंडी अधिकारियों पर कथित वसूली और रिश्वतखोरी के आरोप भी लगाए । व्यापारिक प्रतिनिधियों ने कहा कि बढ़े हुए शुल्क का लाभ किसानों को नहीं मिलेगा, जबकि व्यापारियों और किसानों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
व्यापारिक संगठनों ने मोहन सरकार से मांग की है कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की तर्ज पर पूरे देश में समान कर व्यवस्था लागू की जाए, ताकि कृषि व्यापार में समान प्रतिस्पर्धा बनी रहे। व्यापारियों का मानना है कि किसानों और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए टैक्स वृद्धि वापस लेना आवश्यक है, अन्यथा कृषि व्यापार और मंडी व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं।






