मंडी बोर्ड द्वारा किसी प्रकार का ऋण नहीं लिया जाएगा। बावजूद कृषि विभाग द्वारा किसानों की मातृ संस्था मंडी बोर्ड को गिरवी रख कर भावांतर का भुगतान के लिए 1500 करोड़ रुपए ऋण लेने का आदेश दिया गया है, जो न्यायोचित नहीं है। 

 

एवीएस न्यूज.भोपाल
 मध्यप्रदेश कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड की आर्थिक स्थिति कमजोर है, मंडी बोर्ड भावांतर योजना के लिए सोयाबीन की राशि का भुगतान करने के लिए 1500 करोड़ रुपए का ऋण लेने की स्थिति में नहीं है। इस संबंध में कृषि मंत्री द्वारा भी  15 अक्टूबर को अपनी नोटशीट पर उल्लेख किया है कि भावांतर योजना के लिए राशि की व्यवस्था शासन स्तर पर की जाए, मंडी बोर्ड द्वारा किसी प्रकार का ऋण नहीं लिया जाएगा। बावजूद कृषि विभाग द्वारा किसानों की मातृ संस्था मंडी बोर्ड को गिरवी रख कर भावांतर का भुगतान के लिए 1500 करोड़ रुपए ऋण लेने का आदेश दिया गया है, जो न्यायोचित नहीं है।  मंडी बोर्ड सहित कृषि उपज मंडियों में सेवारत अधिकारी -कर्मचारियों की संस्था संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव से मांग की है कि कृषि विभाग द्वारा मंडी बोर्ड पर उक्त लोन लेने दबाव जो बनाया जा रहा है उस पर हस्तक्षेप करें।

 इसके साथ ही मोर्चा के संयोजक बीबी फौजदार, प्रांताध्यक्ष अंगीरा  पांडेय,  रामवीर किरार, अध्यक्ष नैनसिंह सोलंकी, प्रांतीय अध्यक्ष बीरेन्द्र कुमार नरवरिया और प्रांताध्यक्ष संतोष सिंह दीक्षित सहित अन्य पदाधकारी मंडी बोर्ड पर 1500 करोड रुपए लेने के दिए गए आदेश के विरोध में आ गए है। विरोध स्वरूप शुक्रवार को मोर्चा ने मंडी बोर्ड  मुख्यालय में प्रदर्शन भी किया है।

 आदेश पर मोर्चा का  पुरजोर विरोध
मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहाकि शासन द्वारा अगर मंडी बोर्ड पर 1500 करोड़ रुपए लोन लेने का जोर दिया गया है तो मंडी बोर्ड सहित मध्यप्रदेश के सभी मंडियों के अधिकारी -कर्मचारी हड़ताल अनिश्चित कालीन हड़ताल करने को मजबूर होंगे। मोर्चा के संरक्षक बीबी फौजदार और प्रांताध्यक्ष अंगीरा पांडेय ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा जारी पत्र क्रमांक 3264 दिनांक 19/10/2025 से प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड को ऋण राशि रूपए 1500 करोड़ रुपए लिए जाने का आदेश दिया गया है जिसका मोर्चा पुरजोर विरोध करता है। 

नियमित वेतन, पेंशन भुगतान नहीं होने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा
उन्होंने कहाकि 259 मंडी समितियों में कार्यरत अमले को नियमित रूप से वेतन, पेंशन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उक्त अमले को मंडी बोर्ड में आमेलन करने के लिए वर्ष 2020 में किए गए आंदोलन के फलस्वरूप विधिवत प्रस्ताव इत्यादि तैयार राज्य शासन को अधिसूचना जारी करने के लिए प्रेषित किया गया, जो कि लंबित है, जिस कारण प्रदेश की 60 से 70 मंडियों में नियमित वेतन, पेंशन भुगतान नहीं होने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


 मंडी अधिनियम में बोर्ड द्वारा ऋण एवं योजना संचालन में  राशि भुगतान का प्रावधान नहीं 
मोर्चा ने कहाकि राज्य शासन द्वारा भावांतर योजना के क्रियान्वयन के लिए जिस प्रकार से प्रचार-प्रसार किया गया है तथा प्रदेश के समस्त विभागों का अमला दिखावे के लिए एजुट होकर योजना का सफल संचालन का स्वप्न दिखाया जा रहा है वह धरातल पर आज दिनांक तक कहीं नहीं है, इसमें सभी प्रकार के कार्य मंडी समिति एवं मंडी बोर्ड को करने के निर्देश दिए जा रहे है। कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में बोर्ड ऋण एवं इस प्रकार की योजना का संचालन करने का प्रावधान नहीं है। इसके उपरांत भी शासन द्वारा दबाव बनाकर कार्य कराया जा रहा है।


-  वर्तमान में मंडी समिति के पास पर्याप्त अमला नही 
वर्तमान में मंडी समिति के पास पर्याप्त अमला नही तथा तथा कार्यपालक अधिकारी (मंडी सचिव) के पास तीन से चार मंडियों का प्रभार है एवं उक्त मंडियों के बीच लगभग 200 किलो मीटर की दूरी तक है, ऐसे में भावांतर योजना का क्रियान्वयन किस प्रकार से किया जाएगा, जिसमें भावांतर योजना में एफओक्यू  का मापाकंन, पंजीयन, मंडी में प्रवेश पंजीयन, किसानों के लिए भुगतान इत्यादि की प्रक्रिया का समस्त कार्य करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है जबकि उपरोक्त अमले को इस संबंध में किसी प्रकार अनुभव नहीं है। भविष्य में किसी प्रकार की गलतियां होने पर मंडी समिति जबावदार नहीं होंगी।


 29 अक्टूबर को प्रदेश की सभी मंडियां को बंद 
 मोर्चा ने आरोप लगाया कि मंडी बोर्ड को अन्य निगम मंडलों की तरह बंद करने की सुनियोजित योजना के तहत कार्यवाही की जा रही है।  संगठन ने घोषणा की है कि 29 अक्टूबर 2025 एक दिवसीय प्रदेश की समस्त मंडियों को बंद रखा जाएगा और भोपाल में एकत्रित होकर योजना का विरोध एवं आमेलन की कार्यवाही किए जाने की मांग होगी।