भोपाल। सेल्फ रिलायंट इनीशिएटिव्स थ्रु जॉइंट एक्शन (सृजन) ने महिलाओं द्वारा संचालित फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों को मजबूत करने और ग्रामीण भारत में महिला किसानों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने के प्रयासों को विस्तार दिया है। पहले चरण में 24,000 से ज्यादा महिला किसानों तक पहुंचने में सफलता मिली थी।

पहले चरण की सफलता को देखते हुए वॉलमार्ट फाउंडेशन की तरफ से नए ग्रांट सपोर्ट के साथ प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 19 एफपीसी से जुड़ी कुल 38,000 से ज्यादा महिला किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना, उन्हें बाज़ार तक बेहतर पहुंच दिलाना, नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाने के लिए सक्षम बनाना है। 
वॉलमार्ट डॉट ओआरजी के सोशल एंड एनवायरमेंटल इम्पैक्ट एडवाइजर निशांत गुप्ता ने कहा महिला किसानों को सशक्त करना कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को दृढ़ बनाने के लिए जरूरी है। हमें बाजार तक पहुंच बढ़ाने, क्षमता निर्माण को गति देने और एग्री वैल्यू चेन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सृजन का समर्थन करते हुए खुशी हो रही है।’
प्रोजेक्ट के अगले चरण को लेकर सृजन के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर श्री प्रसन्ना खेमरिया ने कहा हम ज्यादा समावेशी, दक्ष एवं लाभदायक एफपीसी इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एक ऐसा इकोसिस्टम जो कृषि उत्पादन के इर्द-गिर्द केंद्रित हो और जहां वैल्यू चेन में महिला किसानों की ज्यादा भागीदारी हो।’


केन बेतवा महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की डायरेक्टर माया घोष ने कहा 34 विलेज लेवल कलेक्शन सेंटर (वीएलसीसी) के अपने नेटवर्क के माध्यम से हमने सफलतापूर्वक सीधे महिला किसानों से 448 टन कृषि उत्पादों की खरीद की। सीधी बिक्री से हमारे सदस्यों को अच्छी कीमत मिली और किसानों को भी बेहतर मूल्य मिला।’
नवंबर, 2022 से नवंबर 2024 के बीच पहले चरण में प्रोजेक्ट से समर्थन प्राप्त 12 एफपीसी का टर्नओवर 190 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया। वहीं उनके शेयरहोल्डर्स की वार्षिक आय में 30,000 रुपये का इजाफा हुआ था, जो 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। शेयरहोल्डर्स की संख्या भी 6,614 से बढ़कर 24,328 हो गई, जिनमें 88 प्रतिशत महिलाएं हैं। एफपीओ को उत्पाद बेचने वाले शेयरधारकों की संख्या 39 प्रतिशत और एफपीओ से इनपुट खरीदने वाले शेयरहोल्डर्स की संख्या 88 प्रतिशत तक बढ़ गई।


दूसरे चरण में एफपीसी के भीतर प्रशासनिक व्यवस्था एवं परिचालन को मजबूत करने और महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिकाएं संभालने में सक्षम बनाने पर फोकस किया जाएगा। सभी 19 एफपीसी स्वतंत्र तरीके से परिचालन करेंगी और लंबी अवधि में पर्यावरण के अनुकूल कार्य करेंगी। अनुमान है कि 70 प्रतिशत किसान बेहतर फसल प्रबंधन की प्रक्रियाओं को अपनाएंगे और बढ़ी हुई उत्पादकता का लाभ उठाएंगे।
इस सतत पहल के माध्यम से सृजन ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को निर्णय लेने, आजीविका को मजबूत बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देने में सक्षम बना रहा है।