मिलावटखोरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है और आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा 

एवीएस न्यूज .भोपाल 
मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर प्रभावी रोक नहीं लग पाने को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शासन-प्रशासन में बैठे कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कई जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जिससे मिलावटखोरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है और आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

विभागीय निष्पक्षता और कार्रवाई की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे
 जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी वर्ष 2008 से लगातार पदस्थ हैं और उनका एक बार भी स्थानांतरण नहीं हुआ है। कुछ अधिकारियों का स्थानांतरण होने के बाद भी वे पुन: पुराने जिले में पदस्थ हो गए। इससे विभागीय निष्पक्षता और कार्रवाई की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

कुछ मामलों में निलंबन के बाद भी अधिकारियों को पुन: बहाल कर दिया गया

आरोप यह भी हैं कि कुछ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के विरुद्ध आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जांच एवं विभागीय जांच लंबित होने के बावजूद वे अपने पदों पर कार्यरत हैं। कुछ मामलों में निलंबन के बाद भी अधिकारियों को पुन: बहाल कर दिया गया, जिससे शासन की छवि प्रभावित हुई है।

आरोप है कि ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में उनके पास करोड़ों रुपये की संपत्ति का खुलासा
रीवा जिले में पदस्थ खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमरीश दुबे का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में उनके पास करोड़ों रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ था, लेकिन कठोर कार्रवाई के बजाय उन्हें पुन: पदस्थ कर दिया गया। इसी प्रकार मुरैना के खाद्य सुरक्षा अधिकारी अवनीश गुप्ता के विरुद्ध विभागीय जांच चलने और निलंबन की कार्रवाई होने के बावजूद बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया।

सामान्यत: तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए
सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार मैदानी अमले को सामान्यत: तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बावजूद कई अधिकारी करीब 18 वर्षों से एक ही जिले में पदस्थ बताए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर प्रभाव और मिलीभगत की आशंकाएं बढ़ रही हैं।

विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार और नियमित स्थानांतरण नीति का कड़ाई से पालन आवश्यक


विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि सरकार खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और आम जनता को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रति गंभीर है, तो विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार और नियमित स्थानांतरण नीति का कड़ाई से पालन आवश्यक है। उनका कहना है कि इससे नकली घी, पनीर, मावा, दूध, दही और मिठाइयों जैसी खाद्य सामग्री में मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकेंगे।