डीजल बिक्री के नए प्रावधानों पर ट्रांसपोर्ट उद्योग ने जताई चिंता, सरकार से पुनर्विचार की मांग
एवीएस न्यूज.भोपाल
डीजल बिक्री से जुड़े प्रस्तावित नए प्रावधानों को लेकर परिवहन उद्योग में चिंता बढ़ती जा रही है। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि इन नियमों के लागू होने से ट्रक ऑपरेटरों और वाहन मालिकों के साथ किसानों के सामने कई व्यावहारिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही है।
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा कि यदि ट्रक चालक अलग-अलग शहरों और राज्यों से डीजल भरवाते हैं, तो मालभाड़ा (फ्रेट रेट) निर्धारित करना बेहद जटिल हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं और इनमें समय-समय पर बदलाव भी होता रहता है। राजेंद्र कपूर के अनुसार, ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए यह सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा कि चालक किस स्थान से, कितनी मात्रा में और किस दर पर डीज़ल खरीद रहा है।
उन्होंने कहा कि लंबी दूरी के परिवहन में वाहनों की लगातार निगरानी और ईंधन खर्च का सटीक आकलन पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में नए प्रावधान परिचालन और लेखा-जोखा प्रणाली को और अधिक जटिल बना सकते हैं।
वहीं ट्रांसपोर्टर राजेंद्र सिंह बग्गा, ठाकुरलाल राजपूत ने कहा कि ईंधन लागत मालभाड़ा निर्धारण का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। यदि डीजल खरीद की प्रक्रिया और कीमतों में क्षेत्रवार अंतर बढ़ता है, तो ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए लागत नियंत्रण और उचित फ्रेट रेट तय करना कठिन हो जाएगा।
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि किसी भी नए निर्णय को लागू करने से पहले परिवहन क्षेत्र की जमीनी और व्यावहारिक चुनौतियों का व्यापक अध्ययन किया जाए। साथ ही ट्रांसपोर्ट संगठनों, वाहन मालिकों और उद्योग विशेषज्ञों से चर्चा कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे नीति का उद्देश्य भी पूरा हो और परिवहन उद्योग पर अनावश्यक बोझ भी न पड़े।
जबकि गोविंदपुरा इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गौर ने कहा कि परिवहन क्षेत्र देश की आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी नीतिगत निर्णय में व्यावहारिकता, पारदर्शिता और उद्योग हितों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

खेती के समय बेहद महत्वपूर्ण होता पेट्रोलियम मंत्रालय के नए नियमों से डीजल के लिए किसान बेहाल
राजधानी भोपाल जिले के ग्रामीण अंचलों के साथ समूचे प्रदेश की ग्रामीण अंचलों में किसानों को पेट्रोलियम मंत्रालय के नए नियमों के बाद डीजल की भारी किल्लत और बढ़ती परेशानी से जूझना पड़ रहा है। किसान मिश्रीलाल राजपूत और किसान नेता भागीरथ पाटीदार का कहना है कि खेती के काम जैसे ट्रैक्टर चलाना और हार्वेस्टर संचालन के लिए डीजल अब आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

कृषि उपज मंडी समिति भोपाल के पूर्व अध्यक्ष भागीरथ पाटीदार के अनुसार हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा लागू किए गए नए प्रावधानों के तहत डीजल की खरीदी और वितरण पर कुछ सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिसमें बड़े उपभोक्ताओं और थोक खरीद पर नियंत्रण शामिल है। इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है, जहां किसानों को समय पर डीजल नहीं मिल पा रहा है और उन्हें लंबी कतारों या सीमित मात्रा की वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि खेती का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में डीजल की कमी या सीमित आपूर्ति से उनकी लागत बढ़ रही है और काम प्रभावित हो रहा है। कई किसानों ने मांग की है कि सरकार ग्रामीण और कृषि उपयोग के लिए अलग से आसान और प्राथमिक आपूर्ति व्यवस्था बनाए।






