बांधवगढ़ प्रबंधन कर रहा मंत्रालय के आदेश की अवहेलना : जिम्मेदार रिसोर्ट की जिप्सी वाहन को रोस्टर से अलग कराने के बजाय दे रहे खुला संरक्षण
जिम्मेदार मनमानी पर उतारू, वाहन रोस्टर पद्धति संबंधी जारी आदेश का पालन नहीं
बजरंग बहादुर सोनी .मानपुर
उमरिया जिले के मानपुर विधानभा मुख्यालय स्थित विश्व विख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क जो इन दिनों प्रबंधन के अवैध कमाई का जरिया बना हुआ है। इस नेशनल पार्क के जिम्मेदारों द्वारा मनमानी की जा रही है। अनैतिक कमाई और भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए बनाए गए नियम- कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है और तानाशाही का रवैया अपनाए हुए हैं।
जिम्मेदारों की अवैध कमाई का एक रास्ता
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंत्रालय से चले एक आदेश को बांधवगढ़ क्षेत्र संचालक ने गंभीरता से संज्ञान में लेना उचित नहीं समझा और महज एक पत्र जारी कर मामले से पल्ला झाड़ लिया गया। क्योंकि अगर मंत्रालय के उक्त आदेश का परिपालन होता तो प्रबंधन के जिम्मेदारों की अवैध कमाई का एक रास्ता भी बंद हो जाता। लेकिन बांधवगढ़ क्षेत्र संचालक ने मंत्रालय के आदेश की अनदेखी कर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। इतना ही नही मंत्रालय भी आदेश जारी कर मामले को संज्ञान में लेना भूल गया।

जिम्मेदारों ने छुपा लिया आदेश को, ताकि की नहीं हो सके परिपालन
हद तो तब हो गई जब कुछ स्थानीय लोगों को पता चला की मंत्रालय के उक्त आदेश के परिपालन को लागू कराने के बजाय जिम्मेदारों द्वारा छुपा लिया गया है और आलीशान होटलों की जिप्सी वाहनों को रोस्टर से अलग न कराने के लिए जिम्मेदार खुलकर उन्हे संरक्षण देने में जुट गए। जिसकी खबर इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

वन विभाग के सहायक वन संरक्षण सौरभ कुमार ने गत माह जारी किया था आदेश पत्र
मिली जानकारी अनुसार विगत महीना पहले मध्य प्रदेश शासन वन विभाग मंत्रालय वल्लभ, भवन भोपाल से सौरभ कुमार काबरा (सहायक वन संरक्षण)के हाथों हस्ताक्षर के साथ जारी हुए पत्र में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि संशोधित उप नियम 7(3) पंजीकृत वाहनों की दो श्रेणी होगी, जिसमें पहली श्रेणी के वाहन रोस्टर पद्धति से संचालित होंगे। रोस्टर पद्धति संरक्षित क्षेत्र के भार-साधक अधिकारी के समक्ष पंजीकृत पर्यटक वाहन संस्था द्वारा प्रबंधित संरक्षित क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित प्रबंधन द्वारा विनिश्चित प्रक्रिया से प्रबंधित होगी। जिसके बाद कहा गया की द्वितीय श्रेणी के वाहन जो रोस्टर में नहीं रहेंगे। ऐसे वाहन स्थानीय होटल के होंगे एवं केवल अपने होटल के निवासी पर्यटक को लेकर संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगे,परंतु जब भी वे संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश करेगे तो रोस्टर में आने वाले वाहन को नियम 34 के उप नियम 7 (6) अनुसार क्षतिपूर्ति भुगतान करेंगे इतना ही नही संशोधित उप नियम 7 (8) उप नियम 7 (3) में वर्णित प्रथम श्रेणी के वाहनों के लिए रुपए 2000/- एवम द्वितीय श्रेणी के वाहनो के लिए रूपए 10,000/-पंजीयन शुल्क देय होगा जो संरक्षित क्षेत्र की पार्क विकास निधि में जमा किया जाएगा। उक्त संशोधन अधिसूचना जारी होने के दिनांक से प्रवृत्त होंगे।
पन्ना टाइगर रिजर्व में तत्काल किया आदेश पालन,मगर बांधवगढ़ प्रबंधन ने बरती कोताही
मंत्रालय से जारी आदेश प्राप्त होते ही सक्रिय पन्ना टाइगर रिजर्व के जिम्मेदारों ने उक्त आदेश का पालन कराने में बिलकुन कोताही नही बरती और तत्काल पालना करा दिया गया, लेकिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का निस्क्रिय प्रबंधन ने उक्त पत्र को दर किनार करते हुए आदेश पालन कराना उचित नहीं समझा। बल्कि होटलों के जिप्सी वाहनों को खुलकर संरक्षण प्रदान किया जाने लगा, जिसके चलते महीना बीत जाने के बाद भी रोस्टर से रिसोर्ट की जिप्सी वाहनों को अलग नही कराया गया। नतीजन आज बेहिचक सब के सब अपनी अवैध कमाई में मशगुल हैं। जिला कलेक्टर के साथ बांधवगढ़ क्षेत्र संचालक से जनापेक्षा है कि संबंधित मामले को संज्ञान में लेते हुए उक्त आदेश को जल्द से जल्द बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जिप्सी वाहन यूनियन में पालन कराया जाए, ताकि राजपत्र के साथ-साथ मंत्रालय से चले आदेश पत्र की अवहेलना न हो सकें।
- इनका कहना है
उक्त विषय पर हमें पत्र मिला है जिस पर हम आज ही नोटिस जारी कर रहे हैं। रही बात रोस्टर से होटल की जिप्सी वाहनों को अलग कराने की तो यह क्षेत्र संचालक के कार्यालय से ही संभव हो पाएगा । राहुल किरार
पर्यटन प्रभारी, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया

