मानसून का छलावा: कमजोर बारिश से खेती पर संकट के बादल
मानसून की अनिश्चितता यूं ही रही तो उत्पादन घटेगा और आर्थिक नुकसान होगा: भागीरथ
एवीएस न्यूज.भोपाल
जून माह में कमजोर और लगभग गतिहीन रहे दक्षिण-पश्चिम मानसून ने वर्षा की भारी कमी पैदा कर दी, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक घट गया है। हालांकि जुलाई के प्रारंभ में मानसून ने कुछ रफ्तार पकड़ी है और कई राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों के ताजा अनुमान भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सक्रिय सुपर अल नीनो का प्रभाव इस बार मानसून को कमजोर और धीमा कर रहा है। जुलाई और अगस्त कृषि की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं, क्योंकि इसी दौरान सबसे अधिक वर्षा होती है और खरीफ फसलों की अधिकांश बुआई पूरी होती है। यदि इन महीनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
किसानों की निगाहें अब जुलाई और अगस्त की बारिश पर टिकी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में मानसून ने अपेक्षित गति नहीं पकड़ी, तो इस वर्ष कई राज्यों में मानसून उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाएगा। ऐसे में किसानों की निगाहें अब जुलाई और अगस्त की बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि यही दो महीने इस खरीफ सीजन और देश की कृषि अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे।

समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित : पाटीदार
कृषि उपज मंडी समिति भोपाल के पूर्व मंडी अध्यक्ष भागीरथ पाटीदार ने कहा कि इस बार मानसून की अनिश्चितता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। कई क्षेत्रों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है, जबकि जिन किसानों ने बुआई कर दी है, वे अब लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जुलाई और अगस्त में भी अच्छी वर्षा नहीं हुई तो फसलों की वृद्धि प्रभावित होगी, उत्पादन घटेगा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

असमान वर्षा के कारण दोबारा बुआई की स्थिति बन सकती
किसान भगवान सिंह परमार ने कहा कि यदि जुलाई और अगस्त में पर्याप्त एवं समान रूप से वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है। कई क्षेत्रों में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कहीं-कहीं असमान वर्षा के कारण दोबारा बुआई की स्थिति बन सकती है।
विशेष राहत पैकेज और ब्याज मुक्त सहायता की व्यवस्था की जानी चाहिए
किसान संगठनों के पदाधिकारी और किसान नेता त्रिवेणी दत्त त्रिपाठी ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से मांग की है कि संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए जिला स्तर पर आकस्मिक योजनाओं को तत्काल लागू किया जाए। सिंचाई के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाएं, किसानों को पर्याप्त बिजली, बीज और उर्वरक समय पर मिलें तथा फसल बीमा दावों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
किसानों कहा कि यदि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां बनी रहती हैं तो किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज और ब्याज मुक्त सहायता की भी व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि कृषि और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।






