शहर तय करेंगे भारत की ग्रोथ, भोपाल को चाहिए विशेष पुनर्निर्माण पैकेज: क्रेडाई
आत्माराम सोनी.भोपाल
वित्त मंत्री 1 फरवरी को बजट 2026 पेश करने वाले हैं, ऐसे में घर खरीदार उन उपायों पर उत्सुकता से नजर रख रहे हैं जो सामर्थ्य और वित्तपोषण को प्रभावित कर सकते हैं। वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि उधार लेने की लागत, कर छूट और ऋण तक पहुंच पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, ताकि खरीदारों को पहला या अगला घर खरीदने की योजना बनाने में मदद मिल सके।
आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख संकेत- घर खरीदना अब तेजी से औपचारिक वित्त से जुड़ रहा है व्यक्तिगत हाउसिंग लोन का आकार मार्च, दो हजार पच्चीस तक रुपए सैंतीस लाख करोड़ से अधिक बताया गया है। किफायती आवास में सरकार का काम दिखता है। पीएमएवाई शहरी के तहत रुपए एक सौ बाईस दशमलव शून्य छह लाख घर स्वीकृत बताए गए हैं। शहरी ढांचे में अब“सिर्फ कवरेज” नहीं, “सिस्टम की गुणवत्ता” की जरूरत है, सर्वेक्षण में अगले पंद्रह वर्षों के लिए लगभग आठ सौ चालीस अरब डॉलर के शहरी निवेश की जरूरत का संकेत है।
भोपाल को दफ्तरों का नहीं, नवाचार और ज्ञान का शहर बनाना होगा
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहाकि आर्थिक सर्वेक्षण ने साफ संकेत दिया है कि भारत की ग्रोथ का अगला अध्याय ‘शहरों की कार्यक्षमता’ से लिखा जाएगा और इसके लिए बजट को अब कवरेज से आगे बढ़कर क्वालिटी, रिडेवलपमेंट और गवर्नेंस क्षमता पर फोकस करना होगा। आने वाले वर्षों में शहरों पर आबादी, रोजगार और सेवाओं का दबाव और बढ़ेगा। अब बजट का फोकस शहरों की कार्यक्षमता, आवासीय आपूर्ति, पुनर्विकास और नगरीय वित्तीय क्षमता पर होना चाहिए।
बजट से राजधानी भोपाल की अपेक्षाएं
पहली और सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षा यह है कि शहरी विकास के लिए घोषित “अर्बन चैलेंज फंड” को इस बजट में व्यावहारिक और परिणाम देने वाले रूप में लागू किया जाए। क्रेडाई भोपाल की मांग है कि भोपाल जैसी राजधानी के लिए इसके अंतर्गत एक विशेष “कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज” की स्पष्ट व्यवस्था बने। राजधानी होने के कारण भोपाल पर प्रशासनिक और संस्थागत दबाव अधिक है, जबकि वर्षों से यहां का पुनर्विकास लंबित रहा है। ऐसे में भोपाल के लिए अलग प्राथमिकता पूरी तरह उचित है। दूसरी अपेक्षा यह है कि राज्य सरकार द्वारा घोषित नॉलेज एंड एआई सिटी को केंद्रीय स्तर पर आवश्यक संसाधनों और समर्थन के साथ देश के एआई मिशन से जोड़ा जाए। भौगोलिक रूप से देश के केंद्र में स्थित और खनिज संपदा से समृद्ध राज्य की राजधानी भोपाल को लॉजिस्टिक्स और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए।
भोपाल के लिए विशेष कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज की जरूरत
भोपाल देश के मध्य स्थित एक ख़ूबसूरत राजधानी है पर उन्नीस सौ चौरासी की औद्योगिक त्रासदी के बाद यह शहर लंबे समय तक दबाव, ठहराव और अवसर-हानि से गुजरा है। आज भोपाल को केवल नई परियोजनाओं से नहीं, बल्कि एक “विशेष पुनर्निर्माण पैकेज” से आगे बढ़ाया जा सकता है जिसमें रिडेवलपमेंट, ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक भूमि का बेहतर उपयोग, और नगर निकाय की आय बढ़ाने के उपाय साथ-साथ हों। “अर्बन चैलेंज फंड” के भीतर भोपाल के लिए अलग विशेष विंडो बनाना इसी सोच का व्यावहारिक कदम होगा।

रिडेवलपमेंट और नई अर्थव्यवस्था’ का मौका देने वाला बजट चाहिए
भारत की ग्रोथ का अगला इंजन शहर हैं और भोपाल जैसी राजधानी को अब ‘ठहराव’ नहीं, ‘रिडेवलपमेंट और नई अर्थव्यवस्था’ का मौका देने वाला बजट चाहिए। भोपाल के संदर्भ में यह केवल विकास की बात नहीं है यह राजधानी की विश्वसनीयता, निवेश आकर्षण, रोजगार सृजन और नागरिक जीवन-गुणवत्ता का प्रश्न है। ‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान के तहत हम चाहते हैं कि नया बजट भोपाल को “दफ्तरों का शहर” नहीं, बल्कि “नवाचार, ज्ञान, और सुव्यवस्थित शहरी विकास, का मॉडल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए।
मनोज मीक
अध्यक्ष, क्रेडाई भोपाल और फाउंडर, ‘कमाल का भोपाल’ अभियान

टेक्नोलॉजी टैक्सेशन में स्पष्ट और स्थिर नीति बनाई जाए
उद्योग जगत की केंद्रीय बजट से अपेक्षा है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स में वृद्धि करे। सड़क, रेलवे, पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स में भारी निवेश करें, लॉजिस्टिक्स की लागत घटाए और निजी निवेश और औद्योगिक विकास को गति दे। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई और मेक इन इंडिया को बढ़ावा दें। राजधानी भोपाल के समस्त उद्यमियों की ओर से मेरी और उद्योग जगत की मांग यह है कि पीएलआई स्कीम का विस्तार हो । घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को अधिक प्रोत्साहन दिया जाए। एमएसएमई के लिए सस्ता कर्ज, टैक्स राहत और आसान काम्पलाइंसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और डीप-टेक सेक्टर को सपोर्ट किया जाना चाहिए। इसके साथ ही डिजिटल इकॉनमी, एआर् और टेक्नोलॉजी पर फोकस किया जाए। रही बात बजट से उम्मीद की तो इंडिया एआई मिशन को तेजी से लागू करें, डेटा सेंटर्स, क्लाउड और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश हो, टेक्नोलॉजी टैक्सेशन में स्पष्ट और स्थिर नीति बनाई जाए।
राजीव अग्रवाल
अध्यक्ष,मंडीदीप इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

आगामी बजट में कौशल विकास एवं एमएसएमई को प्राथमिकता मिले
वर्तमान में देश में बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है वर्तमान शिक्षा में युवक डिग्री प्राप्त करने के बाद रोजगार लायक नहीं रहते हैं इसलिए कौशल विकास करने वाली संस्थाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। ऐसी संस्थाओं को आय कर में छूट दें कर प्रोत्साहित जाना चाहिए, जिससे वह युवकों को रोजगार लायक बना सके । साथ ही एमएसएमई का सरल घरेलू उत्पाद में (जीडीपी )में 30 फीसदी का योगदान है तथा यह सेक्टर सर्वाधिक रोजगार प्रदान करता है। अतः इस सेक्टर को भी कुछ सस्ता ऋण देकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऋण व्यवस्था में सुधार, करो का सरलीकरण तथा जीएसटी के प्रक्रियाओं में अधिक सुधार कर लघु व्यापारियों एवं उद्यमियों की मदद की जानी चाहिए।
आरजी द्विवेदी
सलाहकार, पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री,भोपाल

