वैश्विक अनिश्चितता के बीच पंप इंडस्ट्री ने सरकार के स्थिरता लाने वाले कदमों का किया स्वागत
एवीएस न्यूज. नई दिल्ली
देश के प्रमुख पंप निर्माता संगठनों इंडियन पंप मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, साउदर्न इंडिया इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और राजकोट इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच देश में स्थिरता और सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा समय पर उठाए गए कदमों का स्वागत किया है। इंडस्ट्री संगठनों ने सुझाव दिया है कि मौजूदा वैश्विक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए कुछ लक्षित नीतिगत सहायता उपायों की ज़रूरत है। इनमें वर्किंग कैपिटल के लिए विशेष क्रेडिट लाइन, एमएसएमई भुगतान नियमों में अस्थायी राहत, वर्किंग कैपिटल उधारी की सीमा बढ़ाने और ज़रूरी कच्चे माल पर लगने वाली सेफगार्ड ड्यूटी को हटाने जैसी मांगें शामिल हैं।
हालांकि, संगठनों ने पिछले छह महीनों में कच्चे माल की कीमतों में आई अभूतपूर्व बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता जताई है, जिससे एमएसएमई आधारित पंप मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भारी दबाव पड़ रहा है। पिछले एक साल में कॉपर (तांबा) की कीमतों में 50प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो करीब 800–850 रूपए प्रति किलो से बढ़कर 1,200 रूपए प्रति किलो तक पहुँच गई है।
कई तरह के पंपों में केवल कॉपर की हिस्सेदारी ही कुल लागत का 25–30प्रतिशत होती है। इसके साथ ही एल्यूमीनियम, स्टील, कास्ट आयरन, पॉलिमर और केबल जैसे अन्य ज़रूरी सामानों की कीमतों में तेज़ उछाल के कारण कुल उत्पादन लागत 20प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है, जिससे इंडस्ट्री के मुनाफे में भारी कमी आई है।
इंडस्ट्री के नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे माल की इस महंगाई का बोझ इसी तरह उठाना पड़ा, तो कई पंप निर्माता खासकर एमएसएमई के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है।
लागत में हुई इस असामान्य बढ़ोतरी को आंशिक रूप से संभालने के लिए, कंपनियों ने अक्टूबर 2025 की कीमतों के मुकाबले पहले ही करीब 10प्रतिशत की चरणबद्ध मूल्य वृद्धि शुरू कर दी है, जिसे 31 मार्च 2026 तक लागू किया जा रहा है। वहीं, धातुओं की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और सप्लाई की अनिश्चितता को देखते हुए, अप्रैल 2026 से कीमतों में कम से कम 7.5प्रतिशत से 10प्रतिशत की और बढ़ोतरी ज़रूरी हो गई है।
संगठनों ने यह भी दोहराया कि पानी के पंप मुख्य रूप से कृषि मशीनरी हैं, जो सिंचाई, भूजल प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका के लिए बेहद ज़रूरी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, इंडस्ट्री ने सरकार से पानी के पंपों पर जीएसटी को 18प्रतिशत से घटाकर 5प्रतिशत करने का आग्रह किया है, ताकि किसानों को सहायता मिले, संगठित मैन्युफैक्चरिंग टिकी रहे और ऊर्जा-कुशल तकनीकों को बढ़ावा दिया जा सके।

