मप्र पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन ने किया गया स्वागत, बोले अब मांग और आपूर्ति दोनों में होगा समन्वय 

 एवीएस न्यूज .भोपाल


राजधानी भोपाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पेट्रोल के दाम में 3.28 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3.09 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि के बाद आम लोगों पर महंगाई का असर बढ़ गया है। नई दरों के अनुसार भोपाल में पेट्रोल अब 109 रुपए 79 पैसे प्रति लीटर और डीजल 94 रुपए 95 पैसे प्रति लीटर हो गया है।
गौरतलब है कि ईंधन कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के बाद वाहन चालकों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।

लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की ढुलाई लागत बढ़ेगी, जिसका असर बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।


वहीं, मप्र पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने ने कहाकि लंबे समय से मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। नई कीमतों से तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को राहत मिलेगी तथा बाजार में ईंधन की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी।


एसोसिएशन के अनुसार पेट्रोलियम कंपनियों को घटा होने से आपूर्ति बाधित हो रही थी, कई बार कम मार्जिन और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण पेट्रोल पंप संचालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब कीमतों में संशोधन के बाद मांग और सप्लाई दोनों में बेहतर समन्वय देखने को मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और परिवहन लागत में बदलाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में महंगाई पर इसका असर दिखाई दे सकता है। 


 अब हर चीज पर दिखेगा असर
पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद ट्रांसपोर्ट खर्च बढऩा तय माना जा रहा है। इसका असर सब्जियों, किराना, दूध और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में पहले से बढ़ती गर्मी और महंगाई के बीच ईंधन के दाम बढऩे से आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
 

तेल कंपनियों ने बताया घाटे का दबाव
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। कंपनियों ने दावा किया है कि वे रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही थीं।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी पहले संकेत दिए थे कि अगर दाम नहीं बढ़ाए गए तो तेल कंपनियों का घाटा एक तिमाही में 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच सकता है।