एवीएस न्यूज.भोपाल 


 ऑनलाइन क्विक कॉमर्स और 10 मिनट में सामान पहुंचाने वाली सेवाओं के तेजी से बढ़ते चलन ने पारंपरिक दुकानदारों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कभी ग्राहकों से गुलजार रहने वाले बाजार अब बदलते खरीदारी पैटर्न का असर महसूस कर रहे हैं।

मोबाइल ऐप के जरिए किराना, घरेलू सामान, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें कुछ ही मिनटों में घर पहुंचने लगी हैं। इसका सीधा असर स्थानीय दुकानों की बिक्री पर पड़ रहा है। कई छोटे व्यापारी मान रहे हैं कि ग्राहक अब सुविधा और समय बचाने के कारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

 व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन ऑर्डर और भारी छूट की वजह से ग्राहक अब बाजार आने की बजाय मोबाइल से खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका सीधा असर छोटे किराना व्यापारियों, रिटेल दुकानदारों और थोक बाजारों पर पड़ रहा है।


 छोटे दुकानदारों का कंपनियों से मुकाबला करना मुश्किल 
व्यापारियों के अनुसार दुकान चलाने में किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि ऑनलाइन कंपनियों से मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है।कई दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां ग्राहक नियमित रूप से बाजार आते थे, वहीं अब रोजमर्रा की जरूरतों का सामान भी कुछ मिनटों में घर पहुंचने लगा है, जिससे बाजारों की चहल-पहल कम हुई है।



  छोटे बाजारों और पारंपरिक दुकानों पर इसका बड़ा असर 
 भोपाल थोक चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष ईश्वरदास संगतानी का कहना है कि तकनीक और ऑनलाइन सेवाओं का विरोध नहीं है, लेकिन छोटे व्यापारियों के हितों का संतुलन भी जरूरी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में छोटे बाजारों और पारंपरिक दुकानों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।क्विक डिलीवरी सुविधा ग्राहकों के लिए भले ही आसान हो, लेकिन स्थानीय व्यापारियों के लिए यह बदलते बाजार की बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
 

 

बाजारों की रौनक कम होती जा रही 
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली के अनुसार पहले ग्राहक रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार आते थे, जिससे आसपास की अन्य दुकानों का कारोबार भी चलता था। अब मोबाइल ऐप से कुछ ही मिनटों में सामान मिलने के कारण बाजारों की रौनक कम होती जा रही है।
 

 

कंपनियां भारी छूट और त्वरित डिलीवरी के दम पर कर रही आकर्षित 
आटा- मैदा कारोबारी दीपक पसारी ने कहा कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट और त्वरित डिलीवरी के दम पर ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। छोटे दुकानदार न तो इतनी छूट दे सकते हैं और न ही इतनी तेज डिलीवरी कर सकते हैं। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले वर्षों में हजारों छोटे व्यापारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। सरकार को सभी के लिए समान प्रतिस्पर्धा का माहौल सुनिश्चित करना चाहिए। 
 

छोटे व्यापारियों के हितों की भी रक्षा की होनी चाहिए
व्यापारी लक्ष्मणदास राजपाल  के अनुसार पारंपरिक दुकानें केवल सामान बेचने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्थानीय रोजगार, सामाजिक संपर्क और मोहल्ले की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनका मानना है कि ग्राहकों की सुविधा के साथ-साथ छोटे व्यापारियों के हितों की भी रक्षा की जानी चाहिए।

 किराना कारोबारियों ने जताई चिंता
फुटकर  किराना व्यापारी हरशेद्र महाजन का कहना है कि क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म बड़े स्तर पर निवेश और डिस्काउंट देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। इससे छोटे दुकानदारों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन होती जा रही है।व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि छोटे और पारंपरिक व्यापारियों को राहत देने के लिए नीतियां बनाई जाएं, ताकि लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित न हो।