लगातार धूप और नमी की कमी के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी , किसानों की बढ़ी चिंता


आत्माराम सोनी .भोपाल 


मानसून की बेरूखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पहली अच्छी बारिश के बाद बोई गई सोयाबीन की फसल अब लगातार धूप और नमी की कमी के कारण खेतों में मुरझाने लगीं हैं। बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन और धान की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

 


किसान भागीरथ पाटीदार  के अनुसार लगातार तेज धूप और मिट्टी में नमी की कमी के चलते खेतों में सोयाबीन के पौधे मुरझाने लगे हैं। कई स्थानों पर पौधों की बढ़वार रुक गई है, जिससे किसानों को उत्पादन प्रभावित होने की आशंका सता रही है। उन्होंने कहा कि  यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।

 


खेतिहर भगवान सिंह परमार  के मुताबिक सोयाबीन की फसल के लिए इस समय पर्याप्त नमी बेहद आवश्यक है। समय पर बारिश नहीं होने की स्थिति में उत्पादन में गिरावट आ सकती है। ऐसे में किसानों की निगाहें अब बारिश पर टिकी हुई हैं। उनके अनुसार यदि अगले चार से पांच दिनों के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल को गंभीर नुकसान हो सकता है। कई क्षेत्रों में दोबारा बुवाई की नौबत भी आ सकती है, जिससे खेती की लागत बढ़ जाएगी।

 


 

व्यापारी संजीव जैन के  अनुसार बताया कि समय पर बुवाई के बाद फसल अच्छी स्थिति में थी, लेकिन अब बारिश नहीं होने से खेत सूखने लगे हैं। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और पौधे सूखने लगे हैं। उनका कहना है कि नमी की कमी के कारण इल्ली और तना मक्खी जैसे कीटों का खतरा भी बढ़ गया है। पर्याप्त नमी नहीं होने से कीटनाशकों का प्रभाव भी कम हो सकता है, जिससे किसान दवा के छिड़काव को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।


 
सूख रहे सोयाबीन-धान के खेत 
 जून में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश और जुलाई में भी अपेक्षित वर्षा नहीं होने से खरीफ की प्रमुख फसलें सोयाबीन और धान संकट में हैं। लगातार तेज धूप और नमी की कमी के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं,जबकि धान की नर्सरियां सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। किसानों के अनुसार कई स्थानों पर किसानों को सूख चुकी सोयाबीन की फसल में रोटावेटर चलाकर दोबारा बुवाई की तैयारी करनी पड़ रही है। इससे किसानों पर बीज, खाद और मजदूरी का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।


विशेषज्ञों की सलाह
इस बीच कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिनके पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे मिनी स्प्रिंकलर के माध्यम से हल्की सिंचाई कर खेतों में नमी बनाए रखें। साथ ही डोरा चलाकर नमी संरक्षण करें और फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। उन्होंने किसानों को खरपतवारनाशी और कीटनाशक का एक साथ मिश्रण बनाकर छिड़काव नहीं करने की भी हिदायत दी है, ताकि फसल पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।