एवीएस न्यूज.भोपाल


मध्यप्रदेश में छोटे व्यापारियों और पारंपरिक रिटेल कारोबार पर बढ़ते दबाव को लेकर फेडरेशन ऑफ रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआरएआई) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन की मध्य प्रदेश इकाई द्वारा अवैध व्यापार का सामना विषयक पर सेमिनार आयोजित किया। जिसमें  अवैध व्यापार, नकली उत्पादों की बढ़ती बिक्री और ई-कॉमर्स एवं क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की प्रिडेटरी प्राइसिंग को रिटेल क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बताया गया। सेमिनार में रिटेलर्स, व्यापारी संगठनों और नीति निर्माताओं ने भाग लेते हुए कहा कि बाजारों में नकली उत्पादों, गैर-कानूनी वितरण नेटवर्क और मानकों का पालन न करने वाले सामानों का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है।

इसके साथ ही कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा भारी छूट, फ्लैश सेल्स और आक्रामक मूल्य निर्धारण की रणनीतियों ने छोटे दुकानदारों और पारंपरिक व्यापारियों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा कर दी है।

 

कार्यक्रम में भाजपा के भोपाल जिला अध्यक्ष रवींद्र याति, भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आरजी द्विवेदी, नगर निगम भोपाल के एमआईसी सदस्य आरके बघेल तथा स्वतंत्र अधिवक्ता एवं विधिक सलाहकार उमेश द्विवेदी सहित विभिन्न व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


वक्ताओं ने कहा कि क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने उपभोक्ताओं को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराई हैं, लेकिन इसके साथ ही नकली और गैर-कानूनी उत्पादों की पहुंच भी बढ़ी है। खाद्य सामग्री, किराना उत्पाद, पर्सनल केयर आइटम, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रीमियम मोबाइल फोन तक कुछ ही मिनटों में ग्राहकों तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के लिए असली और नकली उत्पादों की पहचान करना कठिन होता जा रहा है।

सेमिनार में यह भी कहा गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कमजोर निगरानी व्यवस्था और उपभोक्ताओं की कम कीमतों की बढ़ती चाहत का फायदा उठाकर अवैध कारोबारी नकली और गैर-मानक उत्पादों को बाजार में उतार रहे हैं। इससे जहां उपभोक्ताओं की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, वहीं वर्षों से विश्वास और गुणवत्ता के आधार पर कारोबार कर रहे छोटे दुकानदारों की आजीविका भी संकट में पड़ रही है।

 


 

 छोटे रिटेलर और किराना स्टोर स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ 
पथ विक्रेता एकता संघ, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष रत्नेश उपाध्याय ने कहा कि छोटे रिटेलर और किराना स्टोर स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रिडेटरी प्राइसिंग, भारी डिस्काउंट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का अनियंत्रित विस्तार और नकली सामान का बढ़ता प्रसार निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को खत्म कर रहा है तथा लाखों छोटे व्यापारियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। प्रतिभागियों ने कहा कि छोटे व्यापारी सीमित मुनाफे और अधिक जवाबदेही के साथ कारोबार करते हैं, जबकि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स आक्रामक छूट और विस्तार रणनीतियों के जरिए बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। इससे पारंपरिक व्यापार मॉडल पर गंभीर असर पड़ रहा है।
 

समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की
मध्य प्रदेश के लगभग दो लाख स्ट्रीट वेंडर्स, किराना दुकानदारों और पारंपरिक रिटेलर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने सरकार से मजबूत नियामकीय निगरानी, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नीतियां और छोटे व्यापारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही ऑनलाइन रिटेल इकोसिस्टम से अवैध और नकली उत्पादों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की गई।

सेमिनार का समापन इस सामूहिक अपील के साथ हुआ कि सरकार, उद्योग जगत और सभी संबंधित पक्ष भारत की पारंपरिक उद्यमशीलता संस्कृति और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं, क्योंकि यही वर्ग रोजगार सृजन, स्थानीय व्यापार और आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।