एवीएस न्यूज. मुंबई


 भारत में इस्पात उत्पादन का लक्ष्य तेजी से बढ़ रहा है। यदि ब्लास्ट फर्नेस मार्गों में उपयोग होने वाली तकनीकों को उन्नत नहीं किया गया, तो भविष्य में ये 'स्ट्रैंडेड एसेट्स' (निष्क्रिय संपत्तियां) बन सकती हैं। इसलिए पायलट प्रोजेक्ट्स से लेकर उन्हें वास्तविक स्तर पर लागू करने के चक्र में निवेश बढ़ाना महत्वपूर्ण है। यह बात कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री का सीआईआई-आईटीसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा  शुरू किए गए बहु-हितधारक मंच सारथ के लांच अवसर पर संबोधित करते हुए कौशिक चटर्जी, कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी टाटा स्टील ने कही।

उन्होंने भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने के लिए जलवायु लचीलेपन (क्लाइमेट रेजिलिएंस) को अत्यंत आवश्यक माना है। 


इस पहल के तहत देश के कई प्रमुख औद्योगिक समूह एक साथ आए हैं, जिनमें आईटीसी लिमिटेड, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप, आदित्य बिड़ला ग्रुप, महिंद्रा ग्रुप, जेएसडब्ल्यू ग्रुप, अडाणी सीमेंट, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा मोटर्स, डीसीएम  श्रीराम, मैरिको, टाटा पावर, वेदांता लिमिटेड और हिंदुस्तान जिंकसहित अन्य कंपनियां शामिल हैं।

कार्यक्रम में जमशेद एन. गोदरेज ने कहा कि सीआईआई-सार्थ विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर व्यावहारिक जलवायु समाधानों को बढ़ावा देगा और व्यवसायों व समुदायों के लिए दीर्घकालिक लचीलापन विकसित करने में मदद करेगा। उनका मानना है कि उद्योगों, सरकार और वित्तीय संस्थानों के बीच मजबूत तालमेल और सहयोग के बिना भविष्य की चुनौतियों से निपटना संभव नहीं है। 


 कौशिक चटर्जी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवसाय और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है।

उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि जलवायु परिवर्तन उद्योगों को प्रभावित करेगा या नहीं, बल्कि यह है कि कंपनियां अपनी परिचालन व्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और समुदायों में कितनी तेजी से लचीलापन विकसित कर पाती हैं। ऐसे समय में सारथ का उद्देश्य साझेदारी, ज्ञान-साझाकरण और व्यावहारिक समाधानों के माध्यम से जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देना है।

यह पहल विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को जलवायु जोखिम संबंधी जानकारी, अनुकूलन उपकरण, नई तकनीक और वित्तीय संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने में सहायता करेगी, जिससे सतत और लचीले आर्थिक विकास को गति मिल सके।