एवीएस न्यूज..भोपाल


 मार्च -अप्रैल 2026 में बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे मध्यप्रदेश सहित पड़ोसी प्रमुख उत्पादक राज्यों में 10-20 फीसदी और कहीं-कहीं 40  फीसदी तक उत्पादन प्रभावित होने की आशंका खबर है। साथ ही गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। जिससे किसानों को इसे सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार गेहूं खरीदी मानकों में ढील दे सकती है।


भोपाल ग्रेन मर्चेंट एंड ऑयल सीड्स एसोसिएशन के प्रवक्ता और गेहूं कारोबारी संजीव जैन के अनुसार अप्रैल माह की शुरुआत से बीते दो दिनों तक हुई लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। रुक-रुक कर बेमौसम बारिश ने रबी सीजन की तैयार खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसल को बर्बाद किया।  सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि मूंग, उड़द, मक्का और टमाटर जैसी अन्य फसलें भी इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गई हैं।

 

भोपाल कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष भागीरथ पाटीदार ने कहा कि किसानों ने फसलों को बड़ी मेहनत और लागत से तैयार किया था, लेकिन मौसम की मार ने सब कुछ तबाह कर दिया। पाटीदार ने कहा कि खेतों में फसल गिरने, दानों के सिकुड़ने और दानों की चमक कम होने की शिकायतें सामने आई हैं। गेहूं के उत्पादन में 5 से 10 फीसदी गिरावट आने का अंदेशा है। 


गौरतलब है कि सरकार ने 12.02 करोड़ टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन 9 राज्यों के 111 जिलों में नुकसान की रिपोर्ट के बाद वास्तविक उत्पादन इस अनुमान से कम रहने की आशंका बढ़ गई है।  

 

इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से अब तक 2.49 लाख हेक्टेयर में खड़ी रबी फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिसमें सबसे अधिक गेहूं की खेती प्रभावित हुई है। हालात को देखते हुए कई राज्यों ने फेयर एवरेज क्वालिटी मानकों में ढील की मांग की है, ताकि प्रभावित गेहूं की भी सरकारी खरीद संभव हो सके और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। हालांकि इस बीच केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद के लिए गुणवत्ता मानकों में ढील दी है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना आना अभी बाकी है।