होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुला, भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति में विविधता और लचीलापन बना नई प्राथमिकता: एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी
एवीएस न्यूज. नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में राहत के संकेत मिले हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य होने और तेल-गैस भंडारों को फिर से भरने में अभी समय लगेगा।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के ताजा विश्लेषण में कहा गया है कि हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखला, लचीला बुनियादी ढांचा और रणनीतिक स्रोतों तक पहुंच बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
नई दिल्ली में आयोजित एक गोलमेज बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता ही दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की कुंजी होगी।
तेल आपूर्ति में ऐतिहासिक बाधा, फिर भी कीमतों में सीमित असर
विश्लेषण के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण खाड़ी क्षेत्र में तरल ईंधन उत्पादन में प्रतिदिन लगभग 15 मिलियन बैरल की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद चीन और जापान द्वारा कच्चे तेल के आयात में कटौती, अमेरिका से बढ़े निर्यात तथा वैश्विक स्तर पर मांग प्रबंधन के चलते तेल कीमतों में अपेक्षा से कम उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी में तेल बाजार, ऊर्जा एवं मोबिलिटी अनुसंधान प्रमुख और उपाध्यक्ष जिम बुरखार्ड ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधाओं में से एक रहा है। उन्होंने कहा कि कीमतों की सीमित प्रतिक्रिया आश्चर्यजनक रही, लेकिन यदि तेल उत्पादन और आपूर्ति में सुधार शुरू भी हो जाए तो वैश्विक स्टॉक को सामान्य स्तर पर आने में समय लगेगा। ऐसे में आने वाले महीनों में कीमतों पर दोबारा दबाव बन सकता है।
भारत के लिए अपस्ट्रीम निवेश और विविधीकरण अहम
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अपस्ट्रीम ऊर्जा बाजार अब संसाधन सुरक्षा, पोर्टफोलियो विविधीकरण और अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत के लिए भी ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा अब केवल आयात तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिसंपत्तियों तक पहुंच और आपूर्ति स्रोतों के विस्तार से जुड़ गया है।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के कार्यकारी निदेशक (अपस्ट्रीम ऊर्जा) निक शर्मा ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों के लिए स्पष्ट संदेश देती हैं कि भविष्य में लचीलापन ही सबसे महत्वपूर्ण मानक होगा। उन्होंने कहा कि केवल कम लागत या बड़े उत्पादन की बजाय स्थिर संसाधनों तक पहुंच, परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन और विविधीकृत आपूर्ति पोर्टफोलियो को अधिक महत्व दिया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा का नया मंत्र: लचीलापन
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया संकट ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार अब केवल उत्पादन क्षमता पर निर्भर नहीं रह सकते। आपूर्ति स्रोतों का विस्तार, वैकल्पिक व्यापार मार्गों का विकास और रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाना भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक होगा। भारत जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों के लिए यह अवसर भी है और चुनौती भी, जहां दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति में लचीलापन अब केंद्रीय भूमिका निभाने जा रहा है।






