भारत निर्वाचन आयोग के उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुरभि तिवारी ने कहा: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रत्येक नागरिक की करता है वास्तविक उपस्थिति सूची में सुनिश्चित
आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया को पारदर्शी और जनहितैषी बनाने उठाए कई कदम
एवीएस न्यूज .भोपाल
भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा देश के 12 राज्यों में दूसरे चरण का एसआईआर अर्थात मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। एसआईआर को लेकर आम आदमी के मन में कई तरह की जिज्ञासाएं और चिंताएं हैं। लोग सोच रहे हैं कि अचानक घर-घर फॉर्म बांटने, जानकारी लेने और बार-बार सत्यापन करने की जरूरत क्यों पड़ गई है और यह सब आखिर चल क्या रहा है। आम वोटर की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं उसका नाम मतदाता सूची से हट न जाए, खासकर तब जब बीएलओ दस्तावेज नहीं ले रहा। बहुत से लोग उलझन में हो सकते हैं कि बिना दस्तावेज दिए उनकी पहचान कैसे सुनिश्चित होगी और क्यों नए फॉर्म, नई फोटो और नई घोषणाएं मांगी जा रही हैं। कुल मिलाकर आम आदमी के मन में यह मिश्रित भावना है कि यह हो क्या रहा है?, कहीं मेरा नाम हट न जाए और साथ ही यह उम्मीद भी कि इस अभियान से मतदाता सूची अधिक सही, साफ और अद्यतन हो जाएगी और अंतत: उसका वोट सुरक्षित रहेगा।

इस संदर्भ में विशेष गहन पुनरीक्षण करने के पश्चात संपूर्ण जानकारी देते हुए उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती सुरभि तिवारी स्पष्ट कर लोगों की जिज्ञासाओं को दूर किया।
तिवारी ने कहाकि भारत जैसे बड़ी जनसंख्या वाले और विविधता से परिपूर्ण राष्ट्र में जहां प्रत्येक नागरिक का मत ही लोकतंत्र का मूल आधार है, इस मत का सही महत्व तब ही हो सकता है, जब मतदाता सूची शुद्ध, अद्यतन और समावेशी हो। दीर्घ अंतराल के बाद शहरीकरण, प्रवासन, मृतकों के नाम, दोहरे पंजीकरण, अशिक्षा, असमान पहुंच तथा तकनीकी व्यवधानों के कारण मतदाता सूची में त्रुटियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसी कारण भारत निर्वाचन आयोग समय-समय पर विशेष गहन पुनरीक्षण कराता है, ताकि प्रत्येक नागरिक की वास्तविक उपस्थिति सूची में सुनिश्चित की जा सके।

इस प्रकार अंतिम एसआईआर 21 साल से अधिक पहले हुआ था 2002-2004 में
उन्होंने कहाकि विधि के अनुसार, मतदाता सूची को संशोधित किया जाना चाहिए। 1951 से 2004 तक 8 बार एसआईआर किया जा चुका है । मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और झारखंड में अंतिम एसआईआर 1 जनवरी 2003 को हुआ था, जबकि पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों, महाराष्ट्र आदि में अंतिम गहन पुनरीक्षण 1 जनवरी 2002 को संपन्न हुआ था। कुछ राज्यों जैसे असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड में यह 1 जनवरी 2005 को आयोजित हुआ था। इस प्रकार अंतिम एसआईआर 21 साल से अधिक पहले 2002-2004 में किया गया था। इन तिथियों का उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके आधार पर यह पता चलता है कि वर्षों से कहो गहन सत्यापन नहीं हुआ और कितनी आवश्यकता है कि 2025-26 का यह एसआईआर अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए। प्रथम चरण में बिहार में संपन्न होने के बाद अब दूसरे चरण में 12 राज्यों में भी एस आई आर का सुचारु रूपसे संचालन हो रहा है। वर्तमान विशेष पुनरीक्षण 1 जनवरी 2026 की योग्यता तिथि के आधार पर आयोजित किया जा रहा है।
विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य
निर्वाचक नामावली का घर-घर जाकर वास्तविक भौतिक नामांकन करना। इसके अंतर्गत बूथ स्तर अधिकारी सीधे प्रत्येक घर पहुंचकर मतदाता की वास्तविकता, पते, पहचान, निवासऔर पात्रता की पुष्टि करते हैं। यह प्रक्रिया सामान्य संक्षिप्त पुनरीक्षण से कहीं अधिक व्यापक और सघन होती है, क्योंकि इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी पात्र नागरिक सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति शामिल न हो। बीएलओ द्वारा पहले से प्रिंट फॉर्म प्रत्येक मतदाता को दिया जाता है, जिसमें मतदाता का नाम, ईपिक नंबर, पता, मतदान केंद्र, विधानसभा क्षेत्र तथा फोटो जैसी जानकारी पहले से मुद्रित रहती है। मतदाता को यह जानकारी जाँचकर, आवश्यक संशोधन सहित को बीएलओ लौटा देना होता है। ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा भी उपलब्ध है और ऐसे फॉर्म बीएलओ के मोबाइल ऐप पर स्वत: प्राप्त हो जाते हैं, जिनका सत्यापन घर-घर भ्रमण के दौरान किया जाता है।
बीएलओ घर-घर भ्रमण के दौरान किसी भी मतदाता से कोई भी दस्तावेज एकत्र नहीं करेगा
इस एसआईआर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बीएलओ घर-घर भ्रमण के दौरान किसी भी मतदाता से कोई भी दस्तावेज एकत्र नहीं करेगा। बिहार में हुए एसआईआर और वर्तमान में 12 राज्यों में चल रहे एसआईआर के बीच सबसे बड़ा और मूल अंतर यही है। दस्तावेज केवल तभी मांंगे जाएंगे जब प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित हो जाए और ईआरओ किसी विवरण की पुष्टि के लिए औपचारिक नोटिस जारी करें। बीएलओ को घर-घर भ्रमण के दौरान फार्म -6 औ रघोषणा पत्र साथ रखना आवश्यक है, ताकि यदि कोई नया मतदाता जुडऩा चाहे या कोई व्यक्ति राज्य के बाहर से स्थानांतरण पर आया हो, तो उसे तत्काल फॉर्म उपलब्ध कराया जा सके। फार्म -6 के साथ घोषणा-पत्र देना अनिवार्य है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि आवेदक ने किसी भी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त नहीं की है और उसका नाम किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र या संसदीय क्षेत्र में दर्ज नहीं है।
गृह भ्रमण 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक निर्धारित
गृह भ्रमण 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में बीएलओ प्रत्येक मतदाता से संपर्क के लिए कम से कम तीन बार जाएगा। यदि कोई मतदाता उपलब्ध नहीं होता, तो बीएलओ पड़ोसियों से तथ्य संग्रह कर उसे अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत्यु या डुप्लिकेट श्रेणी में चिह्नित कर सकता है। जिन मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं आते, उनकी सूची पंचायत भवन, शहरी निकाय, ब्लॉक कार्यालय तथा सीईओ वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, ताकि कोई भी नागरिक अपने या अपने परिवार से संबंधित स्थिति की पुष्टि कर सके।
9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक दावे व आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी
ड्राफ्ट रोल 9 दिसंबर 2025 को प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद 9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक दावे व आपत्तियाँ आमंत्रित की जाएँंगी। इसी अवधि में ईआरओ नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेजों की मांग कर सकता है और 31 जनवरी 2026 तक सुनवाई व निपटान प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची 07 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और उनके बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए)) को भी शामिल किया गया है , राज्य और जिला स्तर पर राजनीतिक दलों और बीएलए की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं । राजनीतिक दल जमीनी स्तर पर मतदाताओं की वास्तविक स्थिति को जानते हैं, इसलिए उनके बीएलए बूथ-स्तर पर सक्रिय भूमिका देकर यह सुनिश्चित भी कर रहे है कि नाम जोडऩे, हटाने या संशोधन जैसी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार का पक्षपात या त्रुटि नहीं हुई है।
मोहल्ला-वार सूचना अभियान जैसे प्रयासों से मतदाताओं को किया जा रहा जागरूक
भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया को पारदर्शीजन-हितैषी बनाने और भी कई कदम उठाए हैं, राष्ट्रीय ,राज्य और जिला स्तर पर हेल्पलाइन, कॉल-सेंटर, हेल्प डेस्क,आम नागरिक के लिए सरल गाइडलाइन, सोशल मीडिया जागरूकता और नियम को सरल भाषा में समझाने वाले परिपत्र जारी किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी मतदाता के मन में अनावश्यक शंका न रहे। कई जिलों में सहायता काउंटर और समन्वय टीमें पंचायत भवन, नगर निकाय कार्यालय, तहसील और ब्लॉक कार्यालय और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर भी लगाए गए हैं। इसके अलावा स्वीप कार्यक्रम, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता, स्थानीय रेडियो-एफएम, सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सऐप समूह, पंचायत-स्तरीय बैठकें और मोहल्ला-वार सूचना अभियान जैसे प्रयासों से मतदाताओं को जागरूक किया जा रहा है । विशेष ध्यान वृद्ध, दिव्यांग, प्रवासी मजदूर, अशिक्षित और पीवीटीजी जैसे समुदायों पर दिया गया है, ताकि किसी भी कारणवश ये मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। बीएलओ ऐप, पोर्टल और ई सिनेट जैसे डिजिटल माध्यमों ने पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया को तेज, कुशल और पारदर्शी बना दिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने तकनीकी सुधारोंके साथही मतदाता, हित को केंद्र में रखते हुए एक सहभागितापूर्ण और भरोसेमंद वातावरण तैयार किया है जो कि लोकतंत्र के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अंतत: विशेष गहन पुनरीक्षणपात्र मतदाताओं को ही मताधिकार के माध्यम से न केवल निष्पक्ष और समावेशी चुनावों का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को वास्तविक धरातल पर स्थापित करता है। जब प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में होता है और प्रत्येक अपात्र व्यक्ति को समय रहते हटाया जाता है, तभी जनता के द्वारा जनता के लिए शासन की भावना सच्चे अर्थों में साकार होती है।

