भोपाल। हीरा पहनाने के साथ अब लोग दांतों में हीरा जड़वा रहे है। नवरात्र में  गरबे धूम में अपने सौंदर्य को निखारने के लिए लोग अपने दांतों में हीरा जड़वा रहे हैं और यह संभव हो रहा है एमपी नगर, बोर्ड ऑफिस चौराहे के समीप स्थित सांची काम्पलेक्स में और आनंद नगर, हथाईखेड़ा रोड़ स्थित  सर्वसुविधायुक्त ‘सहगल हॉस्पिटल एवं डेंटल ट्रामा सेंटर पर।  

 


 ‘सहगल हॉस्पिटल एवं डेंटल ट्रामा सेंटर के डॉ.रितेश सहगल और डॉ.हरप्रित सहगल जो मुख और दंत रोग चिकित्सक है बताते हैं कि हीरा अब न सिर्फ आभूषण और अंगूठी के रूप में पहना जा रहा है बल्कि सौंदर्यता बढ़ाने लोग अपने दांतों में भी हीरा जड़वा रहे हैं अत: हीरा लगाने का यह कार्य एवीएस डेंटल क्लीनिक में सुचारू ढंग से किया जा रहा है। श्री सहगल बताते है कि इस डेंटल क्लीनिक में अकल दांड निकलवाना, मसूड़ों में खून आना, दांतों में मसाला भरना, दांतों में कीड़े लगना, आडे-तेडे दांत होना, पूरी बत्तीसी बनाना, मुंह से बदबू आना, मुंह में छाले होना, दांतों की नस का इलाज, दांतों में डायमंड लगना, फिक्स्ड दांत लगाना,जबड़े के फैक्चर एवं मुख की गठान का इलाज नई तकनीक द्वारा किया जा रहा है इसके साथ ही दंत रोग के लिए ट्रीटमेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। श्री सहगल बताते हैं कि नवरात्र पर्व के चलते छात्र-छात्राओं को दांतों का ट्रीटमेंट या हीरा जड़वाने पर 10 प्रतिशत विशेष डिस्काउंट दिया जाएगा।   


- शरीर पर नहीं, दांतों पर टैटू
डॉ. रितेश सहगल ने बताया कि युवाओं ने एक नया दौर शुरू है। लोग दांतों पर टैटू बनवाने के लिए हमारे यहां पहुंचे रहे हैं। अत: पहले जहां शरीर में टैटू बनते थे लेकिन अब दांतों पर टैटू बनवाया जा रहा है कि जिस डेंटल टैटू या टूथ टैटू कहते हैं। अत: यह सुविधा हमारे सहगल हॉस्पिटल एवं डेंटल ट्रामा सेंटर पर उपलब्ध है। 
 - बेसल इंप्लांट शुरू : अब कुछ घंटों में ही नया दांत  
मरीजों को नया दांत लगवाने के लिए अब घंटों इंतजार नहीं करना होगा।  सहगल हॉस्पिटल एवं डेंटल ट्रामा सेंटर में अब 24 घंटों के भीतर ही दांत लग जाएंगे। इसके लिए डॉक्टरों ने बेसल इंप्लांट शुरू किया है। जिसे कार्टिकल बोन भी बोलते है। डॉ. रितेश सहगल के अनुसार बेसल इंप्लांट नई तकनीक है, जिसकी कई विशेषताएं हैं।  खास बात ये है कि बेसल इंप्लांट के जरिए जबड़ों के उस हिस्से में भी दांत लगाया जा सकता है, जहां हड्डी न हो। किसी भी इंप्लांट के लिए जबड़ों में हड्डी की जरूरत होती है, जिस पर ग्राफ्ट लगा कर दांत लगाए जाते हैं।


- मरीजों की सुविधा के लिए बेसल इंप्लांट
सहगल हॉस्पिटल एवं डेंटल ट्रामा सेंटर के डॉक्टर सहगल ने बताया कि पहले कन्वेंशनल इंप्लांट के जरिए दांत लगाया जाता था, जिसमें करीब चार से पांच महीने का समय लगता था। मरीजों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसके बाद इंप्लांट लगाया जाता था। वहीं बेसल इंप्लांट में दांत जल्दी लगाए जा सकते हैं और खर्च भी कम आता है। बेसल इंप्लांट के जरिए 24 घंटे के अंदर ही दांत लगाया जा सकता है, जो कि कन्वेंशनल इंप्लांट में संभव नहीं है।