एवीएस न्यूज . भोपाल
पोलारिस स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के 31 छात्रों का दुनिया के दो सबसे प्रतिष्ठित ओपन-सोर्स प्रोग्राम्स गूगल के गूगल समर ऑफ कोड (जीएसओसी) 2026 और लिनक्स फाउंडेशन एलएफएक्स मेंटरशिप प्रोग्राम में चयन हुआ है।

चयनित छात्रों में मध्य प्रदेश के बालाघाट, असम के जोरहाट, ओडिशा के पुरी, पश्चिम बंगाल के रानाघाट, उत्तर प्रदेश के सादाबाद और कर्नाटक के मंड्या जैसे शहरों और कस्बों के छात्र शामिल हैं। इनमें से कई छात्र ऐसे परिवारों से आते हैं, जहां उनके माता-पिता किसान, छोटे व्यवसायी या सरकारी कर्मचारी हैं और वे अपने परिवार में तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाली पहली पीढ़ी हैं।


मध्य प्रदेश के बालाघाट से आने वाले और जीएसओसी के लिए चयनित छात्र हर्ष सोमणकर ने कहा मेरे परिवार में कोई भी तकनीकी क्षेत्र में काम नहीं करता, इसलिए बचपन में मुझे ऐसे अवसरों के बारे में बहुत कम जानकारी थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं वैश्विक इंजीनियरिंग समुदायों द्वारा संचालित परियोजनाओं के लिए कोड लिखूंगा या एक छात्र के रूप में इतनी बड़ी राशि का स्टाइपेंड प्राप्त करूंगा।

यह चयन मेरे लिए सिर्फ एक कार्यक्रम से कहीं बढ़कर है। इसने मुझे दिखाया है कि आप कहां से आते हैं, यह तय नहीं करता कि आप कितनी दूर तक जा सकते हैं।


इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए पोलारिस स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के सीईओ मुकुल रुस्तगी ने कहा ये चयन इस विश्वास को और मजबूत करते हैं कि विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग प्रतिभा भारत के हर हिस्से में मौजूद है। सही मार्गदर्शन, अवसर और वास्तविक समस्याओं पर काम करने का मौका मिलने पर छोटे शहरों के छात्र भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और सफलता हासिल कर सकते हैं।


पोलारिस के 18 छात्रों का चयन गूगल समर ऑफ कोड (जीएसओसी) 2026 के लिए हुआ है, जिसे दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी छात्र कोडिंग प्रोग्राम्स में गिना जाता है। इस वर्ष वैश्विक स्तर पर केवल 4.9 प्रतिशत आवेदकों का ही चयन हुआ। इसके अलावा, 13 छात्रों ने लिनक्स फाउंडेशन के एलएफएक्स मेंटरशिप प्रोग्राम में जगह बनाई है, जिसे तकनीकी उद्योग के सबसे सम्मानित ओपन-सोर्स मेंटरशिप कार्यक्रमों में माना जाता है। खास बात यह है कि एलएफएक्स के लिए चयनित 13 छात्रों में से 12 वर्तमान में स्नातक के पहले वर्ष में अध्ययन कर रहे हैं।


दोनों कार्यक्रमों के लिए चयनित छात्रों को लगभग 3,000 अमेरिकी डॉलर का स्टाइपेंड मिलेगा। वहीं, लिनक्स फाउंडेशन के ओपनएसएसएफ ट्रैक के लिए चयनित पोलारिस के एक छात्र को 6,000 अमेरिकी डॉलर का स्टाइपेंड प्राप्त होगा।


पारंपरिक इंटर्नशिप या कक्षा आधारित प्रोजेक्ट्स से अलग, इन दोनों कार्यक्रमों में छात्रों को ऐसे प्रोडक्शन-ग्रेड कोड पर काम करना होता है जो आज की डिजिटल दुनिया की बुनियादी ओपन-सोर्स तकनीकों का हिस्सा हैं। चयनित छात्र अंतरराष्ट्रीय मेंटर्स के साथ सीधे काम करेंगे और क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डेवलपर टूल्स, ब्लॉकचेन इकोसिस्टम तथा अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी प्लेटफॉर्म्स के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने में योगदान देंगे।


यह उपलब्धि पोलारिस स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी के ओपन-सोर्स योगदान, प्रैक्टिकल इंजीनियरिंग और इंडस्ट्री मेंटरशिप पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो छात्रों को अपने शैक्षणिक सफर की शुरुआत से ही वैश्विक तकनीकी इकोसिस्टम का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करता है।