एवीएस न्यूज.नई दिल्ली


  फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एफएसआईआई) ने डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर ) पर आयोजित एक सम्मेलन में अधिक संसाधन-कुशल खेती पद्धतियों की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

विशेषज्ञों ने कहा कि डीएसआर एक जलवायु-अनुकूल और संसाधन-कुशल विकल्प के रूप में उभर रहा है, जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय में सुधार करने की क्षमता रखता है। एफएसआईआई ने “सस्टेनेबल और लाभकारी धान उत्पादन के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस विषय पर अपने सम्मेलन का दूसरा संस्करण नई दिल्ली के एनएएससी  कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया।

इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया।  फेडरेशन के अध्यक्ष और सवाना सीड्स के सीईओ एवं एमडी अजय राणा ने कहाकि पंजाब में भूजल दोहन वार्षिक पुनर्भरण का लगभग 156 फीसदी तक पहुंच चुका है, जबकि हरियाणा में यह लगभग 137 फीसदी है, जो जलभंडारों पर गंभीर दबाव को दर्शाता है। एक किलोग्राम चावल उत्पादन के लिए लगभग 3,000 से 5,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जिससे धान सबसे अधिक पानी-खपत वाली फसलों में शामिल है।