मक्का पिछले साल से 1 हजार रुपए तक नीचे, कम भाव मिलने से किसान बेहाल
मंडियों में अभी भी बंपर आवक, लेकिन भाव 1400 से 1550 रुपए क्विंटल के दाम मिल रहे
एवीएस न्यूज..भोपाल
मक्का उत्पादक किसानों के लिए 2025 का साल निराशाजनक रहा है। मंडियों में मक्के के दाम पिछले साल की तुलना में 850 -1000 प्रति क्विंटल तक नीचे गिर गए हैं। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,400 प्रति क्विंटल के मुकाबले मध्यप्रदेश की मंडियों किसानों को 1400 से 1550 रुपए क्विंटल के दाम मिल रहे है।

बाजार जानकार और मक्का कारोबारी मनीष मरेले ने बताया कि लीकर फैक्ट्रियों द्वारा नगद में 1550 रुपए और उधारी में1700 रुपए का भाव अच्छे माल का दिया जा रहा है। व्यापारी मनीष के अनुसार मक्का उत्पादक किसान बेहाल है। बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश की मंडियों में मौजूदा समय में मक्का की बंपर आवक है लेकिन भाव कम होने से किसानों को उत्पादन लागत से भी कम दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ा रहा है।
बाजार जानकार और मक्का कारोबारियों ने व्यापारी फसल में अधिक नमी होने का हवाला देकर किसानों से कम दाम पर माल खरीद रहे हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के बावजूद घरेलू मक्का की मांग में कमी और अमेरिका से सस्ते मक्के के आयात की संभावना ने कीमतों पर दबाव डाला है। मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में समय पर सरकारी खरीद केंद्र न खुलने से बिचौलियों ने फायदा उठाया है।
उन्होंने ने केंद्र सरकार हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहाकि सरकार मक्का का घरेलू उत्पादन बढ़ाने का जहां हर संभव प्रयास कर रही है तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भाव मिले इसके लिए भी हर संभव प्रयास करना चाहिए। कारोबारी बताते है कि बेशक सरकार प्रत्येक साल एथनॉल की कीमतों का निर्धारण करती है ,लेकिन एथनॉल निर्माताओं के लिए किसानों से एमएसपी पर मक्का खरीदना अनिवार्य वे प्रचलित बाजार मूल्य पर ही इसकी खरीद करते हैं। मगर मौजूद समय में इथनॉल निर्माताओं के पास मक्के का भरपूर स्टॉक जमा है। जिस कारण भी मक्का के भाव का बल नहीं मिल पा रहा है।
बाजार जानकार बताते है कि दिलचस्प तथ्य यह है कि बिजाई क्षेत्र की दृष्टि से भारत दुनिया में चीन, अमरीका और ब्राजील के बाद मक्का का चौथा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है ,जबकि उत्पादन में पांचवें नंबर पर रहता है। उपरोक्त तीन देशों के साथ-साथ अर्जेंटीना में भी भारत से ज्यादा मक्का का उत्पादन होता है। भारत में मक्का की बिजाई तो विशाल क्षेत्रफल में होती है मगर इसकी औसत उपज दर काफी नीचे रहती है जिससे अपेक्षित उत्पादन प्राप्त नहीं हो पाता है। हाल के वर्षों में उपज दर में कुछ सुधार आया है ।
भारत में खाद्य उद्देश्य के साथ-साथ पशु आहार, पॉल्ट्री फीड, स्टार्च निर्माण एवं एथनॉल आदि उद्योग में मक्का की खपत बड़े पैमाने पर हो रही है। इसकी मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है। मक्का का घरेलू उत्पादन इस बार 450 लाख टन पहुंचने का अनुमान है जबकि इसमें निरंतर वृद्धि की जरूरत है।

