एवीएस न्यूज.नई दिल्ली 


अग्रणी टेक्नोलॉजी एंटरप्राइस एचएफसीएल लिमिटेड ने उच्च मूल्य वाले एयरोस्ट्रक्चर, एयरोनॉटिक्स एवं रक्षा विनिर्माण में दीर्घकालीन वृद्धि को गति देने के लिए एक विस्तार योग्य प्लेटफॉर्म तैयार करते हुए अपने रक्षा कारोबार का रणनीतिक विस्तार एवं एकीकरण करने की आज घोषणा की।

इस पहल से एयरोस्ट्रक्चर, एयरोनॉटिक्स, राडार सिस्टम्स और एडवांस्ड थर्मल वेपन साइट सॉल्यूशंस की पूरक क्षमताएं एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के नीचे आ जाएंगी जिससे भारत के तेजी से उभरते रक्षा पारितंत्र में एचएफसीएल की स्थिति और मजबूत होगी। इस विस्तार की प्रमुख बातों में से एक करीब 1,570 करोड़ रुपये का पुष्ट निर्यात ऑर्डर है।     

तालमेल स्थापित करने के लिए सामरिक एकीकरण 
एचएफसीएल अपनी अनुषंगी एचएफसीएल एडवांस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए इस समेकन को लागू करेगी जोकि विभिन्न रक्षा एवं एयरोस्पेस कारोबार के लिए वाहन के तौर पर काम करेगा। 

इस पहल के तहत एचएएसपीएल निम्नलिखित कार्य करेगी- 
·    एक इंजीनियरिंग एवं सटीक विनिर्माण कंपनी स्पाइरल ईएचएल इंजीनियरिंग लिमिटेड में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी लेगी जो बदले में डेफसिस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के एयरोस्ट्रक्चर एवं एयरोनॉटिक्स कारोबार का स्लंप सेल आधार पर अधिग्रहण करेगी। 
·    एक राडार टेक्नोलॉजी कंपनी राडेफ प्राइवेट लिमिटेड में एचएफसीएल की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी जिससे इसके देशज रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमता मजबूत होगी। 
·    एचएफसीएल के मौजूदा थर्मल वेपन साइट (टीडब्लूएस) कारोबार का अधिग्रहण करेगी

इन कदमों से एक लंबवत एकीकृत मंच का निर्माण होगा जिसका दायरा डिजाइन, प्रोटोटाइप, सटीक विनिर्माण एवं प्रणाली एकीकरण क्षमताओं तक फैला होगा और जिसमें एचएफसीएल की बहुलांश हिस्सेदारी होगी। 


एचएएसपीएल के पीछे रणनीतिक संदर्भ
भारत की रक्षा खरीद का परिदृश्य एक संरचनात्मक बदलाव से गुजर रहा है। मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी की तरफ सरकार के जोर और घरेलू खरीद के लिए 6.2 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट निर्धारित किए जाने एवं भारतीय एयरोस्पेस निर्यात को लेकर विश्व का भरोसा बढ़ने के साथ एक ऐसी समर्थ, टेक्नोलॉजी फर्स्ट कंपनी जो समयबद्ध तरीके से व्यापक स्तर पर निर्माण करे, के लिए अवसरों के द्वार खुले हैं।

एचएफसीएल को रक्षा सेवाओं के लिए मिशन महत्वपूर्ण नेटवर्कों में जटिल विनिर्माण के वर्षों के अनुभव का लाभ मिलेगा जो इसने अति मांग वाले क्षेत्रों में दूरसंचार ढांचा स्थापित कर हासिल किया है। इसका अनुशासित पूंजी आबंटन का ट्रैक रिकॉर्ड है और व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन की संगठनात्मक क्षमता है।  

मौजूदा ऑर्डर बुक 
 
वर्ग     मूल्य 
(करोड़ रुपये)    आय दृश्यता की प्रकृति        
पुष्ट निर्यात ऑर्डर बुक    1,570    Firm, executable orders       
पुष्ट घरेलू ऑर्डर     110    Firm, executable orders       
कुल पुष्ट ऑर्डर बुक    1,680         

एचएएसपीएलः रक्षा टेक्नोलॉजी के तीन स्तंभ

1.    एयरोस्ट्रक्चर एवं एयरोनॉटिक्स विनिर्माण

स्पाइरल की विनिर्माण क्षमता के एकीकरण के साथ एचएएसपीएल के पास एयरोस्ट्रक्चर एवं एयरोनॉटिक्स कार्यक्रमों के लिए सटीक कंपोनेंट विनिर्माण एवं उत्पाद असेंबली होगी। गुड़गांव और बेंगलुरु में प्रणामित इकाइयों और 1,570 करोड़ रुपये के पुष्ट निर्यात ऑर्डर बुक के साथ यह कारोबार एडवांस्ड विनिर्माण एवं वैश्विक एयरोस्पेस सप्लाई चेन के बीच परिचालन करता है। यह एक ऐसा क्षेत्र में जिसमें पात्र होने के लिए वर्षों लगते हैं और नए आपूर्तिकर्ताओं के लिए उच्च बाधाएं होती हैं। 
स्पाइरल अपना नाम बदलकर एचएफसीएल डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड या एचएफसीएल नाम के साथ कोई अन्य नाम रखने पर सहमत हो गई है जिसके लिए नियामकीय अधिकारियों की अनुमति लेनी होगी। एचएफसीएल के बोर्ड ने प्रिफिक्स के तौर पर एचएफसीएल का उपयोग करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने को भी मंजूरी दे दी है। 

2.    राडार एवं निगरानी प्रणालियां
रैडेफ प्राइवेट लिमिटेड (एचएफसीएल की मौजूदा अनुषंगी) के जरिए एचएएसपीएल भारतीय रक्षा पारितंत्र में पूर्ण देशज राडार टेक्नोलॉजी क्षमता लाएगी। ये सिस्टम्स जमीनी निगरानी, तटीय एवं समुद्री निगरानी, ड्रोन डिटेक्शन फोलिएज पेनिट्रेशन राडार और आरएफ जैमिंग टेक्नोलॉजी में फैला होगा जिससे भारत के सशस्त्र बलों की उच्चतम प्राथमिकता वाले इंटेलिजेंस और सुरक्षा जरूरतें पूरी होंगी। देशज राडार क्षमता एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है। 

3.    थर्मल वेपन साइट (टीडब्लूएस) सॉल्यूशंस
एचएफसीएल का टीडब्लूएस कारोबार रक्षा एवं सुरक्षा एप्लीकेशंस के लिए एडवांस्ड इलेक्ट्रो- ऑप्टिकल एवं इंफ्रारेड टारगेटिंग सॉल्यूशंस प्रदान करता है। मिशन महत्वपूर्ण, रात्रि में सक्षम और फील्ड में सिद्ध टीडब्लूएस सिस्टम सभी पैदल सेना, बख्तरबंद और विशेष बलों के प्लेटफॉर्म में आवर्ती आवश्यकता है। इस कारोबार को एचएएसपीएल को हस्तांतरित होने से इसी प्लेटफॉर्म पर राडार एवं एयरोनॉटिक्स क्षमताओं के साथ एक प्राकृतिक मल्टी सेंसर सिस्टम्स का निर्माण होगा। 

एचएएसपीएल का जोर महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय पर संप्रभु नियंत्रण से मेड इन इंडिया प्लेटफॉर्म एक नई स्थिति में होगा। रक्षा संचार के मौजूदा पोर्टफोलियो में इलेक्ट्रॉनिक्स फ्यूजेस, विभिन्न प्रकार के रेडियो संचार उपकरण, टेथर्ड ड्रोन और बीएमपी2 परियोजना का आधुनिकीकरण शामिल है जहां एचएफसीएल पांच छांटी गई कंपनियों में से है। 

इस घोषणा पर बोलते हुए एचएफसीएल के प्रबंध निदेशक महेंद्र नहाटा ने कहा, “एचएफसीएल एडवांस्ड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड का निर्माण, एचएफसीएल की सबसे महत्वपूर्ण पहल का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें भारत के लिए एक संप्रभु, टेक्नोलॉजी आधारित क्षमताओं के निर्माण के लिए रणनीतिक प्रतिबद्धता है। हम एक पुष्ट निर्यात ऑर्डर बुक, स्थापित कारोबार, देशज टेक्नोलॉजी और विनिर्माण संपत्तियों एवं संगठनात्मक क्षमता के साथ इसे क्रियान्वित कर रहे हैं। भारत के रक्षा स्वदेशीकरण एजेंडा में ऐसे निजी क्षेत्र के साझीदारों की जरूरत है जिनके पास कार्यक्रम क्रियान्वयन की विश्वसनीयता के साथ टेक्नोलॉजी हो एचएएसपीएल इस राष्ट्रीय प्राथमिकता और हमारे शेयरधारकों के लिए दीर्घकालीन मूल्य सृजन को लेकर हमारी प्रतिबद्धता है।” 

इस कंपनी की गुड़गांव और बेंगलुरु में विनिर्माण इकाइयां होंगी जिससे भारत के दो सबसे प्रतिष्ठित रक्षा और एयरोस्पेस प्रतिभा केंद्रों का लाभ उठाया जा सकेगा। इस लेनदेन संबंधी समझौते को 31 मई, 2026 को या इससे पूर्व क्रियान्वित करने का लक्ष्य है और वित्तीय समापन मौजूदा कैलेंडर वर्ष के भीतर किए जाने की संभावना है।  


 

न्यूज़ सोर्स : इस लेनदेन संबंधी समझौते को 31 मई, 2026 को या इससे पूर्व क्रियान्वित करने का लक्ष्य है और वित्तीय समापन