88 देशों के 45 हजार से अधिक विदेशी मरीज भी शामिल; डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड से उपचार का डेटा हो रहा तैयार
-  5,000 से अधिक डॉक्टर और 500 से ज्यादा वैज्ञानिकों के साथ काम कर रहा पतंजलि का नेटवर्क


  एवीएस न्यूज .हरिद्वार 
 जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, क्रॉनिक डिजीज और उम्र बढ़ने से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के बीच आयुर्वेद आधारित उपचार की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। पतंजलि के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उसके आयुर्वेदिक अस्पतालों, वेलनेस केंद्रों और चिकित्सालयों में 1.38 करोड़ से अधिक मरीजों का उपचार किया गया है। इनमें 88 से अधिक देशों के 45 हजार से ज्यादा विदेशी मरीज भी शामिल हैं। 
 पतंजलि के अनुसार यूरोप, मध्य-पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका सहित विभिन्न क्षेत्रों से मरीज उपचार और वेलनेस सेवाओं के लिए यहां पहुंचे हैं। संस्थान का दावा है कि विदेशी मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा के प्रति वैश्विक रुचि को दर्शाती है। पतंजलि अब अपने मौजूदा उपचार मॉडल को आगे बढ़ाते हुए ‘पतंजलि इंटीग्रेटेड हेल्थ मॉडल’ की दिशा में काम कर रहा है। इसमें योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, संतुलित आहार और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।


डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड से उपचार का डेटा
पतंजलि के अनुसार, उसके यहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों का डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। संस्थान का कहना है कि इससे मरीजों के उपचार, स्वास्थ्य स्थिति और फॉलोअप से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिल रही है। साथ ही अनुसंधान और उपचार पद्धतियों के मूल्यांकन के लिए भी इस तरह के डेटा का उपयोग किया जा रहा है। संस्थान के मुताबिक, उसके नेटवर्क में 5,000 से अधिक डॉक्टर और 500 से ज्यादा वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा योग के क्षेत्र में 10 लाख से अधिक वॉलेंटियर और एक लाख से ज्यादा नि:शुल्क योग कक्षाओं का भी दावा किया गया है।
 

इन राज्यों से सबसे ज्यादा मरीज
पतंजलि में देश के लगभग सभी राज्यों के अलावा विदेशों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र से आने वाले मरीजों की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में अधिक बताई गई है। पतंजलि वेलनेस नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, उपचार कराने वाले मरीजों में करीब 43 प्रतिशत महिलाएं और 57 प्रतिशत पुरुष हैं। वहीं लगभग 46 प्रतिशत मरीज 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं। संस्थान का कहना है कि इससे महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत मिलता है। पतंजलि का कहना है कि उसका वेलनेस मॉडल पारंपरिक चिकित्सा को व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की उस दिशा के अनुरूप है, जिस पर वैश्विक स्तर पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में संस्थान आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड और अनुसंधान से जोड़ने पर जोर दे रहा है।
-‘साक्ष्य आधारित आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा में लाना लक्ष्य’
पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, संस्थान का लक्ष्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा में स्थापित करना है। उनके मुताबिक डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड, अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से आयुर्वेद को वैज्ञानिक प्रमाणिकता देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि भारतीय ऋषि परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ऐसा समग्र स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने का प्रयास है, जो सुलभ और किफायती होने के साथ दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो। यह प्रयास भारतीय ‘विश्व कल्याण’ की अवधारणा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।


 योग और आयुर्वेद के साथ आधुनिक चिकित्सा का एकीकरण जरूरी’
स्वामी रामदेव के अनुसार, योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, संतुलित आहार और वैज्ञानिक उपवास आधारित जीवनशैली करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य और नई आशा का माध्यम बन रही है। उनका कहना है कि योग, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को एकीकृत कर ऐसा हेल्थ सिस्टम विकसित करने की जरूरत है, जो केवल बीमारी के उपचार तक सीमित न रहे, बल्कि व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली पर भी केंद्रित हो।
 आंकड़ों में पतंजलि का हेल्थ नेटवर्क
1.38 करोड़+ मरीजों का उपचार
57 फीसदी पुरुष और 43फीसदी महिलाएं
46 फीसदी मरीज 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के
99.7 फीसदी भारतीय मरीज
45 हजार+ विदेशी मरीज
88+ देशों से मरीज
5,000+ डॉक्टर
500+ वैज्ञानिक
10 लाख+ योग वॉलेंटियर
1 लाख+ नि:शुल्क योग कक्षाएं
15,000 से अधिक नि:शुल्क ओपीडी प्रतिदिन का दावा
500+ शोध पत्र