एवीएस न्यूज.ग्वालियर:
ग्वालियर की समृद्ध सांस्कृतिक और संगीत परंपरा में पले-बढ़े फिल्ममेकर परिवेश सिंह आज शहर के उन उभरते रचनात्मक नामों में शामिल हैं, जो विरासत और आधुनिक कहानी कहने की शैली के बीच एक सशक्त सेतु बना रहे हैं।
एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार में जन्मे परिवेश सिंह के जीवन में कला और सुरों की गूंज बचपन से रही है। उनके पिता एक सम्मानित संगीतकार हैं, जबकि उनकी माता एक ख्यातिप्राप्त शास्त्रीय गायिका हैं।

इस कलात्मक वातावरण ने उनमें भाव, लय और कथा के प्रति गहरी समझ विकसित की। अपने रचनात्मक सफर की शुरुआत उन्होंने रंगमंच से की, जहां देवदास और एक मुलाकात जैसे चर्चित नाट्य प्रस्तुतियों के लिए संगीत रचना कर उन्होंने सराहना हासिल की।
उनके जीवन का एक निर्णायक मोड़ तब आया, जब भोपाल में घटित एक दर्दनाक बलात्कार की घटना ने उन्हें गहराई से झकझोर दिया। इसी घटना से उनके निर्देशन में बने पहले वेब सीरीज़ नाइट स्कूल का विचार जन्मा।

वर्षों तक निर्देशकों के साथ काम करने और फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने के बाद परिवेश ने स्वयं निर्देशन की कमान संभाली और अपनी संवेदनशील सोच को पर्दे पर उतारा।उनकी प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। परिवेश की शॉर्ट फिल्म ओनाके ओबव्वा को प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए नामांकन मिला, यह बर्लिन शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में रनर-अप रही और न्यूयॉर्क इंटरनेशनल वीमेन फिल्म फेस्टिवल के सेमीफाइनल तक पहुंची। यह फिल्म अब फाइनल में चयनित हो चुकी है, जिसके परिणाम का इंतजार किया जा रहा है।
इसी कड़ी में उनकी नवीनतम शॉर्ट फिल्में गरिमा और रणभूमि हाल ही में मुंबई के प्रतिष्ठित IMPPA ऑडिटोरियम में प्रदर्शित की गईं। इस विशेष स्क्रीनिंग में फिल्म की कास्ट, क्रू, प्रदर्शक और कई वरिष्ठ फिल्म पत्रकार मौजूद रहे, जिन्होंने परिवेश की सामाजिक सरोकारों से जुड़ी और परिपक्व कहानी कहने की शैली की खुलकर प्रशंसा की।गरिमा में ईशिका झा, आदेश भारद्वाज, आर्ची सिंह और महिमा रायकर ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

यह फिल्म एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ महिला सब-इंस्पेक्टर की कहानी है, जो दूसरों के लिए आवाज़ उठाने का साहस रखती है, लेकिन जब अन्याय उसके साथ होता है, तो वह भीतर से संघर्ष करती है। फिल्म उसके डर से साहस तक के सफर को बेहद संवेदनशीलता से दर्शाती है और न्याय व्यवस्था पर एक अहम सवाल खड़ा करती है। 
वहीं रणभूमि में अक्षय खरोड़िया, आदेश भारद्वाज और सिद्धांत बद्धानी मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म मुंबई की ऑडिशन लाइनों में जूझते कलाकारों की सच्चाई को सामने लाती है। लंबे संघर्ष, टूटती उम्मीदों और फिर भी हार न मानने की जिद को दर्शाती यह कहानी उन तमाम सपने देखने वालों की “रणभूमि” को बयां करती है, जो हर दिन सिर्फ सपने जिंदा रखने के लिए लड़ते हैं। 
हर नए प्रोजेक्ट के साथ परिवेश सिंह ग्वालियर से निकलकर सामाजिक सरोकारों से जुड़ी सशक्त सिनेमा भाषा को मजबूती दे रहे हैं। परंपरा में रचे-बसे होते हुए भी आधुनिक विषयों को निडरता से उठाने वाले परिवेश सिंह आने वाले समय में ग्वालियर ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक महत्वपूर्ण नाम बनने की ओर अग्रसर हैं।