भोपाल । नीति आयोग ने जनाग्रह के साथ मिलकर सिटी डेटा ऐंड एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म (सीडीएपी) शुरू किया। यह भारत में शहरों के डेटा के लिए एक इंटीग्रेटेड प्लेटफ़ॉर्म हैनीति आयोग के नेशनल डेटा ऐंड एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म (एनडीएपी) पर छोटी माइक्रोसाइट, सीडीएपी का मकसद डेटा पर आधारित शहरी नीति निर्माण को बढ़ावा देना है

सीडीएपी प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए यहां क्लिक करें: https://www.citydata.org.in/

सीडीएपी की शुरुआत भोपाल में आयोजित नीति आयोग के डेटा फोरम 2025 के पहले सत्र में मध्य प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी,  अनुराग जैन ने की। नीति आयोग के प्रिंसिपल इकोनॉमिक एडवाइजर और प्रोग्राम डायरेक्टर,  अन्ना रॉय ने उद्घाटन संबोधन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जनाग्रह के सीईओ श्रीकांत विश्वनाथन ने इस प्लेटफॉर्म का परिचय दिया। उद्घाटन के अवसर पर वर्ल्ड बैंक के सीनियर इकोनॉमिस्ट थॉमस डेनियलविट्ज़ और मध्य प्रदेश सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) संजय कुमार शुक्ला भी मौजूद थे। आगंतुकों में राज्य के सीनियर अधिकारी, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, एकेडेमिया, रिसर्चर और इंटरनेशनल एक्सपर्ट भी शामिल थे।

आनंद अय्यर, चीफ़ पॉलिसी एंड इनसाइट्स ऑफिसर, जनाग्रह ने कहा: सीडीएपी हमारे शहरों की बिखरी हुई व्यवस्था में अलग-अलग जगहों पर पड़े डेटा को एक साथ लाएगा, ताकि लोगों की जीवन-गुणवत्ता बेहतर करने जैसे सामान्य लक्ष्य पूरे किए जा सकें। अलग-अलग डेटासेट्स को जोड़कर और उन्हें नक्शे पर दिखाकर जो उपयोगी जानकारी मिलती है, वही वास्तविक होती है और बेहतर फैसले लेने में मदद करती है।

2050 तक भारत की शहरी आबादी 80 करोड़ से ज़्यादा होने की उम्मीद है। शहर अभी देश की जीडीपी में 63% योगदान देते हैं, जो 2040 तक बढ़कर 75% होने का अनुमान है। भारत के शहरों को बेहतर तरह से आगे बढ़ाने और लोगों को अच्छी जीवन गुणवत्ता देने के लिए ज़रूरी है कि फैसले सटीक, भरोसेमंद और एक जगह जुड़े हुए डेटा के आधार पर लिए जाएँ।

इस समय शहरों से जुड़ा डेटा अलग-अलग विभागों, नगर निकायों और दूसरी एजेंसियों में बिखरा हुआ है।

सीडीएपी इस समस्या को हल करता है क्योंकि यह राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला और शहर समेत सभी स्तरों का डेटा एक जगह लाता है। सरकारी डेटा पर आधारित यह प्लेटफ़ॉर्म अलग-अलग क्षेत्रों, जगहों और समय के हिसाब से डेटा को आसानी से देखने और समझने की सुविधा देता है। सीडीएपी शहरों के विकास से जुड़े फैसले डेटा के आधार पर लेने में मदद करता है। यह शहरों की योजना बनाने और उनकी समस्याएँ समझने के लिए एक संपूर्ण और जगह-आधारित तरीके को बढ़ावा देता है, जिससे काम में पारदर्शिता, जिम्मेदारी, सबकी भागीदारी और टिकाऊपन बढ़ता हैं। सीडीएपी का लक्ष्य है कि समय के साथ इस प्लेटफ़ॉर्म पर ज़्यादा और गहराई वाला डेटा जुड़ता जाए जो ज़िले, शहर और वार्ड स्तर तक को समेटे हो। इससे एक मानक और भरोसेमंद शहरी डेटा तैयार होगा, जो आगे चलकर बेहतर योजना बनाने और सही फैसले लेने में मदद करेगा।

नेहा मल्होत्रा सिंह, जो जनाग्रह में सीडीएपी का नेतृत्व कर रही हैं, उन्होंने बताया कि: सिटी डेटा और एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म एक ऐसी व्यवस्था है जो भरोसेमंद, एक जैसी मानकों वाली, और जगह व समय के हिसाब से तुलना की जा सकने वाली वास्तविक स्थान-आधारित जानकारी को एक साथ लाती है। यह प्लेटफ़ॉर्म सरकार, शोधकर्ताओं और नागरिकों को शहरी डेटा को आसान और समझदार तरीके से इस्तेमाल करने की सुविधा देता है। इससे पूरे शहरी भारत में ज़्यादा सही और प्रभावी फैसले लेने की मजबूत नींव बनती है।

अन्ना रॉय, प्रिंसिपल इकोनॉमिक एडवाइज़र और प्रोग्राम डायरेक्टर, नीति आयोग, ने बताया कि: नेशनल डेटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म (एनडीएपी) को इस तरह बनाया गया है कि लोग भारतीय सरकारी डेटा को आसानी से खोज सकते हैं, उसे जोड़ सकते हैं, देख सकते हैं और डाउनलोड भी कर सकते हैं। सिटी डेटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म इसी आधार पर आगे बढ़ता है। यह एनडीएपी के अंदर एक अलग माइक्रोसाइट के रूप में शहरों से जुड़े मानकीकृत और जगह व समय के अनुसार तुलना किए जा सकने वाले डेटासेट एक जगह लाता है। शहरों के लिए ज़रूरी डेटा को और गहराई से उपलब्ध कराकर, और उसे नक्शे पर आसानी से देखने की सुविधा देकर, सीडीएपी एनडीएपी के इस लक्ष्य को आगे बढ़ाता है कि सरकार का डेटा सबके लिए आसान, समझने योग्य और इस्तेमाल करने लायक बने। ताकि भारत के विकास में इसका सही फायदा मिल सके।