नेटफ्लिक्स की ‘सारे जहाँ से अच्छा’ में विष्णु के नैतिक संघर्ष पर प्रतीक गांधी की राय
रिलीज़ होने के बाद से ही नेटफ्लिक्स की ‘सारे जहाँ से अच्छा’ सीरीज़ को उसकी रोमांचक कहानी और जासूसी की अलग तरह की प्रस्तुति के लिए खूब सराहा जा रहा है। दर्शक और आलोचक दोनों ही प्रतीक गांधी के शांत लेकिन दमदार अभिनय की तारीफ़ कर रहे हैं, जहाँ वे विष्णु का किरदार निभा रहे हैं। विष्णु एक खुफिया अधिकारी है, जो कर्तव्य और नैतिकता के बीच फंसा हुआ है। यह सीरीज़ जासूसी कहानियों को एक नया नज़रिया देती है, जहाँ बड़े खतरे और ड्रामा के साथ-साथ इंसानी कमजोरी और निजी संघर्ष को भी दिखाया गया है।
ज्यादातर फिल्मों में दिखाई जाने वाली जासूसों के विपरीत, विष्णु की पहचान उसके किए गए कामों से नहीं, बल्कि उन फैसलों से होती है जो वह नहीं करता, जिन लोगों की वह जान नहीं लेता, जिन नियमों को वह नहीं तोड़ता। उसका ज़मीर, जिसे अक्सर उसकी नौकरी में कमजोरी समझा जाता है, जोकहानी की असली ताक़त बन जाता है। प्रतीक कहते हैं, “विष्णु की सबसे बड़ी खासियत उसकी गहरी इंसानियत है। और यही इंसानियत… उसे तकलीफ़ देती है।”
सीरीज़ के आख़िरी मिशन में भी विष्णु सीधे मैदान में नहीं है; वह एक दूर के लाइटहाउस पर तैनात है। लेकिन वहां जाकर अपनी टीम के पास रहने का उसका फ़ैसला, उसके लिए बड़ा बदलाव साबित होता है। प्रतीक कहते हैं, “ऑफिस से लाइटहाउस तक का यह सफ़र उसके जीवन का टर्निंग प्वाइंट है। वह भले ही सीधे खतरे में न हो, लेकिन अब वह उन सचाइयों का सामना करने को तैयार है, जिनसे वह हमेशा भागता रहा।”
सनी हिंदूजा, रजत कपूर, सुहैल नैयर, तिलोत्तमा शोम, कृतिका कामरा और अनुप सोनी जैसे कलाकारों के साथ बनी सारे जहाँ से अच्छा एक अलग तरह की जासूसी थ्रिलर है, जहाँ चुप्पी, गिल्ट और संयम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी कार्रवाई महत्वपूर्ण हैं ।

