भारत के एआई-आधारित भविष्य का प्रमुख केंद्र बनने की स्थिति में है भोपाल: मीक 

आत्माराम सोनी.भोपाल

 भारत सरकार द्वारा घोषित 10,300 करोड़ के इंडिया एआई मिशन और 38,000 जीपीयू तैनाती ने इस दिशा को और मजबूती दी है कि बीएचईल के 2,200 एकड़ रिक्त लैंड बैंक पर क्रेडाई भोपाल द्वारा विगत तिमाही प्रस्तुत एआई लाइटहाउस सिटी एवं क्लीन कंप्यूट कैपिटल प्रस्ताव समय से पहले और सही दिशा में था।


कमाल का भोपाल अभियान फाउंडर और क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष  मनोज मीक ने कहाकि राज्य सरकार द्वारा सबमर टेक्नोलॉजी के साथ एमओयू और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की कैबिनेट स्वीकृति के बाद अब भोपाल भारत के एआई-आधारित भविष्य का प्रमुख केंद्र बनने की स्थिति में है। यह पहल कंप्यूट, स्किल्स और रिस्पॉन्सिबल एआई जैसे राष्ट्रीय स्तंभों से पूर्णत: सामंजस्य रखती है। 
 

एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम 
मीक ने कहाकि भारत सरकार की कैबिनेट ने इंडिया एआई मिशन के लिए 10,300 करोड़ रुपए से अधिक के आवंटन को मंजूरी दे दी है, जो भारत के एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत सरकार का यह कदम भारत को एआई टेक्नोलॉजी की दुनिया में काफी आगे लेकर जा सकता है। भारत सरकार का यह इंडिया एआई मिशन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के साथ-साथ मल्टी-मॉडल, डोमेन-स्पेसिफिक लार्ज लैंग्वेज मॉडल के तहत ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट डेवलप करने के लिए एक रूपरेखा भी प्रदान करेगा, जो जेनरेटर एआई प्लेटफाम्र्स के लिए काफी जरूरी होगा। 


भारत में एआई-बेस्ड इकोसिस्टम को बनाया गया मजबूत और एक मल्टी-फेसेटेड फ्रेमवर्क 
 उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद एक ब्रीफिंग में कहाकि भारत में एआई-बेस्ड इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक मल्टी-फेसेटेड फ्रेमवर्क बनाया गया है कि जरूरतमंदों को इस एआई इकोसिस्टम को बनाने के लिए 10,000 से ज्यादा जीपीयू वाली सुपरकंप्यूटिंग कैपिसिटी उपलब्ध कराई जाएगी।  इस मिशन के तहत एक राष्ट्रीय डेटा मैनेजर ऑफिसर नियुक्त किया जाएगा जो डेटा की क्वालिटी में सुधार करने और उन्हें एआई डेवलपमेंट में शामिल करने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों और मंत्रालयों के साथ समन्वय करेगा ।  


 10 हजार करोड़ से एआई बेस्ड मिशंस पर काम करने वाली कंपनियों को की जाएगी मदद 
सरल भाषा में समझें तो सरकार का कहना था कि इन 10,000 करोड़ रुपये से उन प्राइवेट कंपनियों की भी मदद की जाएगी, जो एआई बेस्ड मिशन्स पर काम कर रहे हैं. सरकार के इस कदम से देश में एआई का चलन काफी तेजी से बढ़ेगा, देश में नए एआई टूल्स बनेंगे और एआई के लिए बहुत सारे नए स्टार्ट-अप्स भी शुरू होंगे। 


वर्तमान में भारत में एआई पारिस्थितिकी तंत्र-
भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है।  इस वर्ष वार्षिक राजस्व के 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है। प्रौद्योगिकी और एआई पारिस्थितिकी तंत्र में 6 मिलियन से अधिक लोग कार्यरत हैं। देश में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं। भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं, और पिछले वर्ष शुरू किए गए नए स्टार्टअप में से लगभग 89 फीसदी  ने अपने उत्पादों या सेवाओं में एआई का उपयोग किया। नैसकॉम एआई एडॉप्शन इंडेक्स पर भारत को 4 में से 2.45 अंक मिले हैं, जो दर्शाता है कि 87 फीसदी  उद्यम सक्रिय रूप से एआई समाधानों का उपयोग कर रहे हैं। एआई अपनाने वाले अग्रणी क्षेत्रों में औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएं और खुदरा क्षेत्र, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं तथा बीमा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र शामिल हैं। ये सभी मिलकर एआई के कुल मूल्य में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान करते हैं। हाल ही में हुए बीसीजी सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 26 फीसदी भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर एआई परिपक्वता हासिल कर ली है।